उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी यूपी की सियासत में एक नया विवाद गहराता दिख रहा है। सहारनपुर में 6 सितंबर को प्रस्तावित समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की रैली स्थगित कर दी गई है। सपा ने इसकी वजह खराब मौसम और भारी बारिश की संभावना बताई है। लेकिन राष्ट्रीय लोकदल (RLD) ने इसे राजनीतिक विरोध से जोड़ दिया है। पार्टी का दावा है कि जयंत चौधरी और चौधरी परिवार को लेकर अखिलेश यादव की टिप्पणी के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नाराजगी बढ़ी और 36 बिरादरी के बीच विरोध का माहौल बना। अब रैली टलने के बाद सवाल उठ रहा है कि वजह सिर्फ मौसम है या इसके पीछे सियासी गणित भी काम कर रहा है?
सपा ने मौसम को बताया वजह, नई तारीख पर अभी फैसला नहीं
रैली स्थगित किए जाने की जानकारी बुधवार को सपा के राष्ट्रीय महासचिव और कार्यक्रम के आयोजक चौधरी रुद्रसैन ने दी। उन्होंने कहा कि 6 सितंबर को भारी बारिश की संभावना और मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया है।
सपा के मुताबिक, अखिलेश यादव से चर्चा के बाद रैली की नई तारीख तय होगी। संभावित तौर पर कार्यक्रम अक्टूबर के अंतिम सप्ताह या नवंबर के पहले सप्ताह में आयोजित किया जा सकता है।
आधिकारिक तौर पर पार्टी ने मौसम के अलावा कोई दूसरी वजह नहीं बताई है। लेकिन रैली स्थगित होते ही पश्चिमी यूपी की राजनीति में इसके पीछे की वजह को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
‘चवन्नी से रुपया’ वाली टिप्पणी के बाद गरमाया विवाद
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के बीच बढ़ी तल्खी से जुड़ी है। अखिलेश की ओर से जयंत चौधरी को लेकर की गई ‘चवन्नी से रुपया’ वाली टिप्पणी के बाद पश्चिमी यूपी की राजनीति में विवाद खड़ा हुआ था।
जयंत चौधरी ने इस टिप्पणी को जाट समाज और चौधरी परिवार के सम्मान से जोड़ते हुए अखिलेश यादव पर पलटवार किया था। इसके बाद दोनों दलों की प्रस्तावित रैलियां भी एक-दूसरे के आसपास होने के कारण चर्चा में आ गईं।
सहारनपुर में 3 सितंबर को जयंत चौधरी की ‘स्वाभिमान रैली’ प्रस्तावित थी। इसके तीन दिन बाद 6 सितंबर को अखिलेश यादव का ‘युवा योद्धा सम्मेलन’ होना था। ऐसे में दोनों कार्यक्रमों को पश्चिमी यूपी में अपने-अपने राजनीतिक प्रभाव के प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा था।
RLD का दावा- ‘चौधरी परिवार के सम्मान से समझौता नहीं’
अखिलेश यादव की रैली स्थगित होने के बाद RLD ने सपा पर हमला और तेज कर दिया। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रोहित अग्रवाल ने कहा कि चौधरी परिवार उनके लिए सम्मान और स्वाभिमान का विषय है। उन्होंने कहा कि परिवार पर टिप्पणी करने का असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दिखाई देगा।
RLD का दावा है कि चौधरी परिवार पर की गई टिप्पणी के विरोध में पश्चिमी यूपी की 36 बिरादरी एकजुट हुईं और सपा की प्रस्तावित रैली के बहिष्कार का फैसला लिया गया।
हालांकि, यह RLD का दावा है। सपा की ओर से रैली स्थगित करने की वजह आधिकारिक तौर पर मौसम ही बताई गई है। इसलिए राजनीतिक विरोध और रैली स्थगित होने के बीच सीधा संबंध फिलहाल स्थापित नहीं हुआ है।
2027 से पहले पश्चिमी यूपी बना सियासी शक्ति परीक्षण का मैदान
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट मतदाताओं के बीच RLD की राजनीतिक पकड़ और समाजवादी पार्टी के PDA समीकरण को देखते हुए दोनों दलों के बीच बढ़ती दूरी को 2027 के चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
सहारनपुर का घटनाक्रम इसी बड़े राजनीतिक मुकाबले का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है। पहले जयंत चौधरी की रैली और उसके बाद अखिलेश यादव का कार्यक्रम होना दोनों दलों के लिए अपने समर्थकों और संगठनात्मक ताकत का प्रदर्शन करने का मौका था।
अब अखिलेश की रैली स्थगित होने के बाद राजनीतिक चर्चा और तेज हो गई है। खासकर इसलिए क्योंकि RLD इसे जनविरोध से जोड़ रही है, जबकि सपा ने मौसम को कारण बताया है।
इस बीच 2 सितंबर को अखिलेश यादव का सहारनपुर दौरा प्रस्तावित है। वह सपा के राष्ट्रीय महासचिव चौधरी रुद्रसैन के आवास पर पहुंचेंगे। रैली टलने के बाद भी अखिलेश का यह दौरा तय कार्यक्रम के मुताबिक होता है या इसमें कोई बदलाव आता है, इस पर भी राजनीतिक नजरें रहेंगी।
फिलहाल तस्वीर इतनी साफ है कि रैली की नई तारीख तय नहीं हुई है। मौसम एक वजह है, जबकि RLD का दावा राजनीतिक विरोध की ओर इशारा करता है। ऐसे में 2027 से पहले पश्चिमी यूपी में सपा और RLD के बीच बढ़ती तल्खी आने वाले दिनों में किस रूप में सामने आती है, यह देखना अहम होगा।


