लखनऊ के बख्शी का तालाब (बीकेटी) थाना क्षेत्र से जुड़े एक जालसाजी मामले में अदालत के सामने विरोधाभासी पुलिस रिपोर्ट आने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। एक ओर विवेचक दरोगा ने आरोपी को मृत बताते हुए उसका मृत्यु प्रमाणपत्र अदालत में दाखिल किया, वहीं सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) ने हाईकोर्ट में शपथपत्र देकर कहा कि आरोपी जीवित है और फर्जी पहचान के जरिए धोखाधड़ी करता रहा है।
मामला बीकेटी थाने में दर्ज धोखाधड़ी और कूटरचना से जुड़े एक मुकदमे का है। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी रवि प्रकाश सिंह के खिलाफ पहले उद्घोषणा और संपत्ति कुर्की की कार्रवाई के आदेश जारी किए गए थे। इसके बाद विवेचक ने अदालत को रिपोर्ट दी कि आरोपी की 17 अप्रैल 2026 को मृत्यु हो चुकी है और इसके समर्थन में मृत्यु प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत किया गया।
ACP के शपथपत्र में अलग दावा
इसी मामले में ACP ज्ञानेंद्र सिंह ने हाईकोर्ट में दाखिल अपने काउंटर शपथपत्र में कहा कि जांच में पता चला है कि कथित आरोपी वास्तव में राम लखन मिश्रा है, जिसने धोखाधड़ी के उद्देश्य से रवि प्रकाश सिंह के नाम का कथित रूप से इस्तेमाल किया। ACP ने दावा किया कि दस्तावेजों और जांच से यह तथ्य सामने आया है कि आरोपी जीवित है और फर्जी पहचान का उपयोग कर रहा था।
STF की रिपोर्ट का भी उल्लेख
मामले में STF की जांच रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी ने कथित रूप से फर्जी नाम अपनाकर विभिन्न दस्तावेजों के माध्यम से धोखाधड़ी की। इन निष्कर्षों के आधार पर ACP ने अदालत को बताया कि आरोपी को मृत मानना सही नहीं है।
दरोगा को कोर्ट का नोटिस
दोनों रिपोर्टों में गंभीर विरोधाभास सामने आने पर अदालत ने विवेचक दरोगा अशोक कुमार यादव को 13 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। अदालत ने पूछा है कि ऐसी परस्पर विरोधी रिपोर्ट किन परिस्थितियों में प्रस्तुत की गई और क्यों न उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई के लिए उच्च न्यायालय को पत्र भेजा जाए।
फिलहाल अदालत ने मामले की सुनवाई जारी रखते हुए संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। मामले में अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।



