अखिलेश यादव ने बैंकिंग व्यवस्था पर उठाए 12 सवाल, बोले- बैंक मजबूत हुए तो आम जनता की जेब से पैसे क्यों कट रहे हैं?

अखिलेश यादव ने बैंकिंग व्यवस्था पर उठाए 12 सवाल, बोले- बैंक मजबूत हुए तो आम जनता की जेब से पैसे क्यों कट रहे हैं?

लखनऊ: बैंकिंग व्यवस्था में सुधार, डिजिटल पेमेंट और आम लोगों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने की बात लंबे समय से होती रही है। लेकिन क्या इन बदलावों का फायदा आम खाताधारकों तक भी पहुंच रहा है? समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसी सवाल को लेकर केंद्र की बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े 12 सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर बैंक पहले से ज्यादा मजबूत हुए हैं, तो ग्राहकों के खातों से अलग-अलग शुल्क क्यों काटे जा रहे हैं, किसानों और छोटे कारोबारियों को आसानी से कर्ज क्यों नहीं मिलता और साइबर ठगी के मामलों में पीड़ितों को राहत के लिए बैंकों के चक्कर क्यों लगाने पड़ते हैं। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं।

बैंक मजबूत हुए तो ग्राहकों पर चार्ज का बोझ क्यों? अखिलेश ने उठाए सवाल

अखिलेश यादव ने 17 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा की, जिसका शीर्षक था—‘बारह साल, बारह सवाल’। इस पोस्ट के जरिए उन्होंने वर्ष 2014 से बैंकिंग सुधारों को लेकर किए जा रहे दावों पर सवाल उठाए।

सपा प्रमुख ने पूछा कि यदि बैंकिंग व्यवस्था मजबूत हुई है, तो बैंकों को बेचने की जरूरत क्यों पड़ रही है? आम खाताधारकों के खातों से अलग-अलग शुल्क क्यों काटे जा रहे हैं? उन्होंने न्यूनतम बैलेंस, बैंकिंग सेवाओं और अन्य शुल्कों को लेकर भी सवाल उठाए।

उनका कहना है कि बैंकिंग व्यवस्था का मजबूत होना तभी आम लोगों के लिए उपयोगी साबित होगा, जब ग्राहकों को बेहतर सेवाएं मिलें और उनके पैसे तक पहुंचने में अनावश्यक परेशानी न हो।

अखिलेश ने बार-बार KYC यानी ग्राहक की पहचान सत्यापित करने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि KYC के नाम पर ग्राहकों के पैसे निकालने या उनका इस्तेमाल करने में बाधा क्यों आती है और जिन लोगों की पहचान संबंधी प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती, उनके लिए प्रभावी समाधान क्यों नहीं है।

इन सवालों का सीधा संबंध उन लोगों से है, जो पेंशन, बचत या रोजमर्रा के लेनदेन के लिए बैंक खातों पर निर्भर रहते हैं। हालांकि, ये अखिलेश यादव की ओर से उठाए गए सवाल और आरोप हैं। पोस्ट में इनके समर्थन में विस्तृत आंकड़े या सरकार का जवाब शामिल नहीं था।

किसानों, छात्रों और छोटे कारोबारियों को कर्ज मिलने में परेशानी का मुद्दा

बैंकिंग व्यवस्था को लेकर अखिलेश यादव ने कर्ज देने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि किसानों, छात्रों और छोटे दुकानदारों को बिना बिचौलियों और गारंटर के कर्ज क्यों नहीं मिल पाता, जबकि बड़े कर्जदारों के हजारों करोड़ रुपये के ऋण को लेकर अलग-अलग विवाद सामने आते रहे हैं।

उन्होंने उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई का सवाल भी उठाया, जो बैंकों से भारी रकम का कर्ज लेकर देश से बाहर चले गए। सपा प्रमुख का तर्क है कि आम आदमी को घर बनाने, बच्चों की पढ़ाई या कारोबार शुरू करने के लिए कर्ज लेने में कई दस्तावेजों, गारंटर और क्रेडिट स्कोर जैसी शर्तों का सामना करना पड़ता है।

इस मुद्दे का असर आम परिवारों के बजट पर भी पड़ता है। होम लोन और एजुकेशन लोन पर ब्याज की दरें, कर्ज की पात्रता और आवेदन की प्रक्रिया तय करती हैं कि किसी परिवार के लिए घर खरीदना या बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना कितना आसान होगा।

अखिलेश ने होम लोन और शिक्षा ऋण पर ब्याज को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि अगर बैंकिंग व्यवस्था मजबूत है, तो आम लोगों के लिए कर्ज इतना महंगा क्यों महसूस होता है।

हालांकि, अलग-अलग तरह के ऋण की ब्याज दरें बैंक, ऋण योजना, ग्राहक की पात्रता और अन्य शर्तों के आधार पर अलग हो सकती हैं। अखिलेश की पोस्ट में इन दरों से संबंधित तुलनात्मक आंकड़े नहीं दिए गए हैं।

UPI, साइबर ठगी और डिजिटल ट्रांजैक्शन पर भी सरकार को घेरा

डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के बीच अखिलेश यादव ने ऑनलाइन लेनदेन और साइबर ठगी से जुड़े मुद्दे भी उठाए। उन्होंने पूछा कि अगर किसी व्यक्ति के खाते से धोखाधड़ी के जरिए पैसा निकल जाता है, तो उसे तुरंत राहत क्यों नहीं मिलती और शिकायत के लिए बैंक तथा पुलिस के चक्कर क्यों लगाने पड़ते हैं।

उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि UPI या दूसरे डिजिटल माध्यम से भुगतान फेल होने पर कई बार ग्राहकों को अपने पैसे वापस मिलने के लिए इंतजार क्यों करना पड़ता है।

आज छोटे दुकानदारों से लेकर नौकरीपेशा लोगों तक, बड़ी संख्या में लोग डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में लेनदेन अटकने, खाते से रकम कटने या साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों का समय पर समाधान ग्राहकों के भरोसे के लिए महत्वपूर्ण है।

सपा प्रमुख ने बुजुर्गों और डिजिटल बैंकिंग की कम जानकारी रखने वाले लोगों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उनका सवाल है कि बैंक शाखाओं में UPI इस्तेमाल करने और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने के लिए सहायता काउंटर क्यों नहीं होने चाहिए।

उन्होंने CIBIL स्कोर को लेकर भी चिंता जताई। उनके मुताबिक, क्रेडिट स्कोर में छोटी सी गलती के कारण युवाओं को कर्ज लेने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी पूछा कि डिजिटल लेनदेन और बैंकिंग से जुड़ी शिकायतों के लिए ग्राहकों को आसानी से जिम्मेदार अधिकारी तक पहुंच क्यों नहीं मिलती।

इन सवालों के जरिए अखिलेश ने डिजिटल बैंकिंग की सुविधा के साथ ग्राहक सुरक्षा और शिकायतों के समाधान को भी बहस के केंद्र में रखा है।

बैंक कर्मचारियों की कमी से लेकर जनधन खातों तक, पहले भी उठा चुके हैं मुद्दे

अखिलेश यादव ने 15 अक्टूबर को भी बैंकिंग व्यवस्था को लेकर एक लंबी पोस्ट साझा की थी। उसमें उन्होंने बैंक शुल्क, पेंशन पर मिलने वाले ब्याज, नोटबंदी, बैंक लॉकर, KYC, डिजिटल धोखाधड़ी और कर्ज वसूली जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए थे।

उन्होंने आरोप लगाया था कि आम ग्राहकों पर छोटे-छोटे बकाया के लिए दबाव बनाया जाता है, जबकि बड़े कर्जदारों के मामलों में अलग तरह की स्थिति देखने को मिलती है। उन्होंने बैंक लॉकर के किराये, लॉकर में रखी संपत्ति की सुरक्षा और नुकसान की स्थिति में मिलने वाले मुआवजे से संबंधित सवाल भी उठाए थे।

इसके अलावा, उन्होंने बैंक खाता खोलते समय बीमा या क्रेडिट कार्ड जैसी दूसरी सेवाएं लेने के लिए दबाव बनाए जाने की शिकायतों का मुद्दा उठाया। उन्होंने जनधन खातों को लेकर भी सवाल किया कि जीरो बैलेंस खाते के नाम पर गरीब ग्राहकों के खातों से शुल्क कटने और बैलेंस माइनस में जाने की स्थिति क्यों पैदा होती है।

बैंक कर्मचारियों की स्थिति भी उनकी आलोचना का हिस्सा रही। अखिलेश ने कहा कि कर्मचारियों पर काम का दबाव, नई भर्तियों की कमी और उनकी मांगों की अनदेखी का असर ग्राहक सेवा पर पड़ सकता है। उन्होंने ग्रामीण इलाकों में बैंक शाखाओं और एटीएम की उपलब्धता का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि लोगों को नकदी निकालने के लिए दूर क्यों जाना पड़ता है।

अपनी पिछली पोस्ट में सपा प्रमुख ने बीजेपी सरकार से बैंकिंग सुधारों के दावों पर जवाब मांगा था। उन्होंने यह भी कहा था कि आम लोगों को बैंकिंग सेवाओं की सही जानकारी देने के लिए सरल भाषा में वित्तीय साक्षरता अभियान चलाया जाना चाहिए।

अब सरकार के जवाब पर नजर

अखिलेश यादव के इन सवालों ने बैंकिंग सेवाओं की लागत, डिजिटल लेनदेन की सुरक्षा, कर्ज तक पहुंच और ग्राहक शिकायतों के समाधान जैसे मुद्दों को राजनीतिक बहस में फिर से ला दिया है। इनका असर आम खाताधारकों, किसानों, छात्रों, छोटे कारोबारियों और पेंशन पर निर्भर बुजुर्गों से जुड़ा है।

हालांकि, बैंकिंग व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए बैंक शुल्क, ऋण वितरण, साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों, ग्राहकों को दिए गए मुआवजे और बैंक शाखाओं की उपलब्धता जैसे आंकड़ों की भी जरूरत होगी।

फिलहाल अखिलेश यादव ने सरकार से इन मुद्दों पर जवाब मांगा है। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार या संबंधित विभाग इन सवालों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और ग्राहकों की समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।