कर्नाटक की राजनीति में लंबे समय से चल रही अटकलों के बाद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार को इस्तीफा दे दिया है। अब उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे हैं। इस खबर के साथ ही सोशल मीडिया पर डीके शिवकुमार की कुल संपत्ति को लेकर सर्च बढ़ गए हैं।
चुनावी हलफनामे के अनुसार, डीके शिवकुमार और उनके परिवार के पास १,४१३.७८ करोड़ रुपये की संपत्ति है। यह आंकड़ा उन्हें देश के सबसे अमीर नेताओं की सूची में रखता है। आम कर्नाटकवासी के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि उनका अगला मुख्यमंत्री कितना संपन्न है और उसकी दौलत राज्य की नीतियों पर क्या असर डाल सकती है।
पांच साल में संपत्ति में भारी उछाल
साल २०२३ के विधानसभा चुनाव के हलफनामे में डीके शिवकुमार ने अपनी कुल संपत्ति १,४१३.७८ करोड़ रुपये बताई थी। जबकि २०१८ में यह आंकड़ा ८४०.०८ करोड़ रुपये था। यानी पांच साल में उनकी संपत्ति में करीब ५७३ करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है।
उन पर २६३ करोड़ रुपये का कर्ज भी है। परिवार की चल संपत्ति २७३.४२ करोड़ रुपये है, जबकि अचल संपत्ति १,१४०.३६ करोड़ रुपये की है। खास बात यह है कि डीके शिवकुमार की व्यक्तिगत अचल संपत्ति अकेले ९७२.६५ करोड़ रुपये है। रियल एस्टेट और अन्य निवेशों में हुई बढ़ोतरी ने उनकी संपत्ति को नई ऊंचाई दी है।
लग्जरी घड़ियों का शौक, लेकिन सिर्फ एक पुरानी गाड़ी
डीके शिवकुमार की जीवनशैली को देखें तो इसमें विरोधाभास साफ नजर आता है। उनके नाम पर सिर्फ एक पुरानी टोयोटा क्वालिस कार दर्ज है। लेकिन लग्जरी घड़ियों का उनको खास शौक है। उनके पास Rolex और Hublot जैसी विश्व प्रसिद्ध ब्रांड की घड़ियां हैं।
इसके अलावा उनके पास अच्छी मात्रा में सोना और चांदी भी है। ये छोटी-छोटी बातें उनके व्यक्तिगत स्वभाव और निवेश की रणनीति को दर्शाती हैं।
राजनीतिक सफर और संकटमोचक की छवि
डीके शिवकुमार का राजनीतिक करियर चार दशक से ज्यादा पुराना है। उन्होंने १९८९ में पहली बार कर्नाटक विधानसभा का चुनाव जीता था। वर्तमान में वे कनकपुरा सीट से विधायक हैं और कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष भी हैं। ऊर्जा और शहरी विकास जैसे अहम मंत्रालय संभाल चुके हैं।
उन्हें कांग्रेस पार्टी का संकटमोचक माना जाता है। २०१७ के गुजरात राज्यसभा चुनाव के दौरान जब विधायकों को बेंगलुरु के रिजॉर्ट में रखा गया था, तब डीके शिवकुमार पूरे देश में चर्चा में आए थे। २०२३ के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया।
उनके हलफनामे में १९ आपराधिक मामले भी दर्ज हैं।
नए CM के रूप में क्या होगा असर?
डीके शिवकुमार जैसे धनी नेता के मुख्यमंत्री बनने से कर्नाटक में औद्योगिक निवेश, बुनियादी ढांचे और रियल एस्टेट नीतियों पर खास ध्यान दिए जाने की उम्मीद है। उनका बिजनेस बैकग्राउंड राज्य की आर्थिक प्रगति में मददगार साबित हो सकता है।
हालांकि, विपक्षी दल उनकी संपत्ति को लेकर सवाल उठा सकते हैं। आम नागरिकों की नजर में अब यह देखना होगा कि इतनी बड़ी संपत्ति वाले नेता राज्य के सामान्य लोगों की समस्याओं — जैसे किसानों की दिक्कतें, युवाओं की बेरोजगारी और शहरी सुविधाओं — को कितना प्राथमिकता देते हैं।
कर्नाटक की राजनीति में यह बदलाव न सिर्फ सत्ता हस्तांतरण है, बल्कि एक नए युग की शुरुआत भी हो सकता है। डीके शिवकुमार की नेतृत्व क्षमता और उनकी संपत्ति दोनों अब कड़ी परीक्षा के दौर में हैं।


