राम मंदिर VIP पास विवाद: दुरुपयोग के आरोपों के बाद बदली व्यवस्था, जानिए कैसे जारी होते हैं पास

राम मंदिर VIP पास विवाद: दुरुपयोग के आरोपों के बाद बदली व्यवस्था, जानिए कैसे जारी होते हैं पास

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले के बाद अब VIP (सुगम दर्शन) पास व्यवस्था भी विवादों में आ गई है। एसआईटी जांच में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद ट्रस्ट ने VIP पास जारी करने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। कई पदाधिकारियों की डिजिटल आईडी निष्क्रिय कर दी गई हैं और अब पास जारी करने का अधिकार सीमित कर दिया गया है।

अब तक ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा और विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव को VIP पास जारी करने का अधिकार प्राप्त था। जांच में उनकी डिजिटल आईडी के कथित दुरुपयोग से बड़ी संख्या में पास जारी होने की बात सामने आने के बाद इन आईडी को निलंबित कर दिया गया है। अब यह जिम्मेदारी ट्रस्ट सदस्य महंत दिनेंद्र दास को सौंपी गई है।

VIP पास कौन जारी कर सकता है?

रामलला के सुगम दर्शन के लिए VIP पास पूरी तरह निःशुल्क होता है। ट्रस्ट के अधिकृत पदाधिकारियों के अलावा अयोध्या के जिलाधिकारी (DM), वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) और डीआईजी भी प्रशासनिक व्यवस्था के तहत VIP पास जारी कर सकते हैं। प्रशासन की ओर से इन अधिकारियों को प्रतिदिन सीमित संख्या में पास जारी करने की सुविधा दी गई है।

ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?

श्रद्धालु श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर दर्शन या आरती के लिए आवेदन कर सकते हैं। मोबाइल नंबर या ईमेल से लॉगिन करने के बाद तिथि और श्रद्धालुओं की जानकारी भरकर आवेदन किया जाता है। एक लॉगिन से अधिकतम 5 लोगों का ऑनलाइन पास बनाया जा सकता है। स्वीकृति मिलने पर पास ऑनलाइन डाउनलोड किया जा सकता है।

ऑफलाइन प्रक्रिया

ऑफलाइन VIP (सुगम दर्शन) पास के लिए पास काउंटर पर निर्धारित फॉर्म भरना होता है, जिसमें नाम, आयु, लिंग और पहचान पत्र का विवरण देना अनिवार्य होता है। एक फॉर्म पर अधिकतम 8 श्रद्धालुओं का पास जारी किया जा सकता है।

विवाद की वजह

एसआईटी जांच में आरोप सामने आए कि कुछ लोगों ने डिजिटल आईडी के कथित दुरुपयोग के जरिए बड़ी संख्या में VIP पास जारी कराए और दर्शन के नाम पर श्रद्धालुओं से अवैध वसूली की गई। हालांकि VIP पास की आधिकारिक व्यवस्था पूरी तरह निशुल्क है। इन आरोपों के बाद ट्रस्ट ने व्यवस्था में बदलाव करते हुए पास जारी करने की प्रक्रिया को अधिक नियंत्रित कर दिया है।

हालांकि, चढ़ावे की कथित चोरी और VIP पास व्यवस्था में अनियमितताओं के आरोपों ने ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल मामले की जांच जारी है और ट्रस्ट ने व्यवस्था को अधिक सुरक्षित एवं पारदर्शी बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही है।