भोजपुर के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिल सकी। शीर्ष अदालत ने इस मामले में दाखिल जनहित याचिका (PIL) पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ता को पहले सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार के समक्ष मामला रखने की सलाह दी।
भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज है। इसी बीच मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाया गया, जहां स्वतंत्र जांच और सीबीआई जांच की मांग उठाई गई। हालांकि फिलहाल अदालत ने मामले पर तत्काल सुनवाई से दूरी बना ली है।
क्या है याचिका में मांग?
यह जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विशाल तिवारी की ओर से दायर की गई है। याचिका में दावा किया गया है कि भरत भूषण तिवारी का एनकाउंटर संदिग्ध परिस्थितियों में हुआ और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाए। इसके अलावा, एनकाउंटर में शामिल पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की भी मांग की गई है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र समिति से कराई जाए, जिसकी निगरानी सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा की जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सोमवार को जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया गया। याचिकाकर्ता ने तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया।
पीठ ने कहा कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाए और मामले को पहले सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार के समक्ष मेंशन किया जाए। इसके बाद ही आगे की प्रक्रिया तय होगी।
अदालत के इस रुख का मतलब है कि फिलहाल मामले पर कोई अंतरिम आदेश या जांच संबंधी निर्देश जारी नहीं किए गए हैं।
क्यों चर्चा में है भरत तिवारी एनकाउंटर?
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर हाल के दिनों में बिहार के सबसे चर्चित मामलों में शामिल रहा है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस घटना को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं।
एनकाउंटर को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। एक पक्ष इसे पुलिस कार्रवाई बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसकी निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। इसी वजह से मामला अब न्यायिक जांच और सीबीआई जांच की मांग तक पहुंच गया है।
आगे क्या होगा?
अब याचिकाकर्ता को सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्रार के समक्ष मामला उठाना होगा। इसके बाद यह तय होगा कि याचिका नियमित सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की जाएगी या नहीं।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है। अदालत का ध्यान अभी केवल प्रक्रिया संबंधी पहलुओं पर रहा है। ऐसे में भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में कानूनी लड़ाई आगे भी जारी रहने की संभावना है।
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