5 साल बाद उमर खालिद–शरजील इमाम को मिलेगी रिहाई? दिल्ली दंगा केस पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज

5 साल बाद उमर खालिद–शरजील इमाम को मिलेगी रिहाई? दिल्ली दंगा केस पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज

पांच साल से ज्यादा समय से जेल में बंद छात्र एक्टिविस्ट उमर खालिद और शरजील इमाम आखिरकार जेल से बाहर आएंगे या नहीं, इसको लेकर जानकारी 5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के बाद सामने आएगी. सोमवार आज सुप्रीम कोर्ट 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े इस मामले में आरोपी साजिशकर्ता को लेकर फैसला सुनाएगा. इसमें पांच अन्य आरोपियों के साथ उनकी जमानत याचिका पर कोर्ट सुनवाई करेगा.

जस्टिस अरविंद कुमार और एनवी अंजारिया की बेंच ने पिछले साल 10 दिसंबर को आरोपी और दिल्ली पुलिस की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. दिल्ली पुलिस ने उनकी रिहाई का विरोध करने के लिए गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) लगाया है. इस मामले में तीनों के वकीलों ने सुनवाई के दौरान ट्रायल में हो रही लंबी देरी और UAPA की कठोर धाराओं के अनुपयोगी इस्तेमाल पर गंभीर सवाल उठाए थे.

2020 में पुलिस ने किया था गिरफ्तार

उमर खालिद 13 सितंबर, 2020 से पुलिस हिरासत में है. वहीं इमाम को 28 जनवरी, 2020 से जेल में रखा गया है. आरोपियों ने तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष इसे जानबूझकर लंबा खींचने और ट्रायल में देरी करने के लिए एक-एक करके आरोपियों को गिरफ्तार करने की रणनीति अपना रहा है. 2020 के दंगे फरवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कुछ हिस्सों में हुए थे. ये दंगे नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) के विरोध प्रदर्शनों को लेकर हफ्तों के तनाव के बाद हुए थे. कई दिनों तक चली हिंसा में कई लोगों की मौत हुई. साथ ही घरों, दुकानों और पूजा स्थलों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ.

पुलिस ने माना CAA के विरोध प्रदर्शन से जुड़ी साजिश

फिर दिल्ली पुलिस ने हिंसा की जांच की. इसे CAA के विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी साजिश बताया. कई कार्यकर्ताओं, छात्रों और बुद्धिजीवियों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) जैसे कड़े कानूनों के तहत गिरफ्तार किया गया. इनमें JNU के पूर्व छात्र शरजील इमाम और कैंपस आंदोलन से जुड़े छात्र कार्यकर्ता उमर खालिद शामिल थे. पुलिस ने आरोप लगाया कि उनके भाषण और गतिविधियों ने हिंसा की योजना बनाने और उसे बढ़ाने में मदद की. इन दावों को दोनों ने ज़ोरदार तरीके से नकारा है.

शरजील इमाम के जिन कामों को अदालत की सुनवाई में उन्हें जेल भेजने के लिए अहम सबूत के तौर पर पेश किया गया है, उनमें से एक वीडियो है जिसमें वह “चिकन नेक” कॉरिडोर को ब्लॉक करने और असम को बाकी भारत से अलग करने के बारे में बात करते दिख रहे हैं. दिल्ली पुलिस ने एक और वीडियो का भी हवाला दिया है जिसमें शरजील इमाम ने कथित तौर पर ‘चक्का जाम’ करके दिल्ली में परेशानी बढ़ाने की योजना बताई थी. इससे दूध और सब्ज़ियों जैसी जरूरी चीजों की सप्लाई बंद हो जाती.