उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी का दौर लगातार तेज होता जा रहा है। योगी सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने एक बार फिर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। इस बार उन्होंने अपनी बात रखने के लिए फिल्म ‘धुरंधर’ का उदाहरण दिया और नोटबंदी, अतीक अहमद के कथित काले धन तथा गोमती रिवरफ्रंट परियोजना को एक साथ जोड़ते हुए कई गंभीर आरोप लगाए।
राजभर का दावा है कि वर्ष 2016 में हुई नोटबंदी ने उस चुनावी गणित को बिगाड़ दिया था, जिस पर समाजवादी पार्टी को भरोसा था। उन्होंने कहा कि नोटबंदी के कारण कथित तौर पर जमा काले धन का इस्तेमाल नहीं हो सका और इसका असर 2017 के विधानसभा चुनाव पर पड़ा।
नोटबंदी और 2017 चुनाव को जोड़कर क्या बोले राजभर?
सोशल मीडिया पर किए गए अपने ताजा बयान में ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लागू की गई नोटबंदी ने कई लोगों की योजनाओं पर पानी फेर दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी वजह से कथित तौर पर उपलब्ध काले धन का इस्तेमाल चुनाव में नहीं हो पाया।
राजभर ने दावा किया कि 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले कुछ लोगों को सत्ता में वापसी का भरोसा था, लेकिन नोटबंदी के बाद पूरा समीकरण बदल गया। हालांकि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई नया दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया।
गोमती रिवरफ्रंट परियोजना को लेकर फिर उठाए सवाल
राजभर ने अपने बयान में गोमती रिवरफ्रंट परियोजना का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना का पूरा बजट खर्च होने के बावजूद काम पूरी तरह पूरा नहीं हुआ। उनके अनुसार, परियोजना के खर्च और वास्तविक काम के बीच बड़ा अंतर था।
गौरतलब है कि गोमती रिवरफ्रंट परियोजना की शुरुआत 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल में हुई थी। परियोजना का उद्देश्य लखनऊ में गोमती नदी के किनारों का सौंदर्यीकरण और आधुनिक विकास था।
योगी सरकार के सत्ता में आने के बाद इस परियोजना की जांच कराई गई थी। जांच रिपोर्ट में खर्च और काम की प्रगति को लेकर सवाल उठाए गए थे, जिसके बाद मामला विभिन्न जांच एजेंसियों तक पहुंचा।
जांच एजेंसियों की कार्रवाई और पुराना मामला
गोमती रिवरफ्रंट मामले की जांच कई वर्षों से जारी है। इस मामले में सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) दोनों जांच कर चुके हैं। जांच के दौरान कई अधिकारियों, इंजीनियरों और परियोजना से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई।
सरकारी जांच में यह सामने आया था कि बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद परियोजना का पूरा काम तय समय पर पूरा नहीं हुआ। इसके बाद यूपी पुलिस की एफआईआर के आधार पर मामला सीबीआई को सौंपा गया था।
फरवरी 2021 में सीबीआई ने इस मामले में पहली चार्जशीट दाखिल की थी। बाद में एजेंसी ने कई राज्यों में छापेमारी कर बड़ी संख्या में लोगों के खिलाफ नई कार्रवाई भी शुरू की।
सियासी बयानबाजी से फिर गर्म हुआ यूपी का माहौल
ओम प्रकाश राजभर पिछले कुछ समय से लगातार समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को निशाने पर ले रहे हैं। वहीं, समाजवादी पार्टी पहले भी ऐसे आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी और ध्यान भटकाने की कोशिश करार देती रही है।
राजभर ने अपने ताजा बयान में यह भी कहा कि उनके पास कई मुद्दों से जुड़ी जानकारी है और वह आने वाले समय में और खुलासे करेंगे। ऐसे में माना जा रहा है कि 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी के बीच उत्तर प्रदेश में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो सकता है।
फिलहाल, गोमती रिवरफ्रंट परियोजना और उससे जुड़ी जांच एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और बढ़ने की संभावना है।


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