Vinod Khosla का बड़ा दावा: 2030 तक IT-BPO मॉडल खत्म, AI बदलेगा काम करने का तरीका

Vinod Khosla का बड़ा दावा: 2030 तक IT-BPO मॉडल खत्म, AI बदलेगा काम करने का तरीका

विनोद खोसला, Sun Microsystems के संस्थापक और Khosla Ventures के मालिक हैं उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में कहा कि 20250 तक दुनिया में काम करने का तरीका पूरी तरह से बदल सकता है और लोगों को पारंपरिक नौकरी की जरूरत शायद न रहे. उनके मुताबिक, एआई इतनी तेजी से आगे बढ़ रहा है कि आने वाले दशकों में रोजगार की संरचना ही बदल जाएगी. खोसला का मानना है कि एआई का असर केवल टेक सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगा. बल्कि ये लगभग हर उद्योग को प्रभावित करेगा. खासतौर पर भारत जैसे देशों में,जहां आईटी सर्विस और बीपीओ उद्योग आर्थिक विकास की रीढ़ रहे हैं, वहां इसका प्रभाव ज्यादा गहरा हो सकता है.

2030 तक IT और BPO पर खतरा?

खोसला ने दावा किया है कि 2030 तक आईटी सर्विस और बीपीओ इंडस्ट्री अपने मौजूदा स्वरूप में लगभग खत्म हो सकती है. उनके मुताबिक, एआई बेस्ड ऑटोमेशन और नई टेक्नोलॉजी के कारण पारंपरिक आउटसोर्सिंग मॉडल टिक नहीं पाएगा. उन्होंने चेतावनी दी कि लोग इस बदलाव की रफ्तार को अभी गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, जबकि तकनीकी परिवर्तन बहुत तेजी से हो रहा है.

उन्होंने ये भी कहा कि कई व्हाइट कॉलर नौकरियां एआई के कारण प्रभावित भी होंगी. खासकर वो पेशेवर जो 15-20 साल से एक ही ढर्रे पर काम कर रहे हैं और नई तकनीकों को अपनाने में धीमे हैं, उन्हें आने वाले समय में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. अगर वो समय के साथ खुद को अपडेट नहीं करते हैं, तो टेक इंडस्ट्री में उनकी मांग घट सकती है. खोसला का संदेश साफ था- एआई से डरने के बजाय उसे अपनाना और नई स्किल्स सीखना जरूरी है, क्योंकि आने वाला समय पूरी तरह तकनीक-चालित होगा.

स्वास्थ्य सेक्टर में भी एआई के इस्तेमाल पर जोर

इतना ही नहीं उन्होंने स्वास्थ्य सेक्टर में भी एआई के इस्तेमाल पर जोर दिया. खोसला ने बताया कि साल 2008 में उन्होंने सोचा था कि केवल डॉक्टरों की ज्यादा संख्या बढ़ाकर भारत जैसे देश में सभी लोगों तक अच्छी स्वास्थ्य सेवा पहुंचना संभव नहीं है. उनका कहना है कि अगर उनके पास बहुत ज्यादा पैसा और समय भी हो, तब भी भारत के डॉक्टर और मरीज का अनुपात अमेरिका जैसा करना मुश्किल होगा. इसलिए उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि एआई डॉक्टर ही एक व्यावहारिक समाधान हो सकता है. उनके मुताबिक, अगर 70 करोड़ लोगों को रोजाना प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा देनी हो तो एआई की मदद से यो काम अपेक्षाकृत कम खर्च में किया जा सकता है, जो देश के कुल स्वास्थ्य बजट का छोटा हिस्सा होगा.