Saturday, April 5, 2025

वक्फ बिल पर बोली सोनिया गांधी, ‘जबरन पारित किया गया…’

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी ने गुरुवार को पार्टी की सेंट्रल पीटिशन पार्टी (सीपीपी) की बैठक में वक्फ बिल को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ी और इस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि हाल ही में लोकसभा में पारित हुआ वक्फ संशोधन बिल 2024, एक गहरी चिंता का विषय है, जो संविधान पर सीधे हमला करता है। उनका कहना था कि यह बिल बिना किसी संवाद और विपक्ष के विरोध के बावजूद जबरदस्ती पारित किया गया है।

कहा, विपक्षी नेताओं को अपनी बात रखने का मौका नहीं मिला

बुधवार को, विभिन्न विपक्षी दलों के कड़े विरोध के बावजूद, लोकसभा ने देर रात वक्फ संशोधन विधेयक, 2025 और मुसलमान वक्फ निरसन विधेयक, 2024 को पारित कर दिया। लगभग 10 घंटे की लंबी बहस के बाद, यह विधेयक साढ़े दो बजे रात में मंजूर किया गया। सोनिया गांधी ने इसे लोकतंत्र के लिए एक गंभीर झटका बताया और आरोप लगाया कि सरकार ने विपक्षी नेताओं को अपने विचार रखने का मौका नहीं दिया।

वक्फ बिल को बताया संविधान पर हमला

सोनिया गांधी ने इस बिल को भाजपा की “सोची-समझी रणनीति” का हिस्सा बताया, जो समाज को स्थायी ध्रुवीकरण की ओर धकेलने के लिए है। उन्होंने कहा कि यह बिल न सिर्फ संविधान पर हमला करता है, बल्कि यह देश की राजनीति में भी गहरे मतभेद पैदा करने का प्रयास है। गांधी ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह देश में असहमति की आवाजों को दबा रही है और सदन को स्थगित करने के कारण विपक्षी नेताओं को अपने विचार रखने से रोकने की कोशिश कर रही है।

लोकतंत्र की सुरक्षा पर उठाए सवाल

सोनिया गांधी ने लोकतंत्र के संकट पर भी गंभीर चिंता जताई। उनका कहना था कि यह चिंताजनक है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया जा रहा है। इस प्रकार की कार्यवाहियां संसद के आधारभूत सिद्धांतों के खिलाफ जाती हैं। गांधी ने राज्यसभा में भी अपनी असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे को कई बार अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिला, चाहे वह कितनी बार अनुरोध करें।

देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने का लगाया आरोप

विपक्षी दलों ने इस विधेयक को लेकर अपनी कड़ी आलोचना की है। सोनिया गांधी ने इसे “कानूनी धांधली” और “संविधान का उल्लंघन” बताया। उनका कहना था कि भाजपा की सरकार देश में एकतरफा फैसले लेने की प्रक्रिया में लगी हुई है, और ऐसे कदम देश की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर कर सकते हैं।

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