महाराष्ट्र में सूखे के बीच 1.32 करोड़ की लग्जरी कारें! फडणवीस की खर्च घटाने की अपील के बीच सरकारी आदेश से उठे सवाल

महाराष्ट्र में सूखे के बीच 1.32 करोड़ की लग्जरी कारें! फडणवीस की खर्च घटाने की अपील के बीच सरकारी आदेश से उठे सवाल

महाराष्ट्र के 265 तालुकों में सूखा घोषित किए जाने के बीच सरकारी खर्च को लेकर एक नया मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जहां लोगों से शादी और दूसरे आयोजनों में गैर-जरूरी खर्च कम करने की अपील कर रहे हैं, वहीं राज्य सरकार ने लोकायुक्त कार्यालय के सदस्यों के लिए चार लग्जरी कारें खरीदने के वास्ते करीब 1.32 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। सरकारी आदेश के मुताबिक, हर वाहन के लिए 33.04 लाख रुपये से ज्यादा की राशि तय की गई है। यही अंतर अब सरकारी खर्च और सूखे के बीच प्राथमिकताओं को लेकर चर्चा का आधार बन रहा है।

265 तालुकों में सूखा, सीएम ने खर्च घटाने की अपील की

महाराष्ट्र के कई हिस्से सूखे की स्थिति का सामना कर रहे हैं। इसी संदर्भ में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागरिकों से संवेदनशीलता बरतने और गैर-जरूरी खर्चों में कटौती करने की अपील की है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, शादी समारोह और दूसरे सामाजिक आयोजनों में जो खर्च टाले जा सकते हैं, उन्हें कम किया जाना चाहिए। जरूरी खर्च करना पड़ सकता है, लेकिन जहां बचत संभव है, वहां खर्च घटाने पर ध्यान देना चाहिए।

फडणवीस ने यह भी कहा कि इस तरह बचाई गई रकम का इस्तेमाल सूखा प्रभावित लोगों की मदद के लिए किया जा सकता है। उन्होंने लोगों से आर्थिक सहायता के अलावा दूसरे तरीकों से भी प्रभावित परिवारों की मदद करने की अपील की है।

अब सामने आया 1.32 करोड़ रुपये की कारों का सरकारी आदेश

इसी बीच राज्य सरकार की ओर से सोमवार को जारी एक सरकारी आदेश में लोकायुक्त कार्यालय के लिए वाहनों की खरीद को मंजूरी दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

दिए गए विवरण के मुताबिक, चार वाहनों के लिए कुल 1,32,18,768 रुपये मंजूर किए गए हैं। यानी प्रत्येक वाहन के लिए 33,04,692 रुपये की राशि निर्धारित की गई है।

सरकारी आदेश में लोकायुक्त कार्यालय से जुड़े जिन सदस्यों के नामों का उल्लेख है, उनमें पूर्व न्यायमूर्ति सुनील शुक्रे, पूर्व न्यायमूर्ति सुरेंद्र तावड़े, सुवर्णा केवले, पूर्व आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला और पूर्व आईएएस अधिकारी ओम प्रकाश गुप्ता के नाम शामिल बताए गए हैं। हालांकि दिए गए विवरण में चार वाहनों के लिए पांच नामों का उल्लेख है, इसलिए किस सदस्य के लिए कौन-सा वाहन स्वीकृत किया गया है, यह उपलब्ध सामग्री से स्पष्ट नहीं है।

खर्च घटाने की अपील और सरकारी खरीद, यही बना चर्चा का मुद्दा

मामले को लेकर सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि दोनों घटनाएं लगभग एक ही समय में सामने आई हैं। एक तरफ राज्य सरकार सूखे की स्थिति में नागरिकों से गैर-जरूरी खर्च कम करने की अपील कर रही है। दूसरी तरफ सरकारी खजाने से महंगी गाड़ियों की खरीद के लिए रकम मंजूर की गई है।

हालांकि, दोनों फैसलों का प्रशासनिक संदर्भ अलग हो सकता है। लोकायुक्त कार्यालय के कामकाज के लिए सरकारी वाहन खरीदना एक प्रशासनिक निर्णय है, जबकि मुख्यमंत्री की अपील नागरिकों से सूखा प्रभावित लोगों के प्रति संवेदनशीलता बरतने को लेकर है।

इसलिए सिर्फ दोनों घटनाओं के एक साथ सामने आने से यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि वाहन खरीद का फैसला नियमों के खिलाफ है। इसके लिए खरीद की प्रक्रिया, वाहन की श्रेणी, निर्धारित सरकारी मानक और संबंधित स्वीकृति की पूरी जानकारी देखना जरूरी होगा।

सूखे के बीच सरकारी खर्च पर नजर रहेगी

फिलहाल इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू सरकारी खर्च की प्राथमिकताओं से जुड़ा है। जब राज्य के 265 तालुकों में सूखे की स्थिति घोषित की गई है, तब सरकार के हर बड़े खर्च पर स्वाभाविक रूप से सार्वजनिक निगाह रहेगी।

फडणवीस की ओर से खर्च कम करने और सूखा प्रभावित लोगों की मदद करने की अपील के बाद लोकायुक्त कार्यालय के लिए मंजूर वाहनों की कीमतें चर्चा में आना इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन वाहनों की खरीद को किस प्रशासनिक जरूरत के आधार पर उचित ठहराती है और सूखा प्रभावित इलाकों के लिए राहत एवं सहायता पर कितना खर्च किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर फिलहाल इतना स्पष्ट है कि चार वाहनों के लिए 1.32 करोड़ रुपये की मंजूरी वाला सरकारी आदेश और मुख्यमंत्री की खर्च कम करने की अपील एक साथ सार्वजनिक चर्चा में आए हैं।