कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है कि यदि प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस नहीं लिया गया और उन्हें परेशान करना बंद नहीं किया गया, तो उनका संगठन पहले से बड़ा आंदोलन करेगा। उन्होंने दावा किया कि छात्रों में अब भी सरकार के खिलाफ नाराजगी बनी हुई है।
‘गुस्सा अभी शांत नहीं हुआ’
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर लौटने के बाद पत्रकारों से बातचीत में दीपके ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद भी छात्रों का गुस्सा कम नहीं हुआ है। उनके अनुसार, यदि सरकार अपने रवैये में बदलाव नहीं लाती, तो भविष्य में और बड़ा विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि छात्र देश का भविष्य हैं और उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री को लेकर भी दिया बयान
एक सवाल के जवाब में अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार छात्रों की मांगों और चिंताओं पर ध्यान नहीं देती है, तो जनता लोकतांत्रिक तरीके से सरकार बदलने का फैसला कर सकती है।
40 दिन बाद घर लौटने की कही बात
दीपके ने बताया कि वह लगभग 40 दिनों बाद अपने घर लौटे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर करीब 36 दिनों तक चले आंदोलन के बाद अब उन्हें अपने परिवार से मिलने का अवसर मिला है। उनके अनुसार, यह आंदोलन छात्रों की जीत साबित हुआ।
छात्रों को परेशान करने का लगाया आरोप
CJP संस्थापक ने आरोप लगाया कि आंदोलन समाप्त होने के बाद भी कई राज्यों में छात्रों को पुलिस द्वारा परेशान किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि कुछ जगहों पर छात्रों के घर जाकर उन्हें गिरफ्तार करने की चेतावनी दी जा रही है।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित राज्य सरकारों की ओर से इस पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पेपर लीक बिल पर भी उठाए सवाल
अभिजीत दीपके ने हाल ही में लोकसभा से पारित ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि केवल कानून में बदलाव से समस्या का समाधान नहीं होगा, जब तक व्यवस्था और कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया जाता।
उन्होंने यह भी दावा किया कि पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए गठित फास्ट-ट्रैक कोर्ट की पहली सुनवाई CBI के वकील की अनुपस्थिति के कारण टल गई।
नोट: इस खबर में अभिजीत दीपके द्वारा लगाए गए आरोप और दिए गए बयान उनके सार्वजनिक वक्तव्य पर आधारित हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।



