क्या उद्धव ठाकरे की पार्टी में टूट की आहट? नाराज सांसदों की दिल्ली में हलचल, डैमेज कंट्रोल के लिए पहुंचे संजय राउत

क्या उद्धव ठाकरे की पार्टी में टूट की आहट? नाराज सांसदों की दिल्ली में हलचल, डैमेज कंट्रोल के लिए पहुंचे संजय राउत

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहब ठाकरे) के कुछ सांसदों की नाराजगी की खबरों के बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत का अचानक दिल्ली पहुंचना कई सवाल खड़े कर रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी के कुछ सांसद नेतृत्व से असंतुष्ट हैं और आने वाले दिनों में बड़ा फैसला ले सकते हैं। हालांकि अभी तक किसी सांसद ने सार्वजनिक तौर पर पार्टी छोड़ने की घोषणा नहीं की है।

इस घटनाक्रम ने इसलिए भी ध्यान खींचा है क्योंकि हाल के वर्षों में शिवसेना पहले ही बड़े राजनीतिक विभाजन का सामना कर चुकी है। ऐसे में उद्धव ठाकरे गुट किसी भी संभावित टूट को लेकर अतिरिक्त सतर्क नजर आ रहा है।

दिल्ली में बढ़ी सियासी गतिविधियां, क्या पक रही है नई रणनीति?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उद्धव ठाकरे गुट के कुछ सांसद हाल के दिनों में दिल्ली में सक्रिय रहे हैं। चर्चा यह भी है कि इनमें से कुछ नेताओं ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के नेताओं से मुलाकात की है। केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव के साथ कथित बैठकों की खबरों ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दे दी है।

सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि कुछ सांसद जल्द ही लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर सकते हैं। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि ऐसा होता है तो महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया मोड़ आ सकता है।

क्यों नाराज बताए जा रहे हैं कुछ सांसद?

रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ सांसद पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली से असंतुष्ट हैं। बताया जा रहा है कि उनकी शिकायत है कि पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे तक पहुंचना आसान नहीं है और महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दों पर संवाद की कमी महसूस की जा रही है।

दिलचस्प बात यह है कि 2022 में जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना का बड़ा विभाजन हुआ था, तब भी कुछ विधायकों ने इसी तरह की शिकायतें सार्वजनिक रूप से रखी थीं। अब एक बार फिर उसी तरह की चर्चाएं सामने आने लगी हैं।

हालांकि पार्टी की ओर से इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

डैमेज कंट्रोल में जुटे संजय राउत

इसी बीच संजय राउत का दिल्ली पहुंचना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व ने सांसदों के बीच संवाद स्थापित करने और स्थिति को संभालने की जिम्मेदारी राउत को सौंपी है।

राउत पहले भी दावा कर चुके हैं कि पार्टी के सभी सांसद एकजुट हैं और उद्धव ठाकरे लगातार उनसे संपर्क में हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि जो नेता पार्टी छोड़ना चाहते थे, वे पहले ही जा चुके हैं।

लेकिन दिल्ली में जारी बैठकों और राजनीतिक गतिविधियों ने इन दावों पर नई बहस छेड़ दी है।

क्या फिर दोहराएगा 2022 जैसा सियासी घटनाक्रम?

फिलहाल शिवसेना (यूबीटी) के पास लोकसभा में 9 सांसद हैं। राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से किसी अलग समूह के गठन के लिए बड़ी संख्या में सांसदों का समर्थन आवश्यक होगा। ऐसे में सभी की नजर इस बात पर है कि क्या नाराज सांसद वास्तव में कोई बड़ा कदम उठाएंगे या फिर पार्टी नेतृत्व उन्हें मनाने में सफल रहेगा।

उधर, आदित्य ठाकरे ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा है कि पार्टी को अपने सांसदों पर पूरा भरोसा है और अफवाहों पर ध्यान नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी एकजुट है और किसी भी तरह की टूट की आशंकाएं बेबुनियाद हैं।

हालांकि महाराष्ट्र की राजनीति का हालिया इतिहास बताता है कि जब भी ऐसी चर्चाएं शुरू होती हैं, सियासी समीकरण तेजी से बदल सकते हैं। ऐसे में आने वाले कुछ दिन उद्धव ठाकरे की पार्टी के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।