बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अक्टूबर-नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक सात महीने पहले अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया है। इस विस्तार में BJP के 7 नए चेहरों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है। यह कदम सिर्फ जातीय और क्षेत्रीय समीकरण को साधने के लिए नहीं है, बल्कि BJP ने इसके जरिए यह संकेत भी दिया है कि अब वह बिहार में नीतीश कुमार से ज्यादा ताकतवर हो चुकी है।
कौन हैं नए मंत्री?
नीतीश कैबिनेट में BJP कोटे से जिन 7 नेताओं को मंत्री बनाया गया है, उनमें शामिल हैं:
- विजय कुमार मंडल (अररिया, सिकटी)
- जीवेश मिश्रा (दरभंगा, जाले)
- संजय सरावगी (दरभंगा)
- मोतीलाल प्रसाद (सीतामढ़ी, रीगा)
- राजू कुमार सिंह (मुजफ्फरपुर, साहेबगंज)
- डॉ. सुनील कुमार (नालंदा, बिहारशरीफ)
- कृष्ण कुमार मंटू (सारण, अमनौर)
इनमें से चार नेता मिथिलांचल क्षेत्र से हैं, जो NDA के लिए अहम माना जाता है। बता दें कि NDA के 30% विधायक इसी इलाके से आते हैं। इसके अलावा, इन नेताओं का चयन जातीय समीकरण को ध्यान में रखकर किया गया है। BJP ने राजपूत, भूमिहार, कुर्मी, कुशवाहा, केवट, तेली और मारवाड़ी समुदाय के नेताओं को मंत्री बनाकर अपने वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश की है।
जातीय समीकरण को साधने की कोशिश
बिहार की राजनीति में जाति का बहुत बड़ा रोल होता है। इस बार भी BJP ने जातीय समीकरण को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल का विस्तार किया है। नए मंत्रियों में तीन अगड़ी जातियों (राजपूत, भूमिहार, मारवाड़ी) और चार पिछड़ी जातियों (कुर्मी, कुशवाहा, केवट, तेली) के नेताओं को शामिल किया गया है। इससे साफ है कि BJP ने बिहार में अपने वोट बैंक को मजबूत करने की पूरी तैयारी कर ली है।
BJP का बढ़ता दबदबा
नीतीश कैबिनेट में BJP के मंत्रियों की संख्या अब 21 हो गई है, जबकि JDU के सिर्फ 13 मंत्री हैं। यह पहली बार है जब BJP के इतने ज्यादा मंत्री बिहार सरकार में शामिल हुए हैं। इससे पहले BJP के अधिकतम 16 मंत्री हुआ करते थे। इसका मतलब साफ है कि अब BJP बिहार में नीतीश कुमार से ज्यादा ताकतवर हो चुकी है।
चुनाव से पहले कैबिनेट विस्तार: BJP का सक्सेस फॉर्मूला
BJP ने पहले भी कई राज्यों में चुनाव से पहले कैबिनेट विस्तार का सक्सेस फॉर्मूला अपनाया है। गुजरात, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा में BJP ने चुनाव से पहले कैबिनेट विस्तार करके जीत हासिल की है।
- गुजरात: 2022 के चुनाव से 14 महीने पहले BJP ने सीएम विजय रूपाणी और उनके सभी 22 मंत्रियों को हटा दिया था। इसके बाद BJP ने गुजरात में 60 साल के इतिहास में सबसे ज्यादा सीटें जीतीं।
- उत्तर प्रदेश: 2020 के चुनाव से चार महीने पहले BJP ने योगी सरकार में 7 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई। इसके बाद BJP ने पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की।
- उत्तराखंड: 2022 के चुनाव से पहले BJP ने सीएम तीरथ सिंह रावत को हटाकर पुष्कर सिंह धामी को सीएम बनाया। इसके बाद BJP ने लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल की।
- हरियाणा: 2023 के चुनाव से पहले BJP ने सीएम मनोहर लाल खट्टर को हटाकर नायब सिंह सैनी को सीएम बनाया। इसके बाद BJP ने लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल की।
बिहार में क्या होगा असर?
बिहार में BJP ने चुनाव से पहले कैबिनेट विस्तार का जो दांव चला है, उसका असर चुनाव में देखने को मिलेगा। BJP ने जातीय समीकरण को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल का विस्तार किया है। इससे पार्टी को OBC, दलित और अगड़ी जातियों के वोट मिलने की उम्मीद है। हालांकि, यह देखना होगा कि क्या यह रणनीति बिहार में भी कामयाब होगी।
नीतीश कुमार की भूमिका
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस मंत्रिमंडल विस्तार में BJP के साथ मिलकर काम किया है। उन्होंने अपने कोटे का इस्तेमाल न करके BJP को ज्यादा मंत्री बनाने का मौका दिया है। इससे साफ है कि अब BJP बिहार में नीतीश कुमार से ज्यादा ताकतवर हो चुकी है।