उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। बीजेपी प्रदेश कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनाव सुधार के मुद्दे को उठाकर देश में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करना चाहती है। राजनाथ सिंह ने दावा किया कि विपक्ष बांग्लादेश की तर्ज पर भारत में भी सत्ता परिवर्तन की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा का इस्तेमाल देश के विकास में होना चाहिए, न कि राजनीतिक टकराव और अराजकता फैलाने में। हालांकि, ये आरोप बीजेपी की ओर से लगाए गए हैं और इन्हें विपक्ष के खिलाफ राजनीतिक बयानबाजी के रूप में देखा जाना चाहिए।
SIR विवाद पर बीजेपी का पलटवार, सत्ता परिवर्तन की साजिश का आरोप
चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। इसी बीच बीजेपी ने देशभर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की कोशिश की। लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे।
राजनाथ सिंह ने कहा कि दिल्ली में हाल के दिनों में हुई घटनाओं ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनके मुताबिक, विपक्ष की ओर से ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन जैसे शब्दों का इस्तेमाल केवल चुनाव सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे सरकार को अस्थिर करने की मंशा दिखाई देती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी युवाओं को राष्ट्र निर्माण की दिशा में आगे बढ़ाने के बजाय राजनीतिक टकराव की ओर ले जा रहे हैं। राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ माहौल बनाकर देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश की जा रही है।
राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ आरोप पर राजनाथ का तंज
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कांग्रेस के चुनावी इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी लंबे समय से केंद्र में सरकार बनाने में सफल नहीं हुई है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन का जिक्र करते हुए राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या इसे वोट चोरी कहा जाएगा या पार्टी की अपनी राजनीतिक कमियां इसके लिए जिम्मेदार हैं।
राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी के उस बयान पर भी तंज कसा, जिसमें उन्होंने कथित वोट चोरी के खुलासे को ‘हाइड्रोजन बम’ बताया था। रक्षा मंत्री ने कहा कि जिस खुलासे को बड़े राजनीतिक धमाके के रूप में पेश किया गया था, वह उनके मुताबिक दिवाली के पटाखे जितना भी असरदार साबित नहीं हुआ।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची में संभावित गड़बड़ियों को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। इस विवाद का सीधा संबंध मतदाताओं के अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया पर भरोसे से है। ऐसे में दोनों पक्षों के आरोपों के बीच मतदाता सूची में बदलाव, दावों और आपत्तियों के निपटारे तथा चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर तथ्यात्मक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
आपातकाल से 1984 की हिंसा तक, कांग्रेस पर गिनाए तीन आरोप
राजनाथ सिंह ने कांग्रेस के इतिहास का जिक्र करते हुए पार्टी पर तीन गंभीर आरोप लगाए। पहला, उन्होंने 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के शासनकाल में लगाए गए आपातकाल को लोकतंत्र पर हमला बताया। उनका कहना था कि उस दौर में लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित कर दिया गया था।
दूसरा आरोप उन्होंने 1984 में सिख समुदाय के खिलाफ हुई हिंसा को लेकर लगाया। राजनाथ सिंह ने इसे सिखों का नरसंहार बताते हुए कांग्रेस पर हिंसा के दोषियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया।
तीसरे मामले में उन्होंने 1990 में अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलाए जाने की घटना का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय की सरकार ने गोली चलाने वालों को बचाने का प्रयास किया। इन तीन घटनाओं का हवाला देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि उनके अनुसार, कांग्रेस अब संवैधानिक संस्थाओं और संविधान के मूल्यों को कमजोर करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी को सलाह दी कि उन्हें लगातार राजनीतिक टकराव पैदा करने के बजाय अपनी रणनीति पर आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध और असहमति का अधिकार सभी को है, लेकिन इसके नाम पर अराजकता फैलाना उचित नहीं है।
राजीव गांधी की हत्या के बाद चुनाव स्थगित होने पर भी उठाए सवाल
रक्षा मंत्री ने चुनावी प्रक्रिया के इतिहास का हवाला देते हुए राजीव गांधी की हत्या के बाद हुए चुनावों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पहले किसी उम्मीदवार की मृत्यु होने पर संबंधित सीट का चुनाव स्थगित किया जाता था और एक सीट के कारण पूरे चुनाव को रोकने का कोई सामान्य नियम नहीं था।
राजनाथ सिंह ने कहा कि राजीव गांधी की हत्या देश के लिए दुखद घटना थी। हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस आज चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रही है, तब उसे उस समय के चुनावी फैसलों पर भी जवाब देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि राजीव गांधी की हत्या के बाद पूरे देश का चुनाव स्थगित किया गया, जबकि अमेठी में मतदान पहले ही हो चुका था।
इस तरह SIR विवाद अब केवल मतदाता सूची के पुनरीक्षण तक सीमित नहीं रह गया है। बीजेपी इसे विपक्ष की राजनीतिक रणनीति से जोड़ रही है, जबकि चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर विपक्ष के सवाल अलग बहस का विषय हैं। आम मतदाताओं के लिए सबसे अहम बात यह है कि मतदाता सूची में उनका नाम सही रहे, उन्हें अपने दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर मिले और चुनावी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से आगे बढ़े।


