राज्यसभा की 3 सीटों से पीछे हटी सपा, अखिलेश का बड़ा संकेत- ‘निगाह 3 पर नहीं, अब 403 पर’, BJP के 8 उम्मीदवार तय

राज्यसभा की 3 सीटों से पीछे हटी सपा, अखिलेश का बड़ा संकेत- ‘निगाह 3 पर नहीं, अब 403 पर’, BJP के 8 उम्मीदवार तय

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के चुनाव के बीच समाजवादी पार्टी ने अपनी रणनीति साफ कर दी है। पार्टी अब राज्यसभा के लिए तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारेगी। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए इसका संकेत दिया। उन्होंने लिखा, “अब हमारी निगाह तीन पर नहीं, चार सौ तीन पर है।” अखिलेश के इस बयान के बाद साफ माना जा रहा है कि सपा राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए मुकाबले में उतरने के बजाय अपना फोकस उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर रखना चाहती है।

इस फैसले के साथ राज्यसभा चुनाव का गणित भी लगभग साफ हो गया है। सपा के दो और बीजेपी के आठ उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना तय माना जा रहा है। मंगलवार, 6 अक्टूबर को नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख है। इससे पहले सपा के तीसरे उम्मीदवार के नाम को लेकर राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा थी।

अखिलेश ने एक लाइन में बदल दिया पूरा सियासी फोकस

सपा की ओर से तीसरा उम्मीदवार उतारे जाने की चर्चा थी। माना जा रहा था कि पार्टी मंगलवार को नाम का ऐलान कर सकती है और उम्मीदवार विधान भवन पहुंचकर नामांकन दाखिल करेगा।

लेकिन नामांकन की समयसीमा खत्म होने से पहले ही अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर अपनी रणनीति का संकेत दे दिया। उनका संदेश साफ था कि पार्टी फिलहाल राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए संख्या जुटाने के बजाय बड़े राजनीतिक लक्ष्य पर ध्यान देना चाहती है।

“अब हमारी निगाह तीन पर नहीं, चार सौ तीन पर है।”

राजनीतिक संदर्भ में अखिलेश का यह बयान उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों की ओर इशारा करता है। यानी सपा का फोकस अब राज्यसभा की सीमित सीटों के मुकाबले विधानसभा की बड़ी राजनीतिक लड़ाई पर है।

सपा के दो उम्मीदवार पहले ही भर चुके हैं पर्चा

सपा ने राज्यसभा के लिए पहले ही दो उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए थे। इनमें पार्टी के वरिष्ठ राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव शामिल हैं। वह छठी बार राज्यसभा जाने की तैयारी में हैं।

दूसरे उम्मीदवार धनराज परिमल नथवानी हैं, जो रिलायंस ग्रुप के वरिष्ठ अधिकारी हैं। दोनों उम्मीदवारों ने 30 सितंबर को अपना नामांकन दाखिल कर दिया था। उस दौरान अखिलेश यादव भी मौजूद रहे थे।

अब तीसरा उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारने के संकेत के बाद सपा के दोनों उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने का रास्ता साफ हो गया है।

बीजेपी ने 8 नामों के साथ मजबूत किया समीकरण

दूसरी ओर बीजेपी ने उत्तर प्रदेश की सभी 10 राज्यसभा सीटों के लिए अपने आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं। पार्टी की सूची में धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार शामिल हैं।

बीजेपी की सूची में दो महिला उम्मीदवार भी हैं। सामाजिक समीकरण को देखते हुए पार्टी ने तीन OBC, दो अनुसूचित जाति और तीन सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को जगह दी है।

उत्तर प्रदेश की इन 10 राज्यसभा सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। इन सीटों के लिए चुनाव 16 अक्टूबर 2026 को होना है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है।

राज्यसभा से आगे अब चुनाव आयोग पर अखिलेश का निशाना

राज्यसभा चुनाव के बीच अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग और बीजेपी पर भी तीखा हमला बोला है। मंगलवार को दिल्ली में इंडिया गठबंधन की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ प्रस्तावित मार्च में वह शामिल होने वाले हैं।

इससे पहले उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रहा है। अखिलेश ने कहा कि आयोग संविधान के तहत अपनी भूमिका नहीं निभा रहा और उनके मुताबिक उसका झुकाव बीजेपी की तरफ है।

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि बंगाल और उत्तर प्रदेश में बूथ लूटे गए और सवाल उठाया कि आखिर कितने चुनाव इस तरह प्रभावित हुए हैं।

अखिलेश ने तंज करते हुए यह भी कहा कि बीजेपी को पार्टी कार्यालय बनाने के बजाय चुनाव आयोग के दफ्तर में ही एक फ्लोर ले लेना चाहिए था, क्योंकि उनके मुताबिक काम वहीं से हो रहा है।

उन्होंने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की अवधारणा पर भी सवाल उठाया। अखिलेश का आरोप है कि एक साथ चुनाव कराने की कोशिश इसलिए की जा रही है ताकि चुनाव में कथित गड़बड़ी के आरोप बार-बार न लगें और एक ही बार में चुनाव कराकर बीजेपी जीत हासिल कर सके।

फिलहाल राज्यसभा चुनाव में सपा की ओर से तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। अखिलेश यादव के “तीन नहीं, 403” वाले बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी की राजनीतिक प्राथमिकता अब राज्यसभा की एक अतिरिक्त सीट से ज्यादा विधानसभा की बड़ी लड़ाई पर है।