दिल्ली हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य से जुड़े नेशनल हेराल्ड मामले में सुनवाई की कार्यवाही पर रोक बढ़ा दी है। न्यायमूर्ति विकास महाजन ने इस मामले में पूर्व भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई 28 जुलाई को तय की है। अदालत ने यह भी कहा कि पक्षकार इस याचिका पर अपनी लिखित दलीलें दाखिल करेंगे, जिसमें ट्रायल कोर्ट में कुछ सबूत पेश करने की मांग की गई है।
स्वामी और गांधी परिवार के वकीलों ने मांगा समय
सुब्रमण्यम स्वामी और गांधी परिवार का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील आर एस चीमा ने लिखित दलीलें दाखिल करने के लिए अदालत से समय मांगा। स्वामी ने कहा कि मामले में जांच पर कोई रोक नहीं होनी चाहिए, लेकिन चीमा ने वकील तरन्नुम चीमा के साथ मिलकर तर्क दिया कि यह मामला एक निजी शिकायत से उत्पन्न हुआ है और वैसे भी इस तरह की कोई जांच नहीं हुई है।
क्या है नेशनल हेराल्ड केस?
नेशनल हेराल्ड केस में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने गांधी परिवार और अन्य पर आरोप लगाया है कि उन्होंने केवल 50 लाख रुपये का भुगतान करके धोखाधड़ी और धन की हेराफेरी करने की साजिश रची। इसके माध्यम से यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड (वाईआई) ने नेशनल हेराल्ड के मालिक एसोसिएट जर्नल्स लिमिटेड द्वारा कांग्रेस को दिए जाने वाले 90.25 करोड़ रुपये वसूलने का अधिकार प्राप्त किया।
सभी आरोपियों – गांधी परिवार, एआईसीसी के कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा, एआईसीसी के महासचिव ऑस्कर फर्नांडीस, सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और वाईआई – ने इन आरोपों से इनकार किया है।
मामले की पृष्ठभूमि
सुब्रमण्यम स्वामी ने 11 फरवरी, 2021 के ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख किया, जिसमें गांधी परिवार और मामले में अन्य आरोपियों पर मुकदमा चलाने के लिए सबूत पेश करने की उनकी याचिका को खारिज कर दिया गया था। स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट के महासचिव (रजिस्ट्री अधिकारी), एक उप भूमि और विकास अधिकारी और आयकर के एक डिप्टी कमिश्नर सहित कुछ गवाहों को बुलाने की मांग की, साथ ही उन्हें कुछ दस्तावेजों को साबित करने का निर्देश देने की भी मांग की।
उच्च न्यायालय ने 22 फरवरी, 2021 को गांधी परिवार, एआईसीसी महासचिव ऑस्कर फर्नांडिस (अब दिवंगत), सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और यंग इंडियन को नोटिस जारी कर स्वामी की याचिका पर उनसे जवाब मांगा था और अगले आदेश तक मामले की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।
मोतीलाल वोरा के निधन के बाद क्या हुआ?
मोतीलाल वोरा के निधन के बाद निचली अदालत में उनके खिलाफ कार्यवाही बंद कर दी गई थी, जबकि अन्य लोगों को 2014 में निचली अदालत ने संपत्ति के दुरुपयोग, आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी के कथित अपराधों के लिए भारतीय दंड संहिता की आपराधिक साजिश के साथ तलब किया था।