भारत में 2026 से शुरू होगी जनगणना, डिजिटल होगा पूरा सिस्टम, घर-घर जाकर पूछे जाएंगे 3 दर्जन सवाल

भारत में 2026 से शुरू होगी जनगणना, डिजिटल होगा पूरा सिस्टम, घर-घर जाकर पूछे जाएंगे 3 दर्जन सवाल

भारत में अगले साल से जनगणना का महाअभियान शुरू होने जा रहा है। भारत के जनगणना आयुक्त और महापंजीयक मृत्युंजय कुमार नारायण ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चिट्ठी लिखकर बताया कि 1 अप्रैल, 2026 से घरों का सूचीकरण और आवास गणना शुरू होगी। इस दौरान हर घर की स्थिति, संपत्ति और सुविधाओं की पूरी जानकारी जुटाई जाएगी। खास बात ये है कि इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी और लोग खुद भी अपनी जानकारी मोबाइल ऐप के जरिए दर्ज कर सकेंगे।

दो चरणों में होगी जनगणना

पहला चरण: घरों का सूचीकरण (1 अप्रैल, 2026 से)

इस चरण में हर घर की पूरी डिटेल इकट्ठा की जाएगी। इसमें घर की स्थिति, संपत्ति, और सुविधाओं जैसे फोन, इंटरनेट, साइकिल, स्कूटर, कार, टीवी, रेडियो जैसी चीजों का ब्योरा लिया जाएगा। साथ ही अनाज की खपत, पानी और बिजली का स्रोत, शौचालय, नहाने और रसोई की सुविधाएं, खाना पकाने का ईंधन, और एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन के बारे में भी पूछा जाएगा। घर की दीवारें, फर्श, छत की सामग्री, घर में रहने वालों की संख्या, कमरों की गिनती, शादीशुदा जोड़ों की मौजूदगी, और क्या घर की मुखिया महिला या अनुसूचित जाति/जनजाति से है, जैसे सवाल भी शामिल होंगे।

दूसरा चरण: जनसंख्या गणना (1 फरवरी, 2027 से)

इस चरण में हर घर के हर शख्स की जानकारी जुटाई जाएगी, जिसमें उनकी सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और दूसरी डिटेल शामिल होंगी। बर्फीले इलाकों जैसे लद्दाख में ये 1 अक्टूबर, 2026 से शुरू होगा, जबकि बाकी देश में 1 मार्च, 2027 की तारीख तय की गई है।

डिजिटल जनगणना और स्व-गणना की सुविधा

इस बार जनगणना में पुराने कागजी तरीके को छोड़कर मोबाइल ऐप का इस्तेमाल होगा। लोग चाहें तो स्व-गणना के जरिए खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। जनगणना आयुक्त ने करीब 36 सवाल तैयार किए हैं, जो हर घर से पूछे जाएंगे। ये पूरी प्रक्रिया डिजिटल होने से तेज और पारदर्शी होगी।

प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव पर रोक

जनगणना को सटीक और सुचारू बनाने के लिए केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि 31 दिसंबर, 2025 के बाद प्रशासनिक इकाइयों जैसे जिला, तहसील या थाना की सीमाओं में कोई बदलाव नहीं होगा। अगर कोई बदलाव करना है, तो उसे इस तारीख से पहले पूरा करना होगा। 1 जनवरी, 2026 से 31 मार्च, 2027 तक सीमाओं में कोई छेड़छाड़ नहीं की जा सकेगी। सभी गांवों और कस्बों को एकसमान गणना प्रखंडों में बांटा जाएगा, और हर प्रखंड के लिए एक गणक तैनात होगा, ताकि कोई चूक या दोहराव न हो।

34 लाख गणक करेंगे काम

इस मेगा अभियान को कामयाब बनाने के लिए 34 लाख से ज्यादा गणक और पर्यवेक्षक तैनात किए जाएंगे। साथ ही 1.3 लाख जनगणना कार्यकर्ता भी इस काम में जुटेंगे। ये भारत की 16वीं और आजादी के बाद 8वीं जनगणना होगी।