SC-ST अत्याचार पीड़ितों के मुआवजे में 40% से ज्यादा बढ़ोतरी की तैयारी! 12 लाख तक मिल सकती है राहत, जानें पूरा प्रस्ताव

SC-ST अत्याचार पीड़ितों के मुआवजे में 40% से ज्यादा बढ़ोतरी की तैयारी! 12 लाख तक मिल सकती है राहत, जानें पूरा प्रस्ताव

अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के खिलाफ अत्याचार के मामलों में पीड़ितों को मिलने वाली आर्थिक राहत बढ़ सकती है। केंद्र सरकार मौजूदा मुआवजा राशि में 40 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो न्यूनतम राहत करीब 1 लाख रुपये और अधिकतम राशि 12 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। मौजूदा दरें करीब एक दशक पहले, 2016 में संशोधित की गई थीं। सरकार अब बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत को देखते हुए इन्हें फिर से बदलने पर विचार कर रही है।

10 साल बाद क्यों बदल सकती हैं मुआवजे की दरें?

SC/ST अत्याचार निवारण कानून का उद्देश्य केवल आरोपी को सजा दिलाना नहीं है। कानून में पीड़ित और उसके परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता देने तथा पुनर्वास का भी प्रावधान है। यह कानून 1989 में बनाया गया था और इसके तहत विशेष अदालतों समेत कई व्यवस्थाएं की गई हैं।

सरकार के सामने अब मुख्य तर्क यह है कि 2016 में तय की गई राहत राशि के बाद महंगाई और रोजमर्रा के खर्च में काफी बदलाव आया है। ऐसे में करीब एक दशक पुरानी दरों को मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप संशोधित करने की जरूरत महसूस की जा रही है।

प्रस्ताव में मुआवजे की राशि को Consumer Price Index यानी CPI में हुई बढ़ोतरी से जोड़ने की बात सामने आई है। यानी भविष्य में महंगाई बढ़ने के साथ राहत राशि को भी अधिक व्यावहारिक बनाने की कोशिश की जा सकती है।

अभी कितनी राहत मिलती है और कितनी बढ़ सकती है?

फिलहाल SC/ST (Prevention of Atrocities) Rules के तहत अपराध की प्रकृति और गंभीरता के आधार पर पीड़ित को 85,000 रुपये से लेकर 8.25 लाख रुपये तक की आर्थिक राहत मिलती है।

2016 में नियमों में बदलाव कर राहत राशि बढ़ाई गई थी। इसी दौरान ऐसे अपराधों की संख्या भी बढ़ाई गई थी, जिनमें पीड़ितों को आर्थिक सहायता मिल सकती है।

रेप के मामलों में अधिकतम 5 लाख रुपये और गैंगरेप के मामलों में 8.25 लाख रुपये तक राहत का प्रावधान है। एसिड अटैक जैसे मामलों में चोट की गंभीरता के आधार पर अलग-अलग राशि तय की गई है।

अब जिस प्रस्ताव पर विचार चल रहा है, उसमें न्यूनतम राहत करीब 1 लाख रुपये और अधिकतम करीब 12 लाख रुपये करने की बात है। हालांकि यह अभी प्रस्ताव के स्तर पर है। नई दरें तभी लागू होंगी, जब सरकार से अंतिम मंजूरी मिल जाएगी।

पूरी रकम एक साथ नहीं मिलती, तीन चरणों में होती है भुगतान

SC/ST अत्याचार के मामलों में राहत राशि का भुगतान एकमुश्त नहीं किया जाता। इसे मामले की कानूनी प्रक्रिया से जोड़ा गया है, ताकि पीड़ित को केस के अलग-अलग चरणों में आर्थिक मदद मिलती रहे।

पहला चरण: FIR दर्ज होने के बाद कुल राहत राशि का 25 फीसदी दिया जाता है।

दूसरा चरण: पुलिस द्वारा चार्जशीट अदालत में दाखिल करने के बाद 50 फीसदी राशि दी जाती है।

तीसरा चरण: आरोपी के दोषी ठहराए जाने के बाद बाकी 25 फीसदी राशि जारी की जाती है।

इस व्यवस्था के पीछे उद्देश्य यह है कि पीड़ित को मामले की शुरुआत में ही कुछ आर्थिक सहारा मिले। इसके बाद जांच और न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ सहायता जारी रहे।

सिर्फ मुआवजा बढ़ाने से काम नहीं चलेगा

सरकार की प्रस्तावित पहल केवल राहत राशि तक सीमित नहीं है। SC/ST अत्याचार के मामलों में पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

प्रस्ताव के मुताबिक राज्यों को विशेष पुलिस स्टेशन और विशेष अदालतों की व्यवस्था मजबूत करने के लिए आर्थिक सहायता दी जा सकती है। ऐसे विशेष पुलिस स्टेशन स्थापित करने के लिए एकमुश्त 5 लाख रुपये की मदद का प्रस्ताव है। इसके बाद इन थानों का नियमित खर्च संबंधित राज्य सरकार को उठाना होगा।

उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार फिलहाल देश में 181 विशेष पुलिस स्टेशन काम कर रहे हैं, लेकिन ये केवल सात राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में हैं। ऐसे में बड़ी चुनौती यह है कि जिन जगहों पर SC/ST अत्याचार के मामले सामने आते हैं, वहां जांच और कानूनी व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

पीड़ितों की मुश्किल केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं होती। कई मामलों में परिवार को सामाजिक दबाव, धमकी, रोजगार और संपत्ति से जुड़े नुकसान का भी सामना करना पड़ सकता है। इसलिए कानून में पीड़ित और गवाहों के अधिकारों को भी महत्व दिया गया है।

यही वजह है कि मुआवजे में बढ़ोतरी के साथ FIR, जांच, चार्जशीट और ट्रायल की प्रक्रिया समय पर पूरी होना भी उतना ही जरूरी है। अगर कानूनी प्रक्रिया लंबी खिंचती रही, तो बढ़ी हुई राहत राशि का वास्तविक फायदा पीड़ित तक पहुंचने में फिर देरी हो सकती है।

सरकार के आंकड़े बताते हैं कि पिछले वर्षों में राज्यों को राहत के लिए लगातार राशि जारी की गई है। 2019-20 में 141.36 करोड़ रुपये से 23,866 पीड़ितों को लाभ मिला। 2020-21 में 113.03 करोड़ रुपये से 23,592 और 2021-22 में 126.72 करोड़ रुपये से 20,278 पीड़ितों को राहत दी गई।

इसके बाद 2022-23 में 91.54 करोड़ रुपये से 23,828, 2023-24 में 97.95 करोड़ रुपये से 19,240 और 2024-25 में 89.49 करोड़ रुपये से 20,074 पीड़ितों को राहत मिली। 2025-26 में 87.08 करोड़ रुपये जारी किए गए और अब तक 12,665 पीड़ितों को राहत दिए जाने की जानकारी दी गई है।

फिलहाल निगाहें प्रस्तावित संशोधन पर हैं। अगर इसे मंजूरी मिलती है, तो करीब दस साल बाद SC/ST अत्याचार पीड़ितों के लिए राहत राशि की सीमा में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। लेकिन इसका वास्तविक असर तभी दिखाई देगा, जब आर्थिक सहायता के साथ पुलिस और न्यायिक व्यवस्था भी समयबद्ध तरीके से काम करे।