मायावती की केंद्र सरकार को दो टूक सलाह, बोलीं- पेपर लीक पर सख्त एक्शन लें, तभी रुकेगा छात्रों का आंदोलन

मायावती की केंद्र सरकार को दो टूक सलाह, बोलीं- पेपर लीक पर सख्त एक्शन लें, तभी रुकेगा छात्रों का आंदोलन

संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने केंद्र सरकार के सामने शिक्षा, रोजगार और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और सरकारी शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों ने युवाओं में असंतोष बढ़ाया है। उनका कहना है कि यदि सरकार समय रहते इन समस्याओं पर ठोस और प्रभावी कदम उठाए, तो छात्रों को आंदोलन का रास्ता अपनाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। मायावती ने सरकार से इन मुद्दों को राजनीतिक नजरिए से नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ देखने की अपील की।

‘पेपर लीक पर सिर्फ बयान नहीं, सख्त कार्रवाई जरूरी’

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए अपने सिलसिलेवार पोस्ट में मायावती ने कहा कि देशभर में मेडिकल सहित कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं की वजह से कई परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं, जिसका सीधा असर लाखों छात्रों और नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं पर पड़ा है।

उन्होंने कहा कि सरकार को केवल जांच तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ऐसे मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही परीक्षा प्रणाली से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

सरकारी शिक्षा मजबूत करने पर दिया जोर

बसपा प्रमुख ने सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कमी के कारण बड़ी संख्या में परिवार निजी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों पर निर्भर हो रहे हैं। महंगाई के बावजूद अभिभावक अपने बच्चों की पढ़ाई पर खर्च कर रहे हैं, क्योंकि वे बेहतर शिक्षा के जरिए उनके भविष्य को सुरक्षित बनाना चाहते हैं।

मायावती ने सरकार से आग्रह किया कि प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक सरकारी संस्थानों को मजबूत बनाया जाए। उन्होंने शिक्षा क्षेत्र के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने और कोचिंग संस्थानों पर पारदर्शी एवं प्रभावी निगरानी व्यवस्था विकसित करने की भी मांग की। उनका कहना था कि मजबूत शिक्षा व्यवस्था ही देश के विकास की सबसे मजबूत नींव बन सकती है।

युवाओं की नाराजगी को गंभीरता से लेने की सलाह

मायावती ने कहा कि देश के मौजूदा राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक माहौल को देखते हुए सरकार को युवाओं से जुड़े मुद्दों का समाधान संवाद और संवेदनशीलता के साथ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि रोजगार, शिक्षा और परीक्षा प्रणाली से जुड़ी समस्याओं का समय पर समाधान किया जाए तो युवाओं में बढ़ता असंतोष कम किया जा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को ऐसे हालात बनने से रोकना चाहिए, जिनमें छात्रों और युवाओं को अपनी मांगों के लिए सड़कों पर उतरना पड़े। उनके अनुसार, यदि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए, पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई हो और युवाओं की समस्याओं का समय रहते समाधान निकले, तो जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) जैसे आंदोलनों की नौबत नहीं आएगी।

संसद सत्र के बीच शिक्षा और रोजगार के मुद्दे फिर चर्चा में

मानसून सत्र की शुरुआत के साथ शिक्षा, भर्ती परीक्षाओं और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दे एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं। विपक्ष लगातार सरकार से जवाब मांग रहा है, जबकि विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर सुझाव और मांगें रख रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर इन विषयों पर चर्चा और तेज होने की संभावना है।