महंगा हुआ चावल: 3 हफ्ते में 15% तक बढ़े दाम, फिर भी रिकॉर्ड रफ्तार से हो रहा निर्यात, दाल किसानों के लिए खुलेंगे 500 खरीद केंद्र

महंगा हुआ चावल: 3 हफ्ते में 15% तक बढ़े दाम, फिर भी रिकॉर्ड रफ्तार से हो रहा निर्यात, दाल किसानों के लिए खुलेंगे 500 खरीद केंद्र

देश में एक तरफ आम परिवार की रसोई का बजट बढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ भारत के चावल निर्यात ने रफ्तार पकड़ ली है। पिछले दो-तीन हफ्तों में चावल की खुदरा कीमतों में करीब 15 फीसदी तक उछाल आया है। कई किस्में 15 से 20 रुपये प्रति किलो तक महंगी हो गई हैं। खासकर प्रीमियम बासमती का भाव 85 रुपये से बढ़कर करीब 110 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। इसके बावजूद नवंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच भारत ने 26 प्रमुख उपभोक्ता देशों को 47.9 लाख टन चावल का निर्यात किया। इसकी कीमत 23,476 करोड़ रुपये रही, जो तीन साल की इसी अवधि में सबसे ऊंचे स्तरों में है।

घरेलू बाजार में चावल महंगा, बासमती ने बढ़ाई सबसे ज्यादा चिंता

चावल की कीमतों में तेजी का असर सीधे घरेलू बजट पर पड़ रहा है। पिछले कुछ हफ्तों में अलग-अलग किस्मों के दाम में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई है। प्रीमियम बासमती सबसे ज्यादा महंगा हुआ है। इसका खुदरा भाव करीब 85 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 110 रुपये तक पहुंच गया है।

साधारण और परमल चावल भी इससे अछूते नहीं हैं। इन किस्मों में प्रति क्विंटल करीब 100 से 500 रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

यानी जिस समय परिवार रोजमर्रा की जरूरतों के खर्च को संतुलित करने की कोशिश कर रहे हैं, उसी समय चावल की कीमतों में यह तेजी रसोई के बजट पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है।

खाड़ी में संकट के बावजूद भारत का Rice Export क्यों बढ़ा?

दिलचस्प बात यह है कि घरेलू बाजार में कीमतें बढ़ने के बावजूद भारत के चावल निर्यात की रफ्तार कम नहीं हुई। पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण खाड़ी क्षेत्र में चावल का आयात प्रभावित हुआ है। इसके बावजूद भारत का कुल निर्यात मजबूत बना हुआ है।

भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (IREF) के आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर से मार्च की तीन साल की औसत अवधि की तुलना में चावल के निर्यात मूल्य में 1.1 फीसदी और मात्रा में 5.6 फीसदी की वृद्धि हुई है।

नवंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच बासमती और गैर-बासमती चावल मिलाकर कुल निर्यात 47.9 लाख टन रहा। इसकी कुल कीमत 23,476 करोड़ रुपये बताई गई है।

इससे एक तरफ भारतीय चावल की वैश्विक मांग का संकेत मिलता है, वहीं घरेलू बाजार में कीमतों को लेकर चिंता भी बनी हुई है।

किसानों के लिए बड़ी तैयारी, देशभर में खुलेंगे 500 नए केंद्र

चावल की कीमतों के बीच दलहन किसानों के लिए भी सरकार की ओर से खरीद व्यवस्था को विस्तार देने की तैयारी है। NAFED और NCCF मिलकर देशभर में 500 नए खरीद केंद्र खोलेंगे।

इन केंद्रों के जरिए किसानों से दालों की सीधे न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद की जाएगी। इसका उद्देश्य किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बाजार में भटकने से बचाना और उन्हें उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाना है।

NAFED के प्रबंध निदेशक दीपक कुमार के मुताबिक, खरीफ सीजन की दलहन फसलें जल्द बाजार में आने वाली हैं। ऐसे में खरीद केंद्रों की व्यवस्था पहले से मजबूत करने की तैयारी है।

इन केंद्रों पर अरहर, चना और उड़द जैसी प्रमुख दालों की खरीद की जाएगी। महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में दलहन उत्पादन महत्वपूर्ण है।

50 जिलों में किसानों का पंजीकरण, आगे क्या बदलेगा?

नई खरीद व्यवस्था को जमीन पर उतारने के लिए NAFED करीब 50 जिलों में किसानों के बीच अभियान चलाएगा। इस दौरान किसानों का संबंधित पोर्टल पर पंजीकरण कराया जाएगा, ताकि खरीद प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जा सके।

आम उपभोक्ता के लिए इसका महत्व इसलिए भी है क्योंकि दाल और चावल दोनों ही भारतीय घरों की रोजमर्रा की थाली का अहम हिस्सा हैं। चावल के दाम में तेजी के बीच दलहन की सरकारी खरीद व्यवस्था बढ़ाने से किसानों को बाजार का भरोसा मिल सकता है और आने वाले सीजन में आपूर्ति को लेकर भी बेहतर व्यवस्था बनाने की कोशिश होगी।

फिलहाल तस्वीर दो हिस्सों में बंटी हुई है। घरेलू बाजार में चावल महंगा हो रहा है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय चावल की मांग निर्यात को सहारा दे रही है। इसी बीच सरकार दलहन किसानों के लिए खरीद नेटवर्क का विस्तार कर रही है। आने वाले समय में घरेलू कीमतों और निर्यात की रफ्तार के बीच यह संतुलन किस तरह बनता है, इसका सीधा असर किसानों के साथ-साथ आम परिवार की रसोई पर भी पड़ेगा।