केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के लिए पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। सोमवार 1 जून को केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इसकी घोषणा की। इन नियुक्तियों के बाद सुप्रीम कोर्ट में जजों की कुल संख्या 37 हो गई है। आम नागरिकों के लिए यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि लंबित मुकदमों के निपटारे में तेजी आएगी और न्यायिक प्रक्रिया और मजबूत होगी। इन नियुक्तियों की सिफारिश मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने की थी।
चार मुख्य न्यायाधीश और एक वरिष्ठ वकील की नियुक्ति
नए न्यायाधीशों में चार हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और एक वरिष्ठ महिला वकील शामिल हैं। जस्टिस शील नागू, जस्टिस श्री चंद्रशेखर, जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस अरुण पल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं। वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना को वकील से सीधे सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया है। यह नियुक्ति इसलिए खास है क्योंकि वे जस्टिस इंदु मल्होत्रा के बाद दूसरी महिला वकील हैं जिन्हें इस पद पर चुना गया है।
जस्टिस शील नागू और जस्टिस श्री चंद्रशेखर का समृद्ध अनुभव
जस्टिस शील नागू का जन्म 1 जनवरी 1965 को हुआ था। वे मूल रूप से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से जुड़े रहे और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे। 1987 में वकालत शुरू करने वाले नागू सिविल, संवैधानिक और सेवा मामलों के विशेषज्ञ माने जाते हैं। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले दिए हैं। उनका कार्यकाल 31 दिसंबर 2029 तक रहेगा।
जस्टिस श्री चंद्रशेखर रांची में जन्मे और दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई करने के बाद 1993 में वकालत शुरू की। वे झारखंड हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं। सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ और मालेगांव ब्लास्ट जैसे संवेदनशील मामलों की सुनवाई उनके करियर का हिस्सा रही है। झारखंड का सुप्रीम कोर्ट में प्रतिनिधित्व न होने के कारण उनकी नियुक्ति को खास माना जा रहा है। वे मई 2030 में रिटायर होंगे।
जस्टिस संजीव सचदेवा, जस्टिस अरुण पल्ली और वी. मोहना की भूमिका
जस्टिस संजीव सचदेवा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से आ रहे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़े सचदेवा ने दिल्ली हाईकोर्ट में काम किया और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के स्थायी वकील के रूप में भी सेवा दी। उनका सुप्रीम कोर्ट में कार्यकाल साढ़े तीन साल का होगा।
जस्टिस अरुण पल्ली पटियाला में जन्मे और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में लंबे समय तक जज रहे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य किया। उनका कार्यकाल सुप्रीम कोर्ट में तीन साल से ज्यादा रहेगा।
वरिष्ठ वकील वी. मोहना कोयंबटूर से हैं। 1996 में सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड बनीं और 2015 में सीनियर एडवोकेट बनीं। वे सशस्त्र बलों में महिलाओं के स्थायी कमीशन, वरिष्ठ नागरिकों के संपत्ति अधिकार और कर्नाटक हिजाब मामले जैसे महत्वपूर्ण मुकदमों में पेश हो चुकी हैं। वे जस्टिस बी.वी. नागरत्ना के बाद सुप्रीम कोर्ट की दूसरी महिला जज होंगी। उनका कार्यकाल जून 2031 तक रहेगा।
न्यायिक व्यवस्था पर क्या होगा असर?
ये नियुक्तियां सुप्रीम कोर्ट को और मजबूत बनाएंगी। विभिन्न हाईकोर्टों और क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व बढ़ने से फैसलों में विविधता और गहराई आएगी। आम पाठक के नजरिए से देखें तो लंबे समय से लंबित मामले अब तेजी से निपट सकते हैं। इससे आम आदमी को न्याय मिलने में आसानी होगी, खासकर संवैधानिक और सामाजिक महत्व के मुद्दों पर।
कुल मिलाकर, यह कदम न्यायपालिका की दक्षता बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास है। अब उम्मीद की जा रही है कि नई टीम मिलकर देश की न्याय व्यवस्था को और विश्वसनीय और तेज बनाएगी।


