राजस्थान हाईकोर्ट ने GST से जुड़े मामलों में वैधानिक अपील का रास्ता छोड़कर सीधे रिट याचिका दाखिल करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने साफ कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत मिलने वाले रिट अधिकार क्षेत्र को वैधानिक अपील का नियमित विकल्प नहीं बनाया जा सकता। ऐसा करने से हाईकोर्ट पर अनावश्यक बोझ बढ़ता है और कानून में बनाई गई अपील की व्यवस्था कमजोर पड़ती है। यह टिप्पणी एक कारोबारी की याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई, जिसने GST अधिकारियों के जब्ती आदेश को चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट ने कहा- अपील की व्यवस्था को दरकिनार नहीं कर सकते
चीफ जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने कहा कि अदालत ऐसी प्रवृत्ति को नजरअंदाज नहीं कर सकती, जिसमें याचिकाकर्ता वैधानिक अपील की व्यवस्था को छोड़कर सीधे हाईकोर्ट पहुंच जाते हैं।
पीठ के मुताबिक, रिट अधिकार क्षेत्र असाधारण परिस्थितियों के लिए है। इसे हर मामले में अपील के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। खासकर कर संबंधी मामलों में ऐसा करना उचित नहीं है, क्योंकि इनमें सरकारी राजस्व भी जुड़ा होता है।
सोयाबीन तेल के नाम पर खरीदा गया था सरसों का तेल
मामला खाद्य तेल के कारोबार से जुड़े एक व्यापारी का था। आरोप था कि उसने एक व्यक्ति से सोयाबीन रिफाइंड ऑयल के नाम पर तेल खरीदा था। परिवहन के दौरान अलवर में राज्य कर विभाग के अधिकारियों ने ट्रक को रोक लिया।
जांच में अधिकारियों को कई गड़बड़ियां नजर आईं। दस्तावेजों में सोयाबीन तेल दर्ज था, जबकि वाहन की जांच में सरसों का तेल मिला। अधिकारियों को ट्रक के रास्ते में असामान्य बदलाव और टोल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने पर भी संदेह हुआ। जांच के दौरान चालक स्टीयरिंग लॉक करके मौके से फरार हो गया।
इसके बाद विभाग ने माल और वाहन की जब्ती को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता ने इस कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उस समय एक समकक्ष पीठ ने बैंक गारंटी जमा कराने की शर्त पर वाहन छोड़ने का निर्देश दिया था। कारोबारी बैंक गारंटी जमा नहीं कर सका, जिसके बाद सक्षम अधिकारी ने जब्ती का अंतिम आदेश जारी कर दिया।
GST कानून में अपील का रास्ता मौजूद
अंतिम जब्ती आदेश के खिलाफ कारोबारी दोबारा हाईकोर्ट पहुंचा। इस पर सरकारी अधिकारियों ने आपत्ति जताई कि याचिकाकर्ता ने केंद्रीय GST और राजस्थान GST अधिनियम, 2017 की धारा 107 के तहत उपलब्ध वैधानिक अपील का इस्तेमाल नहीं किया है।
अधिकारियों ने कहा कि मामले में कई तथ्यात्मक सवाल शामिल हैं। इनमें तेल की वास्तविक प्रकृति, टोल रिकॉर्ड, ई-वे बिल और ट्रक के रास्ते से जुड़े विवाद हैं। इन सभी तथ्यों की विस्तृत जांच रिट याचिका के जरिए नहीं की जा सकती।
जटिल तथ्यों की जांच अपीलीय प्राधिकारी करेगा
हाईकोर्ट ने अधिकारियों की दलीलों से सहमति जताई। खंडपीठ ने कहा कि GST कानून में शिकायतों के समाधान के लिए एक विस्तृत अपीलीय व्यवस्था मौजूद है। धारा 107 के तहत अपीलीय प्राधिकारी को साक्ष्यों की जांच और मूल्यांकन करने का अधिकार दिया गया है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट को मिली शक्ति का इस्तेमाल विधायिका की बनाई अपील व्यवस्था को दरकिनार करने के लिए नहीं किया जा सकता। रिट अदालत जटिल और विवादित तथ्यों की दोबारा जांच करने वाली अपीलीय अदालत की तरह काम नहीं कर सकती।
इन टिप्पणियों के साथ राजस्थान हाईकोर्ट ने कारोबारी की याचिका खारिज कर दी।


