ACP विवेक भगत की शिकायत पर महिला पत्रकार समेत CJP के सदस्यों के खिलाफ FIR, SC/ST एक्ट और मानहानि के आरोप भी शामिल

ACP विवेक भगत की शिकायत पर महिला पत्रकार समेत CJP के सदस्यों के खिलाफ FIR, SC/ST एक्ट और मानहानि के आरोप भी शामिल

दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान चर्चा में आए ACP विवेक भगत से जुड़ा विवाद अब कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया है। उनकी शिकायत पर महिला स्वतंत्र पत्रकार, गजेंद्र सिंह और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कुछ सदस्यों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। शिकायत में कथित जातिसूचक टिप्पणी, सरकारी काम में बाधा डालने और सोशल मीडिया पर छवि खराब करने जैसे आरोप लगाए गए हैं। मामले में SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों का भी जिक्र है। FIR के मुताबिक, घटना 3 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर पर चुनाव आयोग के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान की है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है और मामले की जांच जारी है।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान क्या हुआ था?

शिकायत के अनुसार, 3 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर पर चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान ACP विवेक भगत कानून-व्यवस्था बनाए रखने की ड्यूटी पर तैनात थे। इसी दौरान बुटा सिंह गोलचक्कर के पास एक स्वतंत्र महिला पत्रकार ने कथित तौर पर उनकी जाति को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की और उनके ACP पद पर नियुक्त होने पर सवाल उठाए।

विवेक भगत का आरोप है कि उन्होंने इन टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देने के बजाय अपनी ड्यूटी जारी रखी। शिकायत में आगे कहा गया है कि दोपहर करीब तीन बजे जब प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने और हिरासत में लेने की कार्रवाई चल रही थी, तब महिला पत्रकार ने उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया।

ACP की शिकायत के मुताबिक, महिला पत्रकार और उनके साथ मौजूद लोगों ने बार-बार उनका सामना किया, जिससे सरकारी ड्यूटी के निर्वहन में बाधा आई।

यह पूरा घटनाक्रम अब पुलिस की जांच के दायरे में है। शिकायत में लगाए गए आरोपों और प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

थाने के बाहर नारेबाजी और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भी शिकायत

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उसी शाम महिला पत्रकार और अन्य लोगों ने संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान ACP विवेक भगत के खिलाफ नारेबाजी की गई और कथित तौर पर उन्हें अपमानजनक शब्दों से संबोधित किया गया। शिकायत में यौन दरिंदा और संभावित बलात्कारी जैसे शब्दों के इस्तेमाल का भी आरोप है।

विवेक भगत ने यह भी आरोप लगाया है कि महिला पत्रकार, गजेंद्र सिंह और CJP के कुछ सदस्यों ने उनसे जुड़े विवाद पर सोशल मीडिया पोस्ट और रील प्रसारित कीं। शिकायत के मुताबिक, ये सामग्री X और इंस्टाग्राम पर साझा की गई।

ACP का कहना है कि इन पोस्ट और वीडियो से उन्हें मानसिक परेशानी हुई और उनकी सामाजिक व पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।

शिकायत में जिन लोगों के नाम शामिल बताए गए हैं, उनमें महिला स्वतंत्र पत्रकार, गजेंद्र सिंह, अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका, सौरव दास और रत्ना सिंह शामिल हैं।

हालांकि, FIR में किसी व्यक्ति का नाम दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि उसके खिलाफ लगाए गए आरोप साबित हो गए हैं। पुलिस को संबंधित सामग्री, बयान और अन्य साक्ष्यों की जांच करनी होगी।

FIR में SC/ST एक्ट समेत किन कानूनी प्रावधानों का जिक्र?

उपलब्ध शिकायत-सार के मुताबिक, 13 अक्टूबर 2026 को संसद मार्ग थाने में FIR दर्ज की गई। इसमें कथित जातिसूचक टिप्पणी, सरकारी काम में बाधा और मानहानि से जुड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं।

FIR में बताए गए प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं:

  • SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम: कथित जातिसूचक टिप्पणी और अपमान से संबंधित आरोप।
  • भारतीय न्याय संहिता की धारा 221: लोक सेवक को उसके सार्वजनिक कर्तव्यों के निर्वहन से रोकने या बाधा डालने से संबंधित प्रावधान।
  • भारतीय न्याय संहिता की धारा 356(2): मानहानि से संबंधित प्रावधान।
  • भारतीय न्याय संहिता की धारा 3(5): साझा इरादे से कई व्यक्तियों द्वारा किए गए अपराध से संबंधित प्रावधान।

इन धाराओं के तहत आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और लागू कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। अभी यह कहना उचित नहीं होगा कि शिकायत में लगाए गए सभी आरोप सही साबित हो चुके हैं।

महिला पत्रकार की शिकायत का क्या हुआ? जांच पर टिकी नजर

इस मामले में एक और अहम पहलू महिला पत्रकार की ओर से की गई यौन उत्पीड़न संबंधी शिकायत है। ACP विवेक भगत ने अपनी शिकायत में बताया है कि महिला पत्रकार की ओर से दर्ज कराई गई अलग शिकायत दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को भेजी गई थी और उसकी जांच चल रही थी।

इस तरह, पूरे विवाद में दोनों पक्षों से जुड़े आरोप और शिकायतें महत्वपूर्ण हैं। एक तरफ ACP ने कथित जातिसूचक टिप्पणी, सरकारी काम में बाधा और मानहानि की शिकायत की है। दूसरी तरफ, महिला पत्रकार की ओर से की गई शिकायत की जांच का भी उल्लेख है।

मामले में आगे की स्थिति पुलिस की जांच, संबंधित पक्षों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों से स्पष्ट होगी।

आम लोगों के लिए यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

यह विवाद सार्वजनिक प्रदर्शन, पुलिस की जिम्मेदारी, पत्रकारिता की स्वतंत्रता और शिकायतों की निष्पक्ष जांच जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों से जुड़ा है। ऐसे मामलों में जरूरी है कि सभी पक्षों की बात सुनी जाए और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों की पुष्टि हो।

फिलहाल, ACP विवेक भगत की शिकायत पर FIR दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। मामले की जांच जारी है और किसी भी पक्ष के खिलाफ आरोपों को अदालत में साबित होने से पहले अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।