2014 में बुलावा, 2024 में गोद… मोदी का यूपी संग आध्यात्मिक और राजनीतिक सफर

2014 में बुलावा, 2024 में गोद… मोदी का यूपी संग आध्यात्मिक और राजनीतिक सफर

वाराणसी: पीएम नरेंद्र मोदी का जन्मदिन देश भर में मनाया जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ता इस दिवस को धूमधाम से मना रहे हैं। वहीं, प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में इसे अलग ही रूप से मनाया जा रहा है। भाजपा के साथ-साथ धार्मिक संगठन से लेकर नगर निगम तक इस मौके पर कार्यक्रमों के आयोजन कर रहा है। पीएम मोदी के जन्मदिन को यादगार बनाने की हरसंभव कोशिश की गई है। पीएम मोदी को काशी ने आत्मसात किया है तो पिछले एक दशक में काफी कुछ बदल गया है। आज के समय में पीएम मोदी को उत्तर प्रदेश से अलग करके नहीं देखा जा सकता है। वह इस प्रदेश से सीधे तौर पर घुले-मिले दिखते हैं।

2014 में पहला राजनीतिक कदम

2014 से पहले नरेंद्र मोदी गुजरात की सत्ता पर काबिज थे। उनका यूपी की राजनीति से अधिक वास्ता नहीं था। लेकिन, भाजपा चुनाव अभियान समिति में शामिल होने और प्रधानमंत्री का दावेदार बनने के बाद उन्होंने वाराणसी का रुख किया। उस दौरान उन्होंने एक लाइन कही और काशी मानों उनसे जुड़ गया। पीएम मोदी ने तब पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि देखिए भाई, न मैं यहां आया हूं, न मुझे किसी ने भेजा है, मुझे तो मां गंगा ने बुलाया है।

काशी, बाबा विश्वनाथ और मां गंगा के वाक्य ने पीएम मोदी को यूपी के साथ एकाकार करने में बड़ी भूमिका निभाई। 2014 के चुनाव में मोदी लहर ऐसी चली कि यूपी की 80 में से 73 सीटों पर एनडीए जीती। भाजपा अकेले दम पर 71 सीटों पर जीत दर्ज करने में कामयाब रही। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी मोदी मैजिक कम नहीं हुआ। भाजपा 62 और एनडीए 64 सीटों को जीतने में कामयाब हुई।

2024 में दिया बड़ा बयान

पीएम नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2024 में टाइम्स नाऊ के इंटरव्यू में बड़ी बात कही थी। उन्होंने कहा कि 2014 में अचानक ही मेरे मुंह से मां गंगा ने बुलाया है वाला वाक्य निकल गया था। हालांकि, आज 10 साल के बाद मैं पूरे भावुकता के साथ कह सकता हूं। उस समय मैंने कहा था कि मां गंगा ने मुझे बुलाया है, आज मुझे लगता है कि मां गंगा ने मुझे गोद लिया है। पीएम मोदी इस वाक्य को उत्तराखंड में भी पिछले दिनों दोहराते दिखे। इन वाक्यों के जरिए वे यूपी-उत्तराखंड जैसे राज्यों से कनेक्ट करते दिखे हैं।

यही वजह है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में सांसदों के खिलाफ एंटी इनकंबैंसी फैक्टर के बाद भी भारतीय जनता पार्टी 33 और एनडीए 36 सीटों पर जीत दर्ज करने में कामयाब रही। लोकसभा चुनाव के बाद हुए यूपी विधानसभा उपचुनाव में भाजपा ने 10 में से 8 सीटों पर जीत दर्ज की।

केशव मौर्य ने शेयर की स्टोरी

पीएम मोदी को लेकर यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अपनी स्टोरी शेयर की है। उन्होंने अपने पिता के निधन का किस्सा याद किया। उन्होंने कहा कि जब मेरे पूज्य पिताजी निधन हुआ तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझे फोन किया और ढांढस बंधाया। इसके बाद मैं पार्टी के कार्यों में जुट गया। उसके दो साल बाद लोकसभा चुनाव के दौरान जब पीएम मोदी सभा को संबोधित करने कौशांबी आए। उन्होंने सबसे पहले मेरे जैसे सामान्य कार्यकर्ता की सराहना की। उन्हें तब तक वह घटना याद थी।

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि मैं आश्चर्यचकित था कि दुनिया के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री, जिनके साथ देश विदेश के हजारों-लाखों लोग मिलकर फोटो खिचाना चाहते हैं। मेरे जैसे सामान्य कार्यकर्ता की लगभग दो साल पुरानी घटना को यादकर उसका जिक्र करते हैं। यह उनकी एक कार्यकर्ता के प्रति सोच को प्रदर्शित करता है।

बदल दिया राजनीतिक समीकरण

नरेंद्र मोदी ने 2014 में यूपी में आने के बाद राजनीतिक समीकरण ही बदल दिया। इससे पहले समाजवादी पार्टी मुस्लिम-यादव समीकरण के सहारे सत्ता के शिखर तक पहुंचती रही थी। वहीं, बसपा प्रमुख मायावती दलित-मुस्लिम-पिछड़ा वर्ग की राजनीति के जरिए अपनी अलग पकड़ बनाए हुए थी। 2007 में बसपा के समीकरण में ब्राह्मण वोट बैंक जुड़ा तो मायावती पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में सफल हुई। मोदी लहर ने जातीय समीकरणों को प्रदेश में करीब एक दशक तक ध्वस्त रखा।

लोकसभा चुनाव के दौरान प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक यानी पीडीए पॉलिटिक्स के साथ अखिलेश यादव ने अलग प्रभाव दिखाया। हालांकि, यह प्रभाव यूपी उपचुनाव 2024 में बिल्कुल नहीं दिखा। ऐसे में मोदी फैक्टर के कमजोर हो जाने का दावा अभी भी पूरी तरह से सफल होता नहीं दिख रहा है।