ट्रेनों में अब विमान जैसा ‘ब्लैक बॉक्स’, इंजन में लगेंगे कैमरे और वॉयस रिकॉर्डर, आज से ट्रायल शुरू

ट्रेनों में अब विमान जैसा ‘ब्लैक बॉक्स’, इंजन में लगेंगे कैमरे और वॉयस रिकॉर्डर, आज से ट्रायल शुरू

भारतीय रेलवे ने रेल सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब विमानों की तर्ज पर ट्रेनों के इंजनों में भी ‘ब्लैक बॉक्स’ जैसी आधुनिक निगरानी प्रणाली लगाई जाएगी। उत्तर मध्य रेलवे (NCR) ने बुधवार से इस तकनीक का पहला ट्रायल शुरू कर दिया है। प्रारंभिक चरण में एक लोकोमोटिव (इंजन) में परीक्षण होगा, जिसके बाद इसे 26 ट्रेनों में लागू किया जाएगा।

नई प्रणाली के तहत प्रत्येक इंजन में छह हाई-रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे और वॉयस रिकॉर्डर लगाए गए हैं। रेलवे बोर्ड के निर्देशानुसार इंजन के आगे और पीछे एक-एक कैमरा लगाया गया है, जबकि चालक केबिन के भीतर चार कैमरे स्थापित किए गए हैं। साथ ही वॉयस रिकॉर्डर लोको पायलट और सहायक लोको पायलट की बातचीत भी रिकॉर्ड करेगा।

दुर्घटना की जांच होगी आसान

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, बाहरी कैमरे ट्रैक और सामने की गतिविधियों की निगरानी करेंगे, जबकि केबिन कैमरे चालक दल की गतिविधियों का रिकॉर्ड रखेंगे। किसी दुर्घटना या असामान्य घटना की स्थिति में इन रिकॉर्डिंग के आधार पर जांच अधिक सटीक और पारदर्शी ढंग से की जा सकेगी। यह प्रणाली विमान के ब्लैक बॉक्स की तरह काम करेगी।

स्वदेशी तकनीक को प्राथमिकता

रेलवे ने इस बार सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम की है। अधिकारियों के मुताबिक नई निगरानी प्रणाली में अधिक सुरक्षित स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। कैमरों और रिकॉर्डिंग सिस्टम का एक्सेस केवल रेलवे के अधिकृत सिस्टम तक सीमित रहेगा।

सुरक्षा समीक्षा के बाद लिया गया फैसला

रेलवे ने यह कदम कुछ महीने पहले गाजियाबाद में संदिग्ध गतिविधियों और रेलवे ट्रैक से जुड़े कैमरों की डेटा सुरक्षा को लेकर उठी चिंताओं के बाद उठाया है। सुरक्षा समीक्षा के बाद नई प्रणाली में अधिक सुरक्षित रिकॉर्डिंग और निगरानी व्यवस्था लागू की गई है।

पहियों की खराबी का भी मिलेगा पहले अलर्ट

इसके अलावा कानपुर के इलेक्ट्रिक लोको शेड में वाइब्रेशन मॉनिटरिंग सिस्टम का भी परीक्षण चल रहा है। यह तकनीक इंजन के पहियों या बियरिंग में खराबी आने से पहले ही लोको पायलट को अलार्म के जरिए चेतावनी देगी। सफल परीक्षण के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से पहले वीवीआईपी, फिर वीआईपी और बाद में अन्य ट्रेनों के इंजनों में भी लगाया जाएगा।