‘यमराज भी आ जाएं तो फाइल नहीं मिलती थी…’ CM योगी का बड़ा तंज, पुलिस सुधारों का जिक्र कर IAS-IPS सिस्टम पर साधा निशाना

‘यमराज भी आ जाएं तो फाइल नहीं मिलती थी…’ CM योगी का बड़ा तंज, पुलिस सुधारों का जिक्र कर IAS-IPS सिस्टम पर साधा निशाना

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को पुलिस विभाग में चयनित कंप्यूटर ऑपरेटरों को नियुक्ति पत्र वितरित करते हुए पुलिस व्यवस्था में हुए बदलावों पर विस्तार से बात की। इस दौरान उन्होंने पुलिस सुधार, कमिश्नरेट सिस्टम और कानून-व्यवस्था को लेकर अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में एक ऐसी टिप्पणी भी की, जिसने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी।

सीएम योगी ने कहा कि एक समय ऐसा था जब प्रशासनिक व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण फाइलें लंबे समय तक अटकी रहती थीं। उन्होंने हंसते हुए कहा कि हालात ऐसे थे कि अगर कोई फाइल बंद हो जाए तो उसे ढूंढना मुश्किल हो जाता था। यहां तक कि “यमराज भी आ जाएं तो फाइल नहीं मिलती थी।” मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू करने के संदर्भ में आई।

कमिश्नरेट सिस्टम पर क्यों बोले मुख्यमंत्री?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश के कई बड़े शहरों में दशकों से लागू पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम को उत्तर प्रदेश में लागू करने की चर्चा लंबे समय से होती रही, लेकिन इसे जमीन पर उतारने का साहस पहले किसी ने नहीं दिखाया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने यह फैसला लिया और प्रदेश के कई बड़े जिलों में कमिश्नरेट व्यवस्था लागू की।

उन्होंने कहा कि पुलिस सुधारों को समझे बिना कुछ लोग इस व्यवस्था की आलोचना करते हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार कमिश्नरेट सिस्टम का उद्देश्य कानून-व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना और निर्णय प्रक्रिया को तेज करना है। उन्होंने कहा कि सुधारों के रास्ते में आलोचना स्वाभाविक है, लेकिन सरकार ने बेहतर प्रशासन के लिए जरूरी कदम उठाए हैं।

‘2017 से पहले पुलिस भी सुरक्षित नहीं थी’

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले की कानून-व्यवस्था का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि उस दौर में प्रदेश में बार-बार दंगे होते थे, कई जगह लंबे समय तक कर्फ्यू लगाना पड़ता था और पुलिस अधिकारी भी सुरक्षित महसूस नहीं करते थे।

उन्होंने मुरादाबाद की एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए कहा कि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पर हमला हुआ था। मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने में भी राजनीतिक दबाव बनाया जाता था। हालांकि अब स्थिति बदल चुकी है और अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रेनिंग पर सरकार का जोर

सीएम योगी ने कहा कि पुलिस बल को मजबूत बनाने के लिए केवल भर्ती ही नहीं, बल्कि आधारभूत ढांचे को भी विकसित किया गया है। उन्होंने बताया कि पहले पुलिसकर्मियों को जर्जर बैरकों में रहना पड़ता था, जबकि अब कई जिलों में आधुनिक पुलिस आवास और बैरक बनाए गए हैं।

मुख्यमंत्री के अनुसार पहले प्रदेश में पुलिस प्रशिक्षण की क्षमता सीमित थी, जिसके कारण जवानों को दूसरे राज्यों और केंद्रीय संस्थानों में ट्रेनिंग के लिए भेजना पड़ता था। अब उत्तर प्रदेश में ही बड़े स्तर पर प्रशिक्षण की व्यवस्था विकसित की गई है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में फॉरेंसिक सुविधाओं का भी तेजी से विस्तार हुआ है। पहले जहां केवल कुछ फॉरेंसिक लैब थीं, वहीं अब कई जिलों में आधुनिक लैब और साइबर जांच सुविधाएं उपलब्ध हैं।

भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता का दावा

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 930 कंप्यूटर ऑपरेटरों को नियुक्ति पत्र सौंपे। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार में भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से संचालित की जा रही है। उनके मुताबिक भर्ती में किसी प्रकार की सिफारिश या भेदभाव की गुंजाइश नहीं रखी गई है।

सीएम योगी ने यह भी कहा कि पिछले नौ वर्षों में बड़ी संख्या में युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गई हैं और प्रदेश में निवेश तथा रोजगार के अवसर बढ़े हैं। उन्होंने दावा किया कि बेहतर कानून-व्यवस्था और सुरक्षा वातावरण ने उत्तर प्रदेश की छवि बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री का यह संबोधन केवल नियुक्ति पत्र वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें प्रशासनिक सुधार, पुलिस आधुनिकीकरण और शासन व्यवस्था को लेकर सरकार के दृष्टिकोण की भी झलक देखने को मिली।