कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा कि सेक्युलर पार्टियां मुस्लिम नेताओं को नजरअंदाज करने लगी हैं. इसके पीछे की वजह बीजेपी है. उन्होंने कहा कि क्योंकि जब भी कांग्रेस पार्टी या कोई सेक्युलर पार्टी मुसलमानों की बात करती है, तो बीजेपी तुरंत उन पर तुष्टीकरण का आरोप लगाती है. पूर्व कांग्रेस नेता डॉ. शकील अहमद के बयान पर राशिद अल्वी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में नसीमउद्दीन सिद्दीकी मंत्री थे.
राशिद अल्वी ने कहा कि वो कांग्रेस में शामिल हुए, फिर छोड़ दिया और भी कई लोगों ने पार्टी छोड़ दी है. पार्टी के अंदर मुस्लिम नेतृत्व की स्थिति कमजोर हो रही है, और यह बहुत चिंता की बात है. उन्होंने कहा कि शकील बिहार चले गए. रोशन बेग कर्नाटक चले गए. गुलाम नबी आजाद कश्मीर चले गए. उन्होंने कहा कि पार्टियों के अंदर मुसलमान लीडरशिप को नजरअंदाज किया जा रहा है.
पूर्व कांग्रेस नेता डॉ. शकील अहमद ने कहा था कि मैं शशि थरूर को (कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए) वोट देना चाहता था. लेकिन, जब मैंने देखा कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी के वफादार लोग खरगे जी के लिए वोट मांग रहे हैं. मैंने अपनी मर्ज़ी के खिलाफ खरगे साहब को वोट दिया क्योंकि मैं अपना वोट बर्बाद नहीं करना चाहता था.
उन्होंने कहा कि पिछले पांच सालों में मैंने राहुल गांधी से मिलने का समय कभी नहीं मांगा क्योंकि मैं उनसे निराश था. राहुल गांधी को लगता है कि कांग्रेस पार्टी सिर्फ उनके परिवार की है. राहुल गांधी कभी भी अच्छे पॉपुलर नेताओं से नहीं मिलते क्योंकि उन्हें खतरा महसूस होता है.
नसीमउद्दीन सिद्दीकी ने छोड़ी कांग्रेस
उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री नसीमउद्दीन सिद्दीकी ने शनिवार को अपने 72 समर्थकों के साथ कांग्रेस छोड़ दी. उन्होंने कहा कि पार्टी में आठ साल रहने के दौरान वह अपनी इच्छा के अनुसार काम नहीं कर पा रहे थे.
नसीमउद्दीन सिद्दीकी ने एक बयान में कहा कि राहुल गांधी और प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, जो मेरे भाई जैसे हैं, उनके खिलाफ मेरा कोई मनमुटाव नहीं है. उन्होंने कहा कि वह जातिवाद और सांप्रदायिकता से लड़ने के लिए कांग्रेस में शामिल हुए थे. सिद्दीकी ने कहा कि वह अपने समर्थकों से सलाह मशविरा करके अपने अगले कदम के बारे में फैसला करेंगे. उन्होंने कहा कि मैंने अभी तक किसी भी पार्टी में शामिल होने के बारे में नहीं सोचा है.



