महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आता दिख रहा है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के भीतर लंबे समय से चल रही असंतोष की खबरें अब खुली बगावत में बदलती नजर आ रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने उद्धव ठाकरे से दूरी बना ली है और एकनाथ शिंदे गुट के साथ जाने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। अब सिर्फ आधिकारिक घोषणा का इंतजार बताया जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता को लेकर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि बागी सांसदों ने अपनी नाराजगी की वजह पार्टी की कथित राजनीतिक दिशा और कांग्रेस के साथ संभावित विलय की चर्चाओं को बताया है।
आधी रात से शुरू हुआ ऑपरेशन, दिल्ली में हुई अहम मुलाकात
सूत्रों के अनुसार, 16 जून की रात से ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई थीं। अलग-अलग शहरों से कई सांसद निजी विमानों के जरिए दिल्ली पहुंचे। इसके बाद राजधानी में लगातार बैठकों का दौर चला।
बताया जा रहा है कि सबसे पहले सांसद नागेश पाटिल अष्टिकर दिल्ली पहुंचे। इसके बाद संजय देशमुख और संजय जाधव भी राजधानी पहुंचे। वहीं भाऊसाहेब वाकचौरे, संजय दीना पाटिल और अन्य नेताओं की भी दिल्ली में मौजूदगी दर्ज हुई।
इसी दौरान महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी जयपुर होते हुए देर रात दिल्ली पहुंचे। उनके बेटे और सांसद श्रीकांत शिंदे भी सुबह राजधानी पहुंचे। इसके बाद घटनाक्रम तेजी से आगे बढ़ा।
स्पीकर से मुलाकात के बाद साफ हुए संकेत
सूत्रों के मुताबिक, बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा। सांसदों ने एक पत्र भी सौंपा, जिसमें उन्होंने दावा किया कि पार्टी नेतृत्व मूल विचारधारा से दूर हो गया है।
सांसदों का आरोप है कि शिवसेना (यूबीटी) को कांग्रेस के साथ विलय की दिशा में ले जाने की कोशिश हो रही है। इसी कारण उन्होंने अलग रास्ता चुनने का फैसला किया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि दो-तिहाई सांसद किसी अलग समूह के साथ जाने का निर्णय लेते हैं, तो दल-बदल कानून के तहत उन्हें कानूनी राहत मिल सकती है। यही वजह है कि 9 में से 6 सांसदों का एक साथ खड़ा होना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बैठक में नहीं पहुंचे सांसद, बढ़ गया था शक
पिछले कुछ दिनों से संकेत मिलने लगे थे कि पार्टी के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है। उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई बैठकों में कई सांसद लगातार अनुपस्थित रहे।
हाल ही में हुई एक अहम बैठक में भी केवल तीन सांसदों की मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी थी। पार्टी की ओर से बैठक के लिए व्हिप जैसी सख्ती के बावजूद कई सांसद शामिल नहीं हुए।
यही वह मोड़ था, जहां से यह स्पष्ट होने लगा कि असंतोष केवल नाराजगी तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े राजनीतिक फैसले की तैयारी चल रही है।
महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों के संकेत
इस पूरे घटनाक्रम के बाद शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय ताकत पर असर पड़ सकता है। वहीं एकनाथ शिंदे गुट को इससे बड़ा राजनीतिक फायदा मिलने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि, अभी तक उद्धव ठाकरे या पार्टी नेतृत्व की ओर से इन दावों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दूसरी तरफ, बागी सांसदों की गतिविधियां लगातार यह संकेत दे रही हैं कि महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा अध्याय खुलने वाला है।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में क्या यह राजनीतिक बगावत औपचारिक रूप लेती है या फिर पार्टी नेतृत्व आखिरी समय में नुकसान को रोकने में सफल होता है।



