नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं हैं। 75 साल की उम्र में उनके निधन की खबर ने फिल्म इंडस्ट्री से लेकर उनके करोड़ों प्रशंसकों तक को झकझोर दिया है। लेकिन इस दुख के बीच उनकी आखिरी सार्वजनिक तस्वीरें और वीडियो लोगों के बीच तेजी से चर्चा में हैं। वजह है इन तस्वीरों में नजर आ रहे नाना का वही बेफिक्र और जिंदादिल अंदाज, जिसके लिए वह हमेशा पहचाने गए। निधन से महज चार दिन पहले गोवा के एक कार्यक्रम में वह लोक कलाकारों के साथ नाचते दिखे थे और पारंपरिक वाद्ययंत्र ‘शामेल’ भी बजाया था।
4 अक्टूबर 2026 को गोवा के डोना पाउला स्थित ‘ताज सिदादे’ में सम्राट क्लब इंटरनेशनल का पदभार ग्रहण समारोह आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत समेत कई बड़े चेहरे मौजूद थे। लेकिन शाम की सबसे खास तस्वीर नाना पाटेकर की रही।
सफेद कुर्ता, कंधे पर गमछा और वही पुराना अंदाज
नाना कार्यक्रम में सफेद कुर्ता-पायजामा और कंधे पर गमछा डाले नजर आए। उनके पहनावे और व्यवहार में वही सादगी थी, जो उनके व्यक्तित्व की पहचान रही है।
मंच पर जब गोवा के स्थानीय कलाकारों ने पारंपरिक संगीत शुरू किया तो नाना खुद को रोक नहीं पाए। वह कलाकारों के बीच पहुंच गए और उनके साथ गोवा के पारंपरिक ‘दीवली’ लोकनृत्य में शामिल हो गए।
वीडियो में उनकी सहज मुस्कान और उत्साह साफ दिखाई देता है। वह किसी बड़े स्टार की तरह दूरी बनाकर खड़े नहीं रहे। बल्कि कलाकारों के साथ उसी माहौल में घुलते-मिलते नजर आए।
जमीन पर बैठकर बजाया ‘शामेल’, वीडियो बना आखिरी याद
नाना ने सिर्फ डांस ही नहीं किया। उन्होंने गोवा के पारंपरिक ताल वाद्ययंत्र ‘शामेल’ पर भी हाथ आजमाया। कलाकारों के बीच बैठकर उन्होंने इसकी थाप मिलाई।
आज जब उनके निधन के बाद इस कार्यक्रम के वीडियो सामने आ रहे हैं, तो यही तस्वीरें उनके प्रशंसकों के लिए भावुक कर देने वाली याद बन गई हैं। कुछ दिन पहले तक जो अभिनेता मंच पर कलाकारों के साथ मुस्कुराते और ताल मिलाते दिखाई दे रहे थे, वही उनकी आखिरी सार्वजनिक झलक साबित हुई।
किसी को उस वक्त अंदाजा नहीं था कि यह सामान्य-सा दिखने वाला कार्यक्रम नाना पाटेकर की सार्वजनिक जिंदगी का आखिरी अध्याय बन जाएगा।
‘प्रतिघात’ से ‘क्रांतिवीर’ तक, अलग पहचान छोड़ गए नाना
नाना पाटेकर की पहचान सिर्फ एक अभिनेता के तौर पर नहीं थी। उन्होंने अपने करियर में ऐसे किरदार निभाए, जिनमें व्यवस्था के खिलाफ गुस्सा, आम आदमी की बेचैनी और अन्याय के खिलाफ आवाज दिखाई देती थी।
1987 में आई ‘प्रतिघात’ ने उनके करियर को नई दिशा दी। फिल्म में उन्होंने पूर्व पुलिसकर्मी कर्मवीर की भूमिका निभाई थी। भ्रष्ट व्यवस्था और चुनावी धांधली से परेशान इस किरदार को नाना ने जिस अंदाज में निभाया, उसने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी।
इसके बाद ‘परिंदा’, ‘प्रहार’, ‘तिरंगा’, ‘क्रांतिवीर’ और ‘अब तक छप्पन’ जैसी फिल्मों ने उनकी अलग पहचान मजबूत की। वहीं ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में उनका हास्य अभिनय भी खूब पसंद किया गया।
उनकी संवाद अदायगी भी बेहद अलग थी। आवाज में दिखावे से ज्यादा ठहराव था। यही वजह रही कि उनके कई संवाद और किरदार लंबे समय तक लोगों की याद में बने रहे।
निजी जिंदगी में संघर्ष, पर्दे पर हमेशा मजबूत रहे
नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उनका जन्म महाराष्ट्र के मुरुड-जंजीरा में हुआ था। बचपन आर्थिक मुश्किलों में गुजरा। कम उम्र में उन्होंने पोस्टर पेंटिंग तक का काम किया। यहीं से धीरे-धीरे अभिनय और रंगमंच की ओर उनका रुझान बढ़ा।
नाना ने अपने परिवार से जुड़े संघर्षों का भी कई बार जिक्र किया। उन्होंने बताया था कि वह सात भाई-बहनों में से थे और समय के साथ परिवार के बाकी सदस्य दुनिया से चले गए।
फिल्मों में उन्होंने अभिनेता के साथ-साथ लेखक और निर्देशक के रूप में भी काम किया। किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े सामाजिक कार्यों को लेकर भी उनकी सक्रियता चर्चा में रही।
लेकिन नाना की सबसे बड़ी विरासत शायद उनके किरदार हैं। वह पर्दे पर जितने सख्त दिखते थे, निजी मौकों पर उतने ही सहज नजर आते थे। गोवा में निधन से कुछ दिन पहले का वह वीडियो इसी विरोधाभास की एक खूबसूरत तस्वीर है।
अब उनके प्रशंसकों के पास उनकी फिल्मों की यादें हैं, उनके संवाद हैं और गोवा की उस शाम की तस्वीरें हैं—जहां नाना पाटेकर आखिरी बार खुलकर मुस्कुराते, थिरकते और संगीत की थाप पर झूमते दिखाई दिए थे।



