त्योहारी सीजन शुरू होने से ठीक पहले कमर्शियल एलपीजी सिलिंडर की कीमतों में बढ़ोतरी ने होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों की लागत बढ़ा दी है। तेल विपणन कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलिंडर के दाम अलग-अलग शहरों में बढ़ाए हैं। दिल्ली में कीमत 62.50 रुपये बढ़कर 2,810 रुपये हो गई है। हालांकि, घरेलू एलपीजी सिलिंडर की कीमत में इस बार कोई बदलाव नहीं किया गया है। कमर्शियल गैस महंगी होने का असर सीधे उन कारोबारों पर पड़ सकता है, जहां रोजाना बड़ी मात्रा में गैस का इस्तेमाल खाना पकाने के लिए होता है।
त्योहारों से पहले गैस महंगी, दिल्ली में अब ₹2,810
नई दरें 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलिंडर पर लागू हुई हैं। दिल्ली में इसकी कीमत में 62.50 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके बाद राजधानी में एक सिलिंडर की कीमत 2,810 रुपये हो गई है।
दूसरे शहरों में कीमत अलग हो सकती है। इसकी वजह स्थानीय टैक्स और अन्य लागतों में अंतर है। इसलिए किसी शहर में सिलिंडर की अंतिम कीमत दिल्ली से अलग रह सकती है।
यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब देश में त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है। इस दौरान होटल, रेस्टोरेंट, मिठाई की दुकान, कैटरिंग और दूसरे फूड बिजनेस में मांग बढ़ती है। ऐसे कारोबारों के लिए कमर्शियल एलपीजी रोजमर्रा के ऑपरेशन का अहम हिस्सा है।
घरेलू गैस पर राहत, लेकिन कारोबारियों की लागत बढ़ी
इस बार कीमत बढ़ोतरी का असर घरेलू एलपीजी सिलिंडर पर नहीं पड़ा है। यानी घरों में इस्तेमाल होने वाले गैस सिलिंडर की कीमत में बदलाव नहीं किया गया।
लेकिन कमर्शियल सिलिंडर इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों के लिए तस्वीर अलग है। होटल और रेस्टोरेंट में खाना पकाने से लेकर कैटरिंग के बड़े ऑर्डर तक, गैस की खपत काफी अधिक होती है।
एक सिलिंडर पर कुछ दर्जन रुपये की बढ़ोतरी सुनने में भले छोटी लगे, लेकिन जिन कारोबारों में हर महीने बड़ी संख्या में सिलिंडर इस्तेमाल होते हैं, वहां कुल लागत पर इसका असर बढ़ सकता है।
खासकर छोटे भोजनालय और ऐसे कारोबारी, जो पहले से सीमित मार्जिन पर काम कर रहे हैं, उनके लिए बढ़ी हुई लागत चुनौती बन सकती है।
सितंबर में भी बढ़े थे दाम
कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में यह पहली बढ़ोतरी नहीं है। इससे पहले सितंबर में भी 19 किलो वाले कमर्शियल सिलिंडर की कीमत में 9.50 रुपये की वृद्धि की गई थी।
अब अक्टूबर की शुरुआत में एक बार फिर कीमत बढ़ने से कारोबारियों के लिए ईंधन लागत का दबाव बढ़ गया है। त्योहारों के दौरान कारोबार में बिक्री बढ़ने की उम्मीद रहती है, लेकिन साथ ही कच्चे माल, ईंधन और अन्य परिचालन खर्च भी बढ़ सकते हैं।
यही वजह है कि कमर्शियल एलपीजी की कीमत में बदलाव का असर केवल सिलिंडर खरीदने वाले कारोबारी तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव पूरे फूड बिजनेस की लागत संरचना पर पड़ सकता है।
क्या ग्राहकों की जेब पर भी पड़ेगा असर?
कमर्शियल गैस की कीमत बढ़ने के बाद कारोबारियों के सामने दो रास्ते होते हैं। वे अतिरिक्त लागत को अपने मार्जिन से संभालें या फिर कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाएं।
अगर कोई रेस्टोरेंट, होटल या कैटरिंग कारोबार अपनी बढ़ी हुई परिचालन लागत को कीमतों में शामिल करता है, तो खाने-पीने की चीजों के दाम पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, किसी कारोबारी द्वारा कीमत बढ़ाई जाएगी या नहीं, यह उसके अपने लागत ढांचे और प्रतिस्पर्धी बाजार पर निर्भर करेगा।
त्योहारी सीजन में यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी अवधि में होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग सेवाओं की मांग बढ़ती है। ऐसे में गैस की कीमत में बढ़ोतरी कारोबारियों के खर्च का एक अतिरिक्त हिस्सा बन सकती है।
फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यही है कि घरेलू एलपीजी की कीमत में बदलाव नहीं किया गया है। लेकिन कमर्शियल गैस पर निर्भर कारोबारियों के लिए अक्टूबर की शुरुआत बढ़ी हुई लागत के साथ हुई है। आने वाले दिनों में इसका असर उनके मुनाफे, कीमतों और ग्राहकों के बिल पर कितना पड़ता है, यह कारोबार के हिसाब से अलग-अलग होगा।



