इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने वकीलों के प्रैक्टिस सर्टिफिकेट और बार एसोसिएशन के चुनाव से जुड़े एक अहम सवाल पर उत्तर प्रदेश बार काउंसिल से जवाब मांगा है। कोर्ट जानना चाहती है कि अगर कोई वकील अपनी प्रैक्टिस की जगह बदलता है, तो क्या उसका सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (CoP) दोबारा जारी किया जा सकता है? अगर ऐसा संभव है, तो इसके लिए क्या नियम और समय-सीमा निर्धारित है? यह मामला अवध बार एसोसिएशन के आगामी चुनावों से जुड़ा है। ऐसे में कोर्ट की पूछताछ का असर चुनावी मतदाता सूची और वकीलों के वोट देने के अधिकार से जुड़े सवालों पर भी पड़ सकता है।
प्रैक्टिस की जगह बदली तो क्या नया सर्टिफिकेट मिलेगा?
जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश बार काउंसिल से स्पष्ट करने को कहा है कि किसी वकील के प्रैक्टिस सर्टिफिकेट में दर्ज प्रैक्टिस की जगह बदलने पर उसे दोबारा जारी करने की व्यवस्था है या नहीं।
कोर्ट ने यह भी पूछा कि अगर CoP दोबारा जारी किया जा सकता है, तो इसके लिए कोई निर्धारित समय-सीमा है या नहीं। यानी प्रैक्टिस की जगह बदलने के बाद वकील को कितने समय के भीतर संबंधित बदलाव दर्ज कराने की अनुमति मिल सकती है, इस पर बार काउंसिल को स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस में दर्ज जानकारी वकील की पेशेवर स्थिति से जुड़ी होती है। इस मामले में कोर्ट यह समझना चाहती है कि प्रैक्टिस की जगह बदलने पर दस्तावेज में संशोधन की क्या प्रक्रिया है और इसके लिए कौन से नियम लागू होते हैं।
वोटिंग के लिए बार एसोसिएशन बदलने पर भी मांगा जवाब
हाईकोर्ट ने केवल प्रैक्टिस सर्टिफिकेट तक ही सवाल सीमित नहीं रखा। बेंच ने यह भी पूछा कि क्या कोई वकील उस बार एसोसिएशन को बदल सकता है, जहां वह अपने मतदान के अधिकार का इस्तेमाल करता है।
कोर्ट ने बार काउंसिल से यह स्पष्ट करने को कहा है कि अगर ऐसा बदलाव संभव है, तो उसे किस समय-सीमा के भीतर किया जा सकता है।
इसका महत्व अवध बार एसोसिएशन के आगामी चुनावों के संदर्भ में बढ़ जाता है। प्रैक्टिस की जगह और मतदान के लिए दर्ज बार एसोसिएशन में बदलाव की प्रक्रिया स्पष्ट होने से यह समझने में मदद मिल सकती है कि चुनाव में किसी वकील की पात्रता किस आधार पर तय होगी।
हालांकि, हाईकोर्ट ने फिलहाल इन सवालों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। बेंच ने बार काउंसिल के वकील को संबंधित नियमों और समय-सीमा की जानकारी जुटाकर अदालत के सामने पेश करने का निर्देश दिया है।
अवध बार एसोसिएशन के 5,108 मतदाताओं की सूची तलब
यह मामला गिरधारी लाल यादव की ओर से दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिका अवध बार एसोसिएशन के आगामी चुनावों से संबंधित है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बार काउंसिल के वकील से उन सदस्यों का विवरण उपलब्ध कराने को कहा, जिनके नाम रिटर्निंग ऑफिसर की ओर से अंतिम रूप दी गई मतदाता सूची में शामिल हैं। अदालत ने यह भी कहा कि यह सूची बार काउंसिल की वेबसाइट पर उपलब्ध होनी चाहिए।
आदेश के मुताबिक, रिटर्निंग ऑफिसर ने आगामी चुनाव में मतदान के लिए 5,108 सदस्यों को योग्य माना है। सूची को लेकर स्पष्टता बनाए रखने के लिए कोर्ट ने रिटर्निंग ऑफिसर को निर्देश दिया कि वह इन सभी योग्य मतदाताओं के नामों वाली सूची की एक प्रति बार काउंसिल के वकील को उपलब्ध कराएं।
इस निर्देश का उद्देश्य चुनाव में मतदान के पात्र सदस्यों की जानकारी अदालत के सामने स्पष्ट रूप से रखना है। इससे मतदाता सूची से जुड़े सवालों पर सुनवाई के दौरान संबंधित रिकॉर्ड की जांच करना आसान होगा।
पुराने और दोबारा जारी किए गए CoP का रिकॉर्ड भी देना होगा
हाईकोर्ट ने बार काउंसिल से एक और महत्वपूर्ण जानकारी मांगी है। बेंच ने निर्देश दिया कि पहले जारी किए गए, बाद में संशोधित किए गए और दोबारा जारी किए गए सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस का विवरण अगली सुनवाई पर पेश किया जाए।
इस रिकॉर्ड से अदालत को यह समझने में मदद मिल सकती है कि CoP में बदलाव या उसे दोबारा जारी करने की प्रक्रिया व्यवहार में किस तरह अपनाई गई है।
मामले की अगली सुनवाई 22 अक्टूबर को निर्धारित है। अब सबकी नजर बार काउंसिल के जवाब और पेश किए जाने वाले दस्तावेजों पर रहेगी। फिलहाल, प्रैक्टिस की जगह बदलने, CoP दोबारा जारी करने और मतदान के लिए बार एसोसिएशन बदलने से जुड़े सवालों पर अदालत ने स्पष्टीकरण मांगा है। इन मुद्दों पर अंतिम स्थिति आगे की सुनवाई और अदालत के आदेश से ही स्पष्ट होगी।


