श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों के सामने भारत की 2013 से 2026 तक की आर्थिक और नीतिगत यात्रा का अपना नजरिया रखा। उन्होंने एक तरफ 2013 के दौर की महंगाई, घोटालों, सुरक्षा और आर्थिक चुनौतियों का जिक्र किया, तो दूसरी तरफ मौजूदा भारत की GDP ग्रोथ, मोबाइल और डिफेंस एक्सपोर्ट, बैंकिंग पहुंच और व्यापार समझौतों को उपलब्धियों के तौर पर गिनाया। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने युवाओं के भविष्य के सपनों, मैन्युफैक्चरिंग और भारत को ग्लोबल बिजनेस हब बनाने की दिशा पर भी जोर दिया।
2013 का उदाहरण देकर बोले- तब हालात कैसे थे?
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत SRCC की 100 साल की यात्रा के संदर्भ से की। उन्होंने कॉलेज से जुड़े दिवंगत नेता अरुण जेटली को भी याद किया। पीएम ने कहा कि जेटली अक्सर SRCC से जुड़ी घटनाओं और अपने अनुभवों का जिक्र किया करते थे। उन्होंने कॉलेज के पूर्व छात्रों की अलग-अलग क्षेत्रों में उपलब्धियों का भी उल्लेख किया।
इसके बाद पीएम मोदी ने 2013 के अपने एक पुराने उदाहरण को सामने रखा। उन्होंने पानी के गिलास की मिसाल देते हुए कहा कि कोई उसे आधा भरा देखता है, कोई आधा खाली और कोई व्यक्ति उसे आधा पानी तथा आधा हवा से पूरी तरह भरा हुआ मानता है। उन्होंने खुद को तीसरे नजरिए वाला व्यक्ति बताया।
पीएम के मुताबिक, 2013 में देश का माहौल निराशा से भरा था। उन्होंने उस दौर की मीडिया सुर्खियों का हवाला देते हुए 10 फीसदी महंगाई, औद्योगिक क्षेत्र में सुस्ती, GDP ग्रोथ के अनुमानों में कटौती, LoC पर भारतीय सैनिकों की हत्या, आतंकी हमलों और हेलीकॉप्टर खरीद से जुड़े घोटाले का जिक्र किया।
GDP, मोबाइल और डिफेंस एक्सपोर्ट के आंकड़ों से रखा अपना पक्ष
प्रधानमंत्री ने मौजूदा आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की GDP ग्रोथ 7.8 फीसदी तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर संघर्ष और व्यापार से जुड़ी रुकावटों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की गति बनी हुई है।
उन्होंने बैंकिंग पहुंच को भी बदलाव का उदाहरण बताया। पीएम के मुताबिक, जनधन खातों के जरिए करीब 60 करोड़ नए बैंक खाते खुले। उनके अनुसार, इससे देश में वित्तीय समावेशन को नई गति मिली।
मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट पर प्रधानमंत्री ने खास जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत कभी बड़े पैमाने पर मोबाइल फोन आयात करता था, जबकि अब देश 2.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के मोबाइल फोन का निर्यात कर रहा है।
डिफेंस सेक्टर का उदाहरण देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत का रक्षा उत्पादन करीब 2 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। 2014 में जहां रक्षा निर्यात करीब 600-700 करोड़ रुपये था, वहीं अब यह आंकड़ा करीब 40,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
40 देशों के साथ व्यापार समझौते, युवाओं के लिए क्या मायने?
पीएम मोदी ने कहा कि भारत अब पहले की तुलना में तेजी से फैसले ले रहा है। उन्होंने दावा किया कि पिछले दशक में करीब 40 देशों के साथ व्यापार समझौते और Free Trade Agreements हुए हैं।
उनके मुताबिक, टेक्सटाइल, फल-सब्जियां, प्रोसेस्ड फूड और श्रिंप जैसे क्षेत्रों के लिए नए बाजार खुल रहे हैं। नए बाजारों में कम टैरिफ का मतलब भारतीय कंपनियों के लिए बेहतर पहुंच और युवाओं के लिए नए कारोबारी अवसर हो सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने रेलवे के विद्युतीकरण का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारतीय रेलवे का 100 फीसदी विद्युतीकरण पूरा किया गया है।
उनका जोर इस बात पर था कि भारत अब केवल घरेलू बाजार तक सीमित रहने के बजाय वैश्विक सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग में बड़ी भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है।
‘दिमागी नक्सल’ से लेकर ग्लोबल कंपनियां बनाने का लक्ष्य
भाषण के दौरान पीएम मोदी ने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का भी इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि लाल किले से उन्होंने इस संदर्भ में ‘होम्योपैथिक की गोली’ का जिक्र किया था। उनके मुताबिक, इसके बाद इस विचार से जुड़े लोगों की प्रतिक्रिया सामने आई और जनता उनके वास्तविक रुख को समझने लगी।
पीएम मोदी ने पिछले 12 वर्षों के दौरान आए संकटों का भी जिक्र किया। उन्होंने कोरोना महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संकट को बड़ी चुनौतियों के तौर पर गिनाया। उनका कहना था कि इन परिस्थितियों के बावजूद भारत आगे बढ़ा है।
SRCC के छात्रों से बात करते हुए प्रधानमंत्री ने भविष्य के बड़े लक्ष्य तय करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज का युवा कंपनी बनाने, यूनिकॉर्न खड़ा करने, नई तकनीक विकसित करने और खेती में इनोवेशन जैसे सपने देख रहा है।
उन्होंने छात्रों से सवाल किया कि अगर भारतीय दुनिया की बड़ी कंपनियों को लीड कर सकते हैं, तो भारतीयों की बनाई कंपनियां वैश्विक नेतृत्व क्यों नहीं कर सकतीं। पीएम ने भारत की अपनी ग्लोबल कंसल्टिंग, अकाउंटिंग, लीगल और फाइनेंशियल कंपनियां खड़ी करने का लक्ष्य सामने रखा।
उनका संदेश साफ था—आने वाले दौर में भारत को केवल बाजार के रूप में नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी, एक्सपोर्ट और ग्लोबल बिजनेस के केंद्र के रूप में आगे बढ़ाना है। और इस बदलाव में देश के युवाओं की भूमिका सबसे अहम होगी।

