राम मंदिर ट्रस्ट पर बढ़े सवाल: ‘20 हजार की नौकरी, लेकिन करोड़ों की संपत्ति?’ कर्मचारियों की बढ़ती दौलत पर उठी जांच की मांग

राम मंदिर ट्रस्ट पर बढ़े सवाल: ‘20 हजार की नौकरी, लेकिन करोड़ों की संपत्ति?’ कर्मचारियों की बढ़ती दौलत पर उठी जांच की मांग

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की राशि को लेकर उठे विवाद के बीच अब ट्रस्ट से जुड़े कुछ कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति भी चर्चा के केंद्र में आ गई है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि पिछले कुछ वर्षों में कुछ कर्मचारियों की जीवनशैली में अचानक बड़ा बदलाव आया है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहे हैं कि सीमित वेतन पाने वाले कुछ लोग कैसे आलीशान मकानों, महंगी गाड़ियों, होटल और हॉस्टल जैसे कारोबारों के मालिक बन गए। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच की मांग लगातार तेज हो रही है।

राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच यह मुद्दा तब और चर्चा में आया जब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के शिष्य और मणिराम दास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने सार्वजनिक रूप से कुछ कर्मचारियों की बढ़ती संपत्ति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा था कि जो लोग कुछ साल पहले साधारण जीवन जी रहे थे, आज उनके पास लग्जरी वाहन और बड़े-बड़े मकान दिखाई दे रहे हैं।

अचानक बदली जीवनशैली ने बढ़ाए सवाल

अयोध्या में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा उन कर्मचारियों को लेकर हो रही है, जो ट्रस्ट बनने के बाद मंदिर प्रशासन से जुड़े। स्थानीय लोगों और सूत्रों का दावा है कि कुछ कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में असामान्य रूप से तेजी से सुधार हुआ है।

बताया जा रहा है कि कुछ लोगों ने हाल के वर्षों में कई चार पहिया वाहन खरीदे हैं, जबकि कुछ ने हॉस्टल, होटल और अन्य व्यवसायों में निवेश किया है। आरोप यह भी हैं कि कई कर्मचारियों के परिवारों ने जमीनों में बड़ी रकम लगाई है।

हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन चढ़ावे को लेकर विवाद सामने आने के बाद इन मामलों को भी जांच के दायरे में लाने की मांग उठ रही है।

होटल, हॉस्टल और कारोबार की चर्चा क्यों?

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट से जुड़े कुछ कर्मचारियों ने धार्मिक पर्यटन से जुड़े कारोबार में भी प्रवेश किया है। आरोप है कि कुछ लोग श्रद्धालुओं को दर्शन, आवास, भोजन और स्थानीय भ्रमण की सुविधाएं उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क से जुड़े हुए हैं।

यह भी दावा किया जा रहा है कि कुछ कर्मचारियों के परिजन होटल और गेस्ट हाउस संचालित कर रहे हैं। वहीं कुछ लोगों ने हॉस्टल और परिवहन सेवाओं में निवेश किया है। इसी वजह से उनकी आय के स्रोतों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

इन आरोपों के बीच कई लोगों का कहना है कि यदि किसी के पास वैध आय के स्रोत हैं तो इसकी जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है और अनावश्यक अटकलों पर भी विराम लगेगा।

ट्रस्ट कर्मचारियों की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल

राम जन्मभूमि परिसर में कर्मचारियों की भूमिका और प्रभाव को लेकर भी चर्चा हो रही है। कुछ लोगों का दावा है कि कुछ कर्मचारियों का प्रभाव प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था तक महसूस किया जाता है।

इसके अलावा आरोप लगाए गए हैं कि कुछ कर्मचारियों को परिसर के संवेदनशील और प्रतिबंधित क्षेत्रों तक विशेष पहुंच प्राप्त है। सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो और तस्वीरों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं, जिनमें कथित तौर पर प्रतिबंधित क्षेत्रों के दृश्य दिखाई देते हैं।

हालांकि इन सभी आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

SIT जांच पर टिकीं निगाहें

राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार पहले ही विशेष जांच दल (SIT) गठित कर चुकी है। लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में गठित टीम को सात दिन में प्रारंभिक और 15 दिन में अंतिम रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।

जांच के दौरान चढ़ावे की गणना, वित्तीय रिकॉर्ड, सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका सहित विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की जाएगी। ऐसे में अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या कर्मचारियों की बढ़ती संपत्ति से जुड़े आरोपों की भी पड़ताल होती है।

फिलहाल, करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग सबसे प्रमुख मुद्दा बन गई है।