ट्विशा शर्मा केस में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: समर्थ सिंह सरेंडर, दूसरा पोस्टमार्टम होगा, CBI जांच की राह खुली

ट्विशा शर्मा केस में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: समर्थ सिंह सरेंडर, दूसरा पोस्टमार्टम होगा, CBI जांच की राह खुली

भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मामले में शुक्रवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। इस एक घंटे लंबी कार्यवाही ने पूरे केस को नई दिशा दे दी है। आम नागरिकों के लिए यह मामला सिर्फ एक कानूनी लड़ाई नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि परिवार न्याय की कितनी लंबी लड़ाई लड़ रहा है। ट्विशा की मौत के बाद से उठे सवाल अब अदालत के फैसलों से जुड़कर और गहरा हो गए हैं।

12 मई 2026 को भोपाल में ससुराल में ट्विशा शर्मा की मौत हुई थी। शुरुआत में इसे आत्महत्या बताया गया, लेकिन परिवार ने लगातार संदेह जताया। ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है और निष्पक्ष जांच जरूरी है। इस मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है।

हाईकोर्ट में चार याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई

शुक्रवार को हाईकोर्ट में चार अलग-अलग याचिकाओं पर बहस हुई। इनमें समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत, गिरिबाला सिंह की जमानत निरस्तीकरण और सेकंड पोस्टमार्टम की मांग शामिल थी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कोर्ट को अवगत कराया कि पहले पोस्टमार्टम में कोई संदेह नहीं है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार सेकंड पोस्टमार्टम का विरोध नहीं कर रही है।

कोर्ट ने परिवार की मांग को स्वीकार करते हुए दूसरी मेडिकल टीम से सेकंड पोस्टमार्टम कराने की अनुमति दे दी। यह फैसला परिवार के लिए बड़ी राहत की तरह है, क्योंकि वे पहले रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं थे।

समर्थ सिंह का सरेंडर और जमानत की स्थिति

सुनवाई के सबसे अहम मोड़ में ट्विशा के पति समर्थ सिंह ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया। मौत के बाद से वह फरार चल रहे थे और पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई थी। समर्थ सिंह की ओर से पेश वकील ने अग्रिम जमानत याचिका वापस ले ली। कोर्ट ने इस पर अनुमति दे दी।

दूसरी तरफ, ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत निरस्त करने की मांग पर भी सुनवाई हुई। भोपाल जिला अदालत से पहले मिली जमानत को ट्विशा के पिता और मध्य प्रदेश सरकार दोनों ने चुनौती दी थी। कोर्ट ने इस याचिका पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

CBI जांच की सिफारिश और अगली सुनवाई

मध्य प्रदेश सरकार ने इस पूरे मामले की जांच CBI को सौंपने की सिफारिश कर दी है। परिवार का आरोप है कि ससुराल पक्ष में एक पूर्व जिला जज के प्रभाव के कारण स्थानीय जांच प्रभावित हो सकती है। इसलिए उन्होंने साक्ष्य छिपाने के आरोपों के साथ CBI जांच की मांग की थी।

ट्विशा के परिवार की ओर से वकील पीयूष तिवारी ने कोर्ट में मजबूती से पक्ष रखा। महाधिवक्ता प्रशांत सिंह व्यक्तिग रूप से मौजूद रहे। कोर्ट ने अगली सुनवाई 25 मई दोपहर 2:30 बजे तय की है।

यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि कानूनी प्रक्रिया कितनी जटिल और संवेदनशील हो सकती है। ट्विशा शर्मा की मौत आत्महत्या थी या हत्या, या फिर कोई और वजह थी—यह सवाल अब सेकंड पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आगे की जांच पर निर्भर करेगा। आम पाठक इस मामले को इसलिए भी फॉलो कर रहे हैं क्योंकि इसमें न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता और परिवार के संघर्ष की कहानी जुड़ी हुई है।

अंत में, इस तरह के मामले याद दिलाते हैं कि हर मौत के पीछे एक परिवार की पीड़ा और सच्चाई की तलाश होती है। 25 मई को होने वाली सुनवाई इस हाई प्रोफाइल मामले की दिशा तय करने वाली साबित हो सकती है।