यूपी में वोटर लिस्ट पर बड़ा बवाल! पीलीभीत में 13,150 वोटरों के नाम बदलने का आरोप, अब सभी जिलों में 2 दिन के भीतर होगी जांच

यूपी में वोटर लिस्ट पर बड़ा बवाल! पीलीभीत में 13,150 वोटरों के नाम बदलने का आरोप, अब सभी जिलों में 2 दिन के भीतर होगी जांच

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं के EPIC नंबर और नामों में कथित गड़बड़ी की शिकायत के बाद चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को मतदाता सूची के काम से हटाने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इतना ही नहीं, अब प्रदेश के सभी जिलों में वोटर लिस्ट की जांच होगी और जिला निर्वाचन अधिकारियों को दो दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपनी होगी। कांग्रेस ने पीलीभीत में हजारों मतदाताओं के विवरण में बदलाव का आरोप लगाया है, जबकि समाजवादी पार्टी भी लंबे समय से मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठा रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जांच में क्या सामने आएगा और क्या किसी वास्तविक मतदाता को वोट डालने में परेशानी हो सकती है?

पीलीभीत में 13,150 वोटरों के नाम बदलने का आरोप, कांग्रेस ने क्या दावा किया?

पीलीभीत का मामला तब चर्चा में आया, जब कांग्रेस ने लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के आंकड़े पेश किए। इस दौरान पार्टी के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना, राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत और सांसद इमरान मसूद समेत अन्य नेता मौजूद रहे।

कांग्रेस का दावा है कि 10 अप्रैल 2026 को SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण की अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद जुलाई से सितंबर के बीच पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में 13,150 मतदाताओं के नाम बदल दिए गए। पार्टी के मुताबिक, इन मामलों में EPIC नंबर और क्रम संख्या समान होने के बावजूद नाम अलग दर्ज किए गए।

इसके अलावा कांग्रेस ने 884 ऐसे मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगाया, जो कथित तौर पर अब भी संबंधित इलाके में रहते हैं। पार्टी ने यह भी दावा किया कि सूची में 2,600 ऐसे मतदाताओं के नाम जोड़े गए, जो संबंधित स्थानों पर मौजूद नहीं रहते हैं।

कांग्रेस के अनुसार, इन तीनों श्रेणियों को मिलाकर 16,554 मतदाताओं से जुड़ी कथित विसंगतियां सामने आई हैं। पार्टी ने सवाल उठाया कि अंतिम सूची जारी होने के बाद इतनी बड़ी संख्या में विवरण कैसे बदले और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

हालांकि, ये आंकड़े फिलहाल कांग्रेस के आरोप हैं। इनकी पुष्टि चुनाव अधिकारियों की जांच और आधिकारिक रिपोर्ट से ही होगी। पार्टी ने निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की है। कांग्रेस ने कानूनी विकल्पों पर विचार करने की बात भी कही है।

चुनाव आयोग का एक्शन, अब पूरे यूपी की वोटर लिस्ट की जांच

पीलीभीत में शिकायत सामने आने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने जिला निर्वाचन अधिकारी से मामले की जांच कराई। जिला निर्वाचन अधिकारी की रिपोर्ट में कुछ मतदाताओं के EPIC नंबर ऑनलाइन खोजने पर दूसरे मतदाता का विवरण दिखाई देने की बात सामने आई।

इसके बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने पीलीभीत सदर के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) और VRC ऑपरेटर को तत्काल मतदाता सूची से संबंधित काम से हटाने के निर्देश दिए। संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।

इसके साथ ही सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारी पर भी स्पष्ट रिपोर्ट मांगी गई है।

मामले को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने जांच का दायरा पीलीभीत से आगे बढ़ा दिया है। प्रदेश के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को अपने-अपने जिलों की सभी विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों में इस तरह की त्रुटियों की जांच करने को कहा गया है। इसके लिए दो दिन की समयसीमा तय की गई है।

इस कदम का मतलब है कि अब केवल एक विधानसभा क्षेत्र की शिकायत नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में समान प्रकार की विसंगतियों की पड़ताल होगी। जांच में यह पता लगाना अहम होगा कि कहीं EPIC नंबर के साथ गलत विवरण जुड़ने, नामों में बदलाव या दूसरी तकनीकी त्रुटियों जैसी समस्याएं अन्य जिलों में भी तो नहीं हैं।

अखिलेश यादव भी उठा रहे सवाल, सपा ने 100 सीटों पर गड़बड़ी का दावा किया

वोटर लिस्ट को लेकर समाजवादी पार्टी भी चुनाव आयोग पर सवाल उठाती रही है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में नामों की पुनरावृत्ति, एक ही व्यक्ति के नाम पर कई EPIC नंबर और मतदाता विवरण में कथित विसंगतियों का मुद्दा उठाया है।

पार्टी ने कम से कम 100 विधानसभा सीटों पर गड़बड़ियों की शिकायत करने का दावा किया है। सपा का कहना है कि मतदाता सूची की खामियां दूर करना जरूरी है, ताकि पात्र मतदाताओं का मतदान का अधिकार प्रभावित न हो।

अखिलेश यादव ने आजमगढ़ विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए एक व्यक्ति का नाम कथित तौर पर 10 बार दर्ज होने का मुद्दा उठाया था। इस मामले में 19 वर्षीय विकास यादव का नाम अलग-अलग मतदान केंद्रों की सूचियों में दर्ज होने की बात सामने आई। विकास के पिता के मुताबिक, उनके बेटे ने पहली बार मतदाता बनने के लिए फॉर्म-6 भरा था।

मामले के सामने आने के बाद जिला निर्वाचन कार्यालय ने जांच के लिए एक समिति गठित की। इस प्रकरण में भी अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है।

वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को लेकर फॉर्म-7 भी विवाद का विषय बना हुआ है। इस फॉर्म का इस्तेमाल मतदाता सूची में किसी नाम को हटाने या किसी प्रविष्टि पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है। विपक्षी दलों ने सवाल उठाया है कि कहीं इस प्रक्रिया का इस्तेमाल वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाने के लिए तो नहीं किया जा रहा।

हालांकि, हर दोहरी प्रविष्टि या नाम में बदलाव को अपने आप गड़बड़ी नहीं माना जा सकता। यह भी जांचना जरूरी है कि मामला तकनीकी त्रुटि का है, दोहरी प्रविष्टि का है या नियमों के तहत किए गए वैध संशोधन का।

2027 के चुनाव से पहले क्यों अहम है वोटर लिस्ट का विवाद?

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची का मुद्दा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होता जा रहा है। भाजपा, सपा और कांग्रेस समेत प्रमुख दल चुनावी तैयारियों में जुटे हैं। ऐसे में वोटर लिस्ट की विश्वसनीयता और उसमें दर्ज मतदाताओं के विवरण पर उठ रहे सवाल चुनावी बहस को और तेज कर सकते हैं।

इस पूरे मामले में तीन बातें सबसे ज्यादा अहम हैं। पहली, किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से नहीं हटना चाहिए। दूसरी, एक ही व्यक्ति के नाम पर कई प्रविष्टियों या गलत EPIC विवरण जैसी समस्याओं की पहचान कर रिकॉर्ड दुरुस्त किया जाना चाहिए। तीसरी, जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि आरोपों की पुष्टि तथ्यों के आधार पर हो सके और जिम्मेदारी तय की जा सके।

अगर किसी मतदाता के EPIC नंबर से ऑनलाइन दूसरे व्यक्ति का विवरण दिखाई देता है, तो उसके लिए अपने रिकॉर्ड की जांच करना और जरूरत पड़ने पर संबंधित निर्वाचन कार्यालय से संपर्क करना उपयोगी हो सकता है। हालांकि, केवल ऑनलाइन विवरण में विसंगति दिखाई देने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि मतदाता का नाम अंतिम सूची से हटा दिया गया है या उसका मतदान का अधिकार समाप्त हो गया है।

फिलहाल, चुनाव आयोग ने पीलीभीत के मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है और पूरे उत्तर प्रदेश की मतदाता सूचियों की जांच के निर्देश दिए हैं। अब सबकी नजर दो दिन के भीतर आने वाली रिपोर्टों पर है। इन रिपोर्टों से पता चलेगा कि मामला किन क्षेत्रों तक फैला है, कितनी विसंगतियां वास्तविक हैं और उन्हें ठीक करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।