दिल्ली में जहरीली हवा का तांडव! जहांगीरपुरी में AQI 459 तो IIT दिल्ली में 450, 12 से ज्यादा इलाकों में सांस लेना मुश्किल

दिल्ली में जहरीली हवा का तांडव! जहांगीरपुरी में AQI 459 तो IIT दिल्ली में 450, 12 से ज्यादा इलाकों में सांस लेना मुश्किल

दिल्ली में प्रदूषण का स्तर लगातार खतरनाक बना हुआ है। दिवाली से पहले ही राजधानी के लोगों के लिए साफ हवा में सांस लेना मुश्किल हो गया है। हालात ऐसे हैं कि कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के पार पहुंच चुका है। समीर ऐप के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जहांगीरपुरी में AQI 459 दर्ज किया गया, जबकि पंजाबी बाग में यह 448 और IIT दिल्ली में 450 तक पहुंच गया। रोहिणी, सोनिया विहार, आरके पुरम, नरेला और अलीपुर जैसे इलाकों में भी हवा की स्थिति गंभीर बनी हुई है। सबसे चिंता की बात यह है कि राजधानी में GRAP-2 की पाबंदियां लागू होने और प्रशासन की ओर से प्रदूषण नियंत्रण के कदम उठाए जाने के बावजूद हालात में खास सुधार दिखाई नहीं दे रहा। इसका सीधा असर लोगों की सेहत और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है।

जहांगीरपुरी में AQI 459, IIT दिल्ली और पंजाबी बाग में भी हालात गंभीर

दिल्ली के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी में पहुंच गया है। समीर ऐप के अनुसार, सबसे खराब स्थिति जहांगीरपुरी में दर्ज की गई, जहां AQI 459 रहा।

इसके अलावा IIT दिल्ली में 450, पंजाबी बाग में 448, रोहिणी में 432 और सोनिया विहार में 423 का स्तर रिकॉर्ड किया गया।

अन्य इलाकों की बात करें तो आरके पुरम में AQI 418, पूसा में 410, नॉर्थ कैंपस (दिल्ली विश्वविद्यालय) में 410 और पटपड़गंज में 407 दर्ज किया गया।

ओखला फेज-2 में 401 और सिरीफोर्ट में 403 AQI रहा। यानी राजधानी के कई प्रमुख रिहायशी और संस्थागत इलाकों में हवा गंभीर श्रेणी में पहुंच चुकी है।

वहीं, ITO में AQI 399, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 393 और तालकटोरा गार्डन में 376 दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से साफ है कि प्रदूषण का असर दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में देखने को मिल रहा है।

नरेला से अलीपुर तक प्रदूषण का असर, इन इलाकों में भी हवा बेहद खराब

राजधानी के दूसरे इलाकों में भी वायु गुणवत्ता की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। नरेला में AQI 434 और अलीपुर में 433 दर्ज किया गया। बवाना में यह आंकड़ा 413 तक पहुंच गया।

इसके अलावा मुद्रिका में 423, बुराड़ी में 361 और अशोक विहार में 345 AQI रिकॉर्ड किया गया।

दूसरी तरफ आया नगर में 370, चांदनी चौक में 357, मथुरा रोड पर 381 और कॉमनवेल्थ स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में 376 का स्तर रहा।

द्वारका सेक्टर-8 में AQI 395, IGI एयरपोर्ट पर 353 और JNU में 387 दर्ज किया गया। आनंद विहार में 296 और लोधी रोड पर 286 का स्तर रहा।

कुछ अन्य इलाकों में भी प्रदूषण का स्तर ऊंचा बना हुआ है। टिकरी कलां में 329, उत्तम नगर में 327, श्री अरबिंदो मार्ग पर 309, शादीपुर में 301 और NSIT द्वारका में 303 AQI दर्ज किया गया।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि दिल्ली के अधिकांश निगरानी केंद्रों पर हवा खराब से लेकर गंभीर श्रेणी तक बनी हुई है।

GRAP-2 लागू होने के बावजूद राहत नहीं, प्रशासन के प्रयासों पर सवाल

दिल्ली में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए GRAP-2 की पाबंदियां लागू हैं। इसके तहत प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर नियंत्रण रखने और हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।

हालांकि, मौजूदा आंकड़े इन प्रयासों के असर को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं। कई इलाकों में AQI लगातार 400 के आसपास या उससे ऊपर बना हुआ है।

प्रदूषण बढ़ने से लोगों को आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए स्थिति ज्यादा चिंताजनक है।

राजधानी में रहने वाले लोगों की दिनचर्या भी प्रभावित हो रही है। सुबह की सैर, खुले में व्यायाम और लंबे समय तक बाहर रहने जैसी गतिविधियों को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है।

AQI 400 पार होने का क्या मतलब है? जानिए प्रदूषण की सभी श्रेणियां

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मानकों के अनुसार, एयर क्वालिटी इंडेक्स को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है।

  • 0 से 50: अच्छी हवा

  • 51 से 100: संतोषजनक

  • 101 से 200: मध्यम

  • 201 से 300: खराब

  • 301 से 400: बेहद खराब

  • 401 से 500: गंभीर

जब AQI 400 के पार पहुंच जाता है, तो इसे गंभीर श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे हालात में प्रदूषण का असर स्वस्थ लोगों पर भी पड़ सकता है, जबकि पहले से बीमार लोगों की परेशानी बढ़ सकती है।

डॉक्टरों की सामान्य सलाह के मुताबिक, ऐसे मौसम में अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना चाहिए। बाहर जाना जरूरी हो तो अच्छी गुणवत्ता वाला N95 मास्क इस्तेमाल करना बेहतर है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

फिलहाल दिल्ली के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रदूषण के स्तर को कम करना है। GRAP-2 की पाबंदियों के साथ-साथ प्रशासन को प्रदूषण के स्रोतों पर प्रभावी नियंत्रण करना होगा। जब तक हवा की गुणवत्ता में सुधार नहीं होता, राजधानी के लोगों के लिए राहत की उम्मीद करना मुश्किल है।