सपा के तीसरे राज्यसभा उम्मीदवार पर सस्पेंस बरकरार, दलित-मुस्लिम चेहरे की चर्चा, अखिलेश यादव कब खोलेंगे पत्ता?

सपा के तीसरे राज्यसभा उम्मीदवार पर सस्पेंस बरकरार, दलित-मुस्लिम चेहरे की चर्चा, अखिलेश यादव कब खोलेंगे पत्ता?

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच समाजवादी पार्टी के तीसरे उम्मीदवार को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। सपा ने प्रो. रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार घोषित कर दिया है और दोनों नामांकन भी दाखिल कर चुके हैं। लेकिन तीसरी सीट पर किसे उतारा जाएगा, इस पर अखिलेश यादव ने अभी अंतिम नाम सार्वजनिक नहीं किया है। पार्टी के भीतर कई नामों की चर्चा है। इनमें पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन, पूर्व सांसद सलीम इकबाल शेरवानी और किसी दलित या PDA पृष्ठभूमि के चेहरे का विकल्प शामिल बताया जा रहा है।

सपा नेताओं के बयानों ने इस सस्पेंस को और बढ़ा दिया है। कुछ विधायक दावा कर रहे हैं कि पार्टी तीसरी सीट जीतने की स्थिति में है। वहीं, तीसरे उम्मीदवार के सामाजिक और राजनीतिक समीकरण को लेकर भी पार्टी के भीतर मंथन चलने की बात सामने आ रही है।

दो नाम तय, तीसरी सीट पर अब भी सस्पेंस

राज्यसभा चुनाव के लिए सपा ने बुधवार को अपने दो उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल करा दिए। प्रो. रामगोपाल यादव पार्टी के पुराने और प्रमुख नेताओं में शामिल हैं, जबकि धनराज परिमल नथवानी को भी उम्मीदवार बनाया गया है।

अब निगाह तीसरे उम्मीदवार पर है। पार्टी के विधायक लगातार यह दावा कर रहे हैं कि संख्या और समर्थन जुटाकर सपा तीसरी सीट पर भी मुकाबला कर सकती है।

सपा विधायक आशु मलिक ने तो चौथी सीट की स्थिति में भी जीत का दावा किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के पास पर्याप्त विधायक हैं और बीजेपी के भीतर भी असंतोष होने का दावा किया। हालांकि, ये राजनीतिक दावे हैं और चुनावी नतीजा वास्तविक मतदान तथा प्रथम वरीयता वोटों पर निर्भर करेगा।

रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि तीसरे उम्मीदवार का फैसला अखिलेश यादव करेंगे। विधायक सचिन यादव ने भी संकेत दिया कि उन्हें नाम की जानकारी है और उम्मीदवार PDA को मजबूत करने वाला चेहरा हो सकता है।

आलोक रंजन से सलीम शेरवानी तक, किन नामों की चर्चा?

तीसरे उम्मीदवार को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन के नाम की है। 2024 के राज्यसभा चुनाव में भी सपा ने उन्हें तीसरे उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतारा था, लेकिन वह चुनाव जीत नहीं सके थे। उस चुनाव में सपा के कुछ विधायकों की क्रॉस वोटिंग भी राजनीतिक चर्चा का विषय बनी थी।

इस बार उनका नाम फिर सामने आने की वजह उनके पुराने राजनीतिक और प्रशासनिक संपर्क बताए जा रहे हैं। हालांकि, अंतिम फैसला अखिलेश यादव को ही करना है।

दूसरा प्रमुख नाम पूर्व सांसद सलीम इकबाल शेरवानी का है। रिपोर्ट के मुताबिक, शेरवानी ने अखिलेश यादव से मुलाकात की थी और राज्यसभा चुनाव लड़ने की इच्छा भी जताई थी।

इसके अलावा पार्टी के भीतर किसी दलित चेहरे को आगे बढ़ाने की चर्चा भी है। सपा की राजनीति में PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समीकरण एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदर्भ रहा है। ऐसे में तीसरे उम्मीदवार के चयन में सामाजिक प्रतिनिधित्व का पहलू भी चर्चा में है।

अखिलेश यादव ने क्या संकेत दिया?

तीसरे उम्मीदवार को लेकर सवाल पूछे जाने पर अखिलेश यादव ने संकेत दिया कि पार्टी तीसरी सीट के लिए भी मैदान में उतर सकती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि बीजेपी के कई लोग सपा के संपर्क में हैं।

हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस इनपुट में उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन्हें सपा नेतृत्व के राजनीतिक दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

नामांकन के बाद प्रो. रामगोपाल यादव से भी तीसरे उम्मीदवार के बारे में सवाल पूछा गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बारे में अखिलेश यादव ही जानकारी देंगे।

सपा के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने भी बीजेपी के कुछ विधायकों के असंतुष्ट होने का दावा किया है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि जरूरत पड़ने पर इस संबंध में जानकारी सार्वजनिक की जा सकती है।

तीसरी सीट का गणित क्या कहता है?

राज्यसभा चुनाव में एक उम्मीदवार की जीत के लिए 37 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत बताई गई है। सपा के पास अपने मौजूदा विधायक संख्या के आधार पर दो सीटों के लिए पर्याप्त समर्थन है। तीसरी सीट के लिए उसे अतिरिक्त वोटों या समर्थन की जरूरत होगी।

यही वजह है कि तीसरे उम्मीदवार का चयन केवल नाम तय करने का मामला नहीं है। इसके साथ चुनावी गणित भी जुड़ा हुआ है।

एक तरफ सपा अतिरिक्त समर्थन जुटाने की कोशिश का संकेत दे रही है। दूसरी तरफ बीजेपी और उसके सहयोगी भी अतिरिक्त सीट के लिए जरूरी वोटों की गणना कर रहे हैं।

ऐसे में तीसरे उम्मीदवार के नाम की घोषणा के साथ ही मुकाबले का गणित ज्यादा साफ होगा। फिलहाल आलोक रंजन, सलीम इकबाल शेरवानी और किसी दलित या PDA चेहरे को लेकर चर्चा है, लेकिन इनमें से किसे टिकट मिलेगा, इसका अंतिम फैसला अखिलेश यादव को करना है।

राज्यसभा चुनाव में अब सपा की अगली बड़ी घोषणा इसी तीसरे नाम को लेकर होगी। उसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पार्टी किस सामाजिक और राजनीतिक समीकरण के साथ तीसरी सीट के मैदान में उतर रही है।