देश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर एक बार फिर तेज हो गया है। इस बार चर्चा के केंद्र में हैं CJP (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके, जिन्होंने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दिपके का दावा है कि उन पर और उनके परिवार पर बीजेपी में शामिल होने का दबाव बनाया गया। उन्होंने कहा कि कई बार उन्हें यह संदेश दिया गया कि यदि उन्होंने पार्टी का दामन नहीं थामा तो उनके परिवार के लिए हालात अच्छे नहीं होंगे। उनके इन आरोपों ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।
‘मुझे और मेरे परिवार को धमकियां मिलीं’, दिपके का दावा
अभिजीत दिपके ने कहा कि उन्हें कई बार अप्रत्यक्ष रूप से चेतावनी दी गई कि बीजेपी में शामिल हो जाएं, अन्यथा इसका असर उनके परिवार पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि यह हैरानी की बात है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पोतों की उम्र के आसपास हैं, लेकिन फिर भी उन्हें इस तरह की धमकियों का सामना करना पड़ रहा है।
दिपके ने कहा कि अगर किसी युवा की आवाज से सत्ता इतनी असहज हो जाती है कि उसे दबाने की कोशिश की जाए, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है। उनके मुताबिक, मौजूदा समय में सरकार का ध्यान युवाओं, शिक्षा व्यवस्था और रोजगार जैसे मुद्दों पर नहीं है। उनका आरोप है कि सत्ता पक्ष की प्राथमिकता केवल राजनीतिक ताकत बनाए रखना है, जबकि युवाओं से जुड़े अहम विषय पीछे छूटते जा रहे हैं।
बीजेपी पर गंभीर आरोप, अपराधियों को लेकर भी उठाए सवाल
अपने बयान में अभिजीत दिपके ने बीजेपी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी में कथित तौर पर अपराधियों और बलात्कार के आरोप झेल चुके लोगों को महत्व दिया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पार्टी का रवैया सवालों के घेरे में रहा है। उन्होंने कुछ पुराने विवादित मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे उदाहरण जनता के सामने हैं और इन्हीं घटनाओं के आधार पर लोग राजनीतिक दलों की कार्यशैली का आकलन करते हैं।
दिपके ने यह भी सवाल उठाया कि जो लोग शिक्षा व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर हैं, उनके बयानों और फैसलों पर भी सार्वजनिक बहस होनी चाहिए। उनके अनुसार, देश की शिक्षा नीति और युवाओं के भविष्य से जुड़े फैसलों में जवाबदेही सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए।
राहुल गांधी के बयान का समर्थन, शिक्षा और रोजगार को बताया असली मुद्दा
अभिजीत दिपके ने कहा कि देश में युवाओं, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि पूरे समाज को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जो भी राजनीतिक दल या नेता इन विषयों को प्राथमिकता देगा, CJP उसका समर्थन करेगा।
उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हालिया बयान का समर्थन करते हुए कहा कि उन्हें वह बात सही लगती है। दिपके ने दावा किया कि दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है। ऐसे में यदि छात्रों के खिलाफ पेलेट गन का इस्तेमाल हुआ है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि यह कार्रवाई गृह मंत्री अमित शाह की जानकारी के बिना हुई है, तब भी जवाबदेही तय होनी चाहिए और यदि जानकारी के साथ हुई है तो यह और गंभीर सवाल खड़े करती है।
छात्रों पर कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब मांगा
दिपके ने बिहार का जिक्र करते हुए कहा कि वहां की सरकार और कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। उनका आरोप है कि जिन हथियारों का इस्तेमाल आतंकवाद जैसी गंभीर चुनौतियों से निपटने के लिए किया जाना चाहिए, उनका उपयोग छात्रों के खिलाफ किया गया। उन्होंने दावा किया कि पेलेट गन के इस्तेमाल से कुछ छात्रों की आंखों की रोशनी प्रभावित हुई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उनके मुताबिक, यदि देश के युवाओं, शिक्षा और रोजगार से जुड़े सवालों पर गंभीरता से काम नहीं किया गया तो यह आने वाले समय में बड़ा मुद्दा बन सकता है। फिलहाल, अभिजीत दिपके के इन आरोपों पर बीजेपी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि इन आरोपों का राजनीतिक स्तर पर क्या जवाब दिया जाता है।



