नायरा एनर्जी ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बड़ा इजाफा किया है। कंपनी ने पेट्रोल 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल 3 रुपये प्रति लीटर महंगा कर दिया है। नई कीमतें शनिवार तड़के से लागू हो गई हैं। कंपनी का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति में रुकावटों ने भी तेल बाजार पर दबाव बढ़ाया है। नायरा के देशभर में 7,108 पेट्रोल पंप हैं, इसलिए कीमतों में यह बदलाव बड़ी संख्या में ग्राहकों पर असर डाल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की तेजी का दिखा असर
ईंधन कारोबार में सबसे बड़ी चुनौती इस समय अंतरराष्ट्रीय कीमतों का बढ़ना है। कच्चा तेल महंगा होने पर पेट्रोल और डीजल तैयार करने की लागत भी बढ़ती है। यही दबाव अब नायरा एनर्जी के खुदरा दामों में दिखाई दे रहा है।
कंपनी ने ताजा कीमत बढ़ोतरी पर आधिकारिक प्रतिक्रिया के लिए भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं दिया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और उससे जुड़े पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी इस फैसले की प्रमुख वजह है।
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को प्रभावित किया है। ऐसे माहौल में तेल कंपनियों की लागत बढ़ने का दबाव लगातार बना हुआ है।
मार्च में भी बढ़े थे दाम, फिर जुलाई में मिली थी राहत
नायरा एनर्जी इससे पहले भी इस साल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कर चुकी है। ईरान संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति प्रभावित होने के बाद 26 मार्च को कंपनी ने पेट्रोल 5 रुपये और डीजल 3 रुपये प्रति लीटर महंगा किया था। उस समय नायरा के पंपों पर पेट्रोल की कीमत बढ़कर 100.71 रुपये और डीजल की कीमत 91.31 रुपये प्रति लीटर हो गई थी।
इसके बाद मई के अंत तक सरकारी तेल कंपनियों ने भी अलग-अलग चरणों में कीमतें बढ़ाईं। कुल मिलाकर पेट्रोल और डीजल के दाम में करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हुई थी।
हालांकि, जुलाई में तस्वीर बदली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बाद नायरा ने 1 जुलाई को पेट्रोल और डीजल दोनों के दाम 5 रुपये और 3 रुपये प्रति लीटर घटा दिए थे।
अब कुछ महीनों बाद कंपनी ने फिर कीमतें बढ़ा दी हैं।
सरकारी पंपों पर फिलहाल राहत, कीमतों का अंतर बढ़ सकता है
नायरा के फैसले का एक खास पहलू यह है कि सरकारी तेल कंपनियों ने फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की है। देश में पेट्रोल पंपों के नेटवर्क पर इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम का दबदबा है।
इन तीनों कंपनियों के पास देश के कुल 1,04,137 पेट्रोल पंपों में 90 फीसदी से ज्यादा पंप हैं। इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज और ब्रिटेन की बीपी के संयुक्त उपक्रम जियो-बीपी के करीब 2,304 पेट्रोल पंप हैं। जियो-बीपी ने भी अभी कीमतों में बदलाव नहीं किया है।
इसका सीधा मतलब है कि ग्राहकों को अलग-अलग कंपनियों के पंप पर पेट्रोल-डीजल के अलग दाम देखने को मिल सकते हैं। नायरा के पंप पर कीमत बढ़ने से सरकारी कंपनियों और निजी ईंधन विक्रेताओं के बीच मूल्य अंतर बढ़ने की संभावना है।
तेल कंपनियों के घाटे का दबाव भी बढ़ा
ईंधन की खुदरा कीमतों को लेकर कंपनियों पर लागत का दबाव पहले से बना हुआ है। रेटिंग एजेंसी इक्रा ने पिछले महीने अनुमान जताया था कि सितंबर में अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतें बढ़ने के बावजूद घरेलू खुदरा दरें स्थिर रहने से तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 8 रुपये और डीजल पर करीब 9 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा था।
पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बिक्री को मिलाकर कंपनियों का दैनिक नुकसान करीब 530 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया था।
इक्रा के मुताबिक, तेल कंपनियों के रिफाइनिंग और मार्केटिंग कारोबार का संतुलन तब बनता है, जब कच्चे तेल की कीमत करीब 85 से 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहती है। इससे ऊपर कीमत जाने और खुदरा दाम नहीं बढ़ने पर कंपनियों का घाटा और बढ़ सकता है।
जेब पर असर सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं
आम ग्राहक के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ना सीधे यात्रा खर्च से जुड़ा है। लेकिन इसका असर सिर्फ बाइक या कार में ईंधन भराने तक सीमित नहीं रहता। डीजल महंगा होने पर ट्रक, बस और दूसरे परिवहन साधनों की परिचालन लागत बढ़ सकती है।
इसका असर माल ढुलाई पर पड़ने की स्थिति में रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव बन सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि आगे दूसरी तेल कंपनियां कीमतों में क्या बदलाव करती हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें किस दिशा में जाती हैं।
फिलहाल नायरा एनर्जी की बढ़ोतरी से निजी और सरकारी पेट्रोल पंपों के बीच कीमतों का अंतर बढ़ने की संभावना है। आने वाले दिनों में नजर इस बात पर रहेगी कि क्या दूसरी कंपनियां भी बढ़ी लागत का बोझ ग्राहकों पर डालती हैं या मौजूदा खुदरा कीमतों को बरकरार रखती हैं।
