25 हजार करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट: 39 KM लंबे गंगा-वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर से बदलेगी काशी की तस्वीर

25 हजार करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट: 39 KM लंबे गंगा-वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर से बदलेगी काशी की तस्वीर

वाराणसी को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और विश्वस्तरीय धार्मिक पर्यटन हब बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में शामिल गंगा और वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना अब जमीन पर उतरने लगी है। करीब 25 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस महत्वाकांक्षी योजना से काशी की ट्रैफिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। परियोजना पूरी होने के बाद वाराणसी में दिल्ली-एनसीआर जैसी एलिवेटेड रोड नेटवर्क की सुविधा विकसित होगी, जिससे शहर के जाम से राहत मिलेगी और लाखों श्रद्धालुओं का सफर आसान होगा।

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ओर से प्रस्तावित इस योजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। प्रशासन ने प्रभावित 41 गांवों में जमीन की खरीद-बिक्री और अन्य भूमि संबंधी लेन-देन पर फिलहाल रोक लगा दी है ताकि परियोजना को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा सके।

39 किलोमीटर का एलिवेटेड नेटवर्क, शहर को मिलेगी नई रफ्तार

इस परियोजना के तहत दो बड़े एलिवेटेड कॉरिडोर बनाए जाएंगे। पहला वरुणा लिंक कॉरिडोर होगा, जिसकी लंबाई करीब 21.15 किलोमीटर होगी। यह NH-31 को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ेगा। दूसरा गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर करीब 18.10 किलोमीटर लंबा होगा, जो NH-19 से रिंग रोड तक विकसित किया जाएगा।

दोनों कॉरिडोर मिलकर लगभग 39 किलोमीटर का हाई-स्पीड नेटवर्क तैयार करेंगे। इसका मकसद शहर के भीतर ट्रैफिक दबाव कम करना और बाहरी जिलों से आने वाले वाहनों को सीधे गंतव्य तक पहुंचाना है। इससे शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में वाहनों का प्रवेश काफी कम हो सकेगा।

बाबा विश्वनाथ आने वाले श्रद्धालुओं को होगी बड़ी राहत

वाराणसी हर साल करोड़ों श्रद्धालुओं और पर्यटकों का स्वागत करता है। खासकर काशी विश्वनाथ धाम बनने के बाद यहां आने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। वर्तमान में मंदिर क्षेत्र तक पहुंचने में जाम और पार्किंग जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

नई परियोजना के तहत बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, प्रयागराज, गाजीपुर, बलिया और भदोही जैसे इलाकों से आने वाले श्रद्धालु सीधे एलिवेटेड कॉरिडोर के जरिए निर्धारित पार्किंग तक पहुंच सकेंगे। मंदिर क्षेत्र के पास करीब 4,000 वाहनों की क्षमता वाली पार्किंग भी प्रस्तावित है, जिससे दर्शन व्यवस्था और सुगम होगी।

एयरपोर्ट से नमो घाट और रामनगर तक सीधा कनेक्शन

परियोजना की खास बात यह है कि बाबतपुर एयरपोर्ट से आने वाले यात्रियों को शहर के भीतर ट्रैफिक में फंसने की जरूरत नहीं पड़ेगी। प्रस्तावित मार्ग हरहुआ क्षेत्र से शुरू होकर वरुणा नदी के किनारे सेंट्रल जेल, चौकाघाट, आयुर्वेद कॉलेज और नमो घाट तक पहुंचेगा। इसके बाद यह सिग्नेचर ब्रिज से जुड़ते हुए रामनगर के टेंगरा मोड़ तक जाएगा।

इस रूट पर कई इंटरचेंज बनाए जाएंगे ताकि यात्रियों को विभिन्न हिस्सों तक आसानी से पहुंचने की सुविधा मिल सके।

41 गांवों की जमीन परियोजना के दायरे में

इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए वाराणसी जिले के 41 गांव और कई शहरी क्षेत्र प्रभावित होंगे। प्रशासन का कहना है कि कोशिश की जा रही है कि किसानों की जमीन का कम से कम उपयोग हो और अधिकतम सरकारी भूमि का इस्तेमाल किया जाए।

भूमि अधिग्रहण को लेकर प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए प्रभावित क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री, दानपत्र, भूमि उपयोग परिवर्तन और अन्य हस्तांतरण पर अस्थायी रोक लगा दी है।

काशी के विकास में नया अध्याय

विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा और वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर सिर्फ ट्रैफिक सुधार परियोजना नहीं है, बल्कि यह वाराणसी के आर्थिक, धार्मिक और पर्यटन विकास का नया आधार बनेगी। यात्रा समय घटेगा, व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी और पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलेगा।

अगर परियोजना तय समय पर पूरी होती है, तो वाराणसी देश के उन चुनिंदा शहरों में शामिल हो जाएगा जहां आधुनिक शहरी परिवहन और धार्मिक पर्यटन का अनोखा संगम देखने को मिलेगा।