CM योगी का बड़ा बयान: ‘रूल ऑफ माफिया’ से ‘रूल ऑफ लॉ’ तक पहुंचा यूपी, बोले- अब निवेश के लिए बेहतर माहौल

CM योगी का बड़ा बयान: ‘रूल ऑफ माफिया’ से ‘रूल ऑफ लॉ’ तक पहुंचा यूपी, बोले- अब निवेश के लिए बेहतर माहौल

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था और निवेश के माहौल को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा बयान दिया है। शनिवार, 17 अक्टूबर को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में उन्होंने कहा कि प्रदेश अब ‘रूल ऑफ माफिया’ से निकलकर ‘रूल ऑफ लॉ’ यानी कानून के शासन की ओर बढ़ चुका है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में सुरक्षा, कनेक्टिविटी और निवेश को लेकर लोगों के मन में संदेह था, लेकिन कानून का शासन स्थापित करने से प्रदेश की छवि बदली है। कार्यक्रम में उन्होंने युवा अधिवक्ताओं को संविधान के मूल्यों की रक्षा करने, अन्याय के खिलाफ खड़े होने और तकनीक का इस्तेमाल विवेक के साथ करने की सलाह भी दी।

‘रूल ऑफ माफिया’ से कानून के शासन तक, योगी ने गिनाए बदलाव

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि एक समय उत्तर प्रदेश को लेकर यह धारणा बन गई थी कि यहां निवेश करना जोखिम भरा है। निवेशकों के मन में सुरक्षा, बेहतर कनेक्टिविटी और सरकारी नीतियों को लेकर सवाल थे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश को बीमारू राज्यों की श्रेणी में रखा जाता था और लोगों को लगता था कि यूपी की स्थिति में सुधार संभव नहीं है।

योगी ने दावा किया कि उनकी सरकार ने कानून का शासन स्थापित करने पर जोर दिया, जिससे प्रदेश की छवि में बदलाव आया। उन्होंने प्रयागराज के एक माफिया का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले कुछ प्रभावशाली लोगों के सामने कानून व्यवस्था कमजोर पड़ जाती थी। उनके मुताबिक, अब प्रदेश में किसी व्यक्ति की ताकत या पद से ऊपर कानून को रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून का शासन मजबूत होने से उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी आगे बढ़ने का अवसर मिला है। उन्होंने प्रदेश को वर्ष 2029-30 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की कार्ययोजना का जिक्र किया।

हालांकि, निवेश और आर्थिक विकास की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए निवेश, रोजगार, औद्योगिक उत्पादन और कानून-व्यवस्था से जुड़े आंकड़े भी महत्वपूर्ण होंगे। समारोह में मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान प्रदेश में हुए बदलावों को सरकार की उपलब्धि के रूप में पेश किया।

आपातकाल और जस्टिस एचआर खन्ना का जिक्र, युवा वकीलों को दिया संदेश

मुख्यमंत्री ने भारत के संवैधानिक इतिहास के दो महत्वपूर्ण प्रसंगों—1975 के आपातकाल और अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने—का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 1947 और 26 जनवरी 1950 की तरह 25 जून 1975 भी भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की महत्वपूर्ण तारीख है।

योगी ने आपातकाल के संदर्भ में ‘रूल ऑफ लॉ’ और ‘रूलर ऑफ लॉ’ के बीच अंतर समझाया। उनका कहना था कि कानून का शासन किसी व्यक्ति विशेष की इच्छा से ऊपर होता है। उन्होंने न्यायमूर्ति एचआर खन्ना की असहमति का उदाहरण देते हुए कहा कि सिद्धांतों के पक्ष में लिया गया निर्णय तत्कालीन परिस्थितियों में कठिन हो सकता है, लेकिन इतिहास में उसकी अहमियत बनी रहती है।

मुख्यमंत्री ने युवा अधिवक्ताओं से कहा कि अन्याय सामने आने पर चुप रहना उचित विकल्प नहीं है। उन्होंने संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जिम्मेदारी निभाने पर जोर दिया।

उन्होंने विद्यार्थियों को संस्कृत के सूत्र ‘सत्यं वद, धर्मं चर, स्वाध्यायान्मा प्रमदः’ का अर्थ समझाते हुए कहा कि सत्य बोलना, धर्म के अनुसार आचरण करना और लगातार अध्ययन करना एक वकील के जीवन का आधार होना चाहिए।

योगी ने कहा कि इन सिद्धांतों को केवल चैंबर की दीवारों पर लिखने के बजाय अपने व्यवहार में उतारना जरूरी है। उन्होंने डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचारों का उल्लेख करते हुए विधिवेत्ता में शिव जैसा मस्तिष्क, कृष्ण जैसा हृदय और राम जैसा वचन होने की बात भी कही।

AI और डीपफेक के दौर में वकीलों की जिम्मेदारी बढ़ी, 10 लाख युवाओं को प्रशिक्षण

तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI कानूनी कामकाज को आसान बना सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय इंसान के विवेक से ही होना चाहिए।

उन्होंने चेताया कि कानूनी दस्तावेज तैयार करने में लापरवाही किसी निर्दोष व्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकती है। डीपफेक और साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे के बीच डिजिटल साक्ष्यों की विश्वसनीयता भी एक बड़ी चुनौती बन गई है।

योगी ने बताया कि उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर थाने और 1,583 पुलिस थानों में साइबर हेल्प डेस्क हैं। उन्होंने ‘एआई प्रज्ञा’ कार्यक्रम का भी उल्लेख किया, जिसके तहत 10 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने युवा अधिवक्ताओं से कहा कि AI को सहायक के रूप में इस्तेमाल करें, न कि अपने विवेक का विकल्प बनाएं। कानूनी मामलों में तथ्यों की जांच, साक्ष्यों का मूल्यांकन और निष्पक्ष निर्णय लेने की जिम्मेदारी आखिरकार इंसान की ही रहती है।

उन्होंने वकीलों को अपनी पेशेवर साख बनाए रखने की सलाह भी दी। उनके अनुसार, अधिवक्ता की सबसे बड़ी पूंजी उसका भरोसा और ईमानदारी है। युवा वकीलों को गांवों में जमीन और पारिवारिक विवादों के समाधान में भी योगदान देना चाहिए, ताकि कानून का लाभ समाज के उन वर्गों तक पहुंचे, जिन्हें इसकी सबसे अधिक जरूरत है।

दीक्षांत समारोह में मेधावियों को पदक, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कही अहम बात

दीक्षांत समारोह में सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने विद्यार्थियों से कहा कि डिग्री हासिल करना किसी यात्रा का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। शिक्षा की असली परीक्षा विश्वविद्यालय से बाहर होती है। किसी विद्यार्थी की सफलता इस बात से भी तय होती है कि वह समाज और दूसरे लोगों के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव लाता है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली ने विधि शिक्षा में विश्वविद्यालय के योगदान की सराहना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि यहां से निकलने वाले विद्यार्थी कानून के शासन को मजबूत करने में भूमिका निभाएंगे।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह ने बताया कि संस्थान ने 20 वर्षों में उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों की न्यायिक सेवाओं को 250 से अधिक अधिकारी दिए हैं। उन्होंने कहा कि विधि शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता हासिल करना नहीं, बल्कि समाज की सेवा करना भी है।

समारोह में एलएलएम की रुपाली जायसवाल को स्वर्ण पदक, चित्रा सिंह को रजत और सौम्या गिरी को कांस्य पदक दिया गया। एलएलबी ऑनर्स में तेजस्वनी कौशल ने स्वर्ण, ईशा अग्रवाल ने रजत और निशा वर्मा ने कांस्य पदक हासिल किया।

ईशा अग्रवाल को क्रिमिनल लॉ में जस्टिस ओपी प्रधान मेमोरियल, कॉन्स्टिट्यूशनल लॉ में पद्मावती मोहनलाल जरीवाला और स्टूडेंट ऑफ द ईयर के लिए वीरेंद्र भाटिया स्वर्ण पदक भी मिला। तान्या वर्मा को टैक्सेशन में प्रदीप कुमार अग्रवाल मेमोरियल और मालविका पचौरी को सर्वश्रेष्ठ मूटिंग के लिए केके लूथरा मेमोरियल स्वर्ण पदक दिया गया।

डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में भी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। साइबर लॉ में भास्कर पांडे, जयंत अग्रवाल और चिराग निगम को क्रमशः स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक मिले। बौद्धिक संपदा अधिकार में आशी पांडे, रितेश मेहता और ईशा अस्थाना ने क्रमशः स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक हासिल किए। मीडिया लॉ में अंशुमान सिंह को स्वर्ण और संतुष्ट सोनकर को रजत पदक दिया गया।

कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह, विभागाध्यक्ष प्रो. मनीष सिंह, कुलसचिव केशव कुमार सहित न्यायाधीश, शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक मौजूद रहे।

युवाओं और निवेश के लिए क्या है इस संबोधन का संदेश?

मुख्यमंत्री का जोर इस बात पर रहा कि कानून का शासन, ईमानदार प्रशासन और बेहतर तकनीकी समझ प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। निवेशकों के लिए सुरक्षा और भरोसा जरूरी है, जबकि युवा अधिवक्ताओं के लिए संवैधानिक मूल्यों और पेशेवर ईमानदारी का पालन अहम है।

अब उत्तर प्रदेश के एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य की दिशा में निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास के परिणाम कितने प्रभावी रहते हैं, यह आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण होगा।