राम मंदिर के कथित चढ़ावा विवाद को लेकर संसद परिसर में हुए प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन ने नया राजनीतिक और धार्मिक विवाद खड़ा कर दिया है। बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने संसद परिसर में साधु का वेश धारण कर एक सांकेतिक नाटक किया, जिसमें दानपेटी और चढ़ावे को लेकर प्रदर्शन किया गया। इस दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत कुछ विपक्षी सांसद भी सांकेतिक रूप से इस प्रदर्शन में शामिल नजर आए। अब इस पूरे घटनाक्रम पर अयोध्या के हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने कड़ी आपत्ति जताई है और इसे संत समाज व सनातन परंपरा का अपमान बताया है।
महंत राजू दास ने कहा कि संसद जैसे सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच पर साधु-संतों का वेश धारण कर इस तरह का प्रदर्शन करना धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला है। उन्होंने विपक्षी नेताओं के इस विरोध प्रदर्शन की आलोचना करते हुए तीखी प्रतिक्रिया भी दी।
संसद परिसर में क्या हुआ था?
मानसून सत्र के दौरान निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भगवा वस्त्र पहनकर और अपने साथ एक दानपेटी लेकर संसद परिसर पहुंचे। उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से पुजारी की भूमिका निभाई और सांसदों से दान लेने का अभिनय किया।
प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी सहित कुछ विपक्षी सांसदों ने सांकेतिक रूप से दानपेटी में चढ़ावा दिया। इसके बाद नाटक के हिस्से के रूप में यह दिखाया गया कि दानपेटी में डाला गया पैसा अपने पास रख लिया गया। आगे पप्पू यादव ने उस राशि को लेकर भागने का अभिनय किया, जिसके बाद अन्य सांसदों ने उन्हें पकड़ने का सांकेतिक प्रदर्शन किया।
इस प्रदर्शन का उद्देश्य राम मंदिर के कथित चढ़ावा विवाद को लेकर विपक्ष का विरोध दर्ज कराना बताया गया।
महंत राजू दास ने जताई कड़ी आपत्ति
इस प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने कहा कि साधु-संतों का वेश पहनकर इस तरह का नाटक करना पूरे संत समाज और सनातन परंपरा की छवि को गलत तरीके से प्रस्तुत करता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी कथित वित्तीय गड़बड़ी के आरोप हैं, तो उन्हें साधु-संतों से जोड़कर क्यों दिखाया जा रहा है। उनका कहना था कि किसी व्यक्ति विशेष पर लगे आरोपों के आधार पर पूरे संत समाज को कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है।
महंत राजू दास ने राहुल गांधी, पप्पू यादव और समाजवादी पार्टी के कुछ नेताओं की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रदर्शन से धार्मिक परंपराओं का सम्मान कम होता है और राजनीतिक संदेश देने के लिए धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
‘क्या किसी और धर्म के प्रतीकों के साथ ऐसा होता?’
महंत राजू दास ने अपने बयान में यह भी सवाल उठाया कि क्या किसी अन्य धर्म के धार्मिक प्रतीकों या वेशभूषा का इस्तेमाल करके इस तरह का प्रदर्शन किया जाता। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के कथित चढ़ावा विवाद को संतों से जोड़ना गलत है।
उन्होंने विपक्षी नेताओं पर तीखी टिप्पणी करते हुए संत समाज से अपील की कि ऐसे मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखें। अपने बयान में उन्होंने कई कठोर शब्दों का भी प्रयोग किया और विपक्षी नेताओं के खिलाफ नाराजगी जताई।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच बढ़ा विवाद
संसद परिसर में हुए इस सांकेतिक प्रदर्शन और उस पर आई तीखी प्रतिक्रियाओं के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। एक ओर विपक्ष इसे प्रतीकात्मक विरोध बता रहा है, वहीं दूसरी ओर संत समाज के कुछ प्रतिनिधियों ने इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई है।
फिलहाल, इस मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक और धार्मिक पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद संसद से लेकर सार्वजनिक मंचों तक चर्चा का विषय बना रह सकता है।


-1785473130666_v.webp)
