कतर से LPG लेकर मुंद्रा पहुंचा ‘शिवालिक’, गैस संकट के बीच बड़ी राहत

कतर से LPG लेकर मुंद्रा पहुंचा ‘शिवालिक’, गैस संकट के बीच बड़ी राहत

गैस के संकट के बीच यह राहतभरी खबर है. जंग और तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकलकर भारतीय जहाज शिवालिक गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पहुंच गया है. इसे एक उपलब्धि के तौर पर माना जा रहा है क्योंकि ऑयल रूट पर जोखिम बढ़ने के बाद हालात मुश्किल हो गए थे. भारतीय जहाज शिवालिक कतर से 46,000 मीट्रिक टन LPG लेकर भारत पहुंचा.

कतर से आई एलपीजी से देश में गैस आपूर्ति की जाएगी. शिवालिक एक बड़ा गैस वाहक जहाज है, जिसे शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया संचालित करता है. अब सवाल है कि शिवालिक जिस 46,000 मीट्रिक टन रसोई गैस को लेकर पहुंचा है उससे कितने सिलेंडर भरे जा सकते हैं.

46,000 मीट्रिक टन LPG से कितने सिलेंडर भरेंगे?

जब भी किसी देश से एलपीजी लाई जाती है तो उसे लिक्विड फॉर्म में आयात करते हैं. इससे गैस को ज्यादा मात्रा में लाया जा सकता है. अब सवाल उठता है कि 46,000 मीट्रिक टन LPG से कितने सिलेंडर भरेंगे? इसका जवाब जानने के लिए पहले यह जानना होगा कि कुल कितने किलो गैस है.

अगर एक जहाज 46,000 मीट्रिक टन (Metric Tonnes) LPG लेकर आया है, तो पहले इसे किलोग्राम में बदलते हैं. एक मीट्रिक टन में 1000 किलोग्राम होता है. 46,000 मीट्रिक टन को किलो में बदलें तो कुल एलपीजी 4,60,00,000 किलोग्राम हो जाएगी.

इस शिवालिक जहाज से भारत में 4,60,00,000 किलो रसोई पहुंची है. भारत में घरेलू गैस सिलेंडर में 14.2 किलोग्राम गैस होती है, इसके हिसाब से कैल्कुलेट करें तो कुल सिलेंडर की संख्या 32 लाख 39 हजार पहुंच जाती है. यानी कतर से भारत पहुंची 46,000 मीट्रिक टन गैस से भारत में कुल 32 लाख 39 हजार एलपीजी सिलेंडर भरे जा सकते हैं.

गुजरात पहुंचा शिवालिक

सरकार ने बंदरगाह अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे घरों के लिए माल उतारने को प्राथमिकता दें, उसके बाद अस्पतालों, स्कूलों और फिर वाणिज्यिक उद्यमों के लिए मामले-दर-मामले के आधार पर माल उतारने की व्यवस्था करें.

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा LPG उपभोक्ता

आंकड़ों से समझें तोभारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा LPG उपभोक्ता है. पिछले 10 सालों में देश में इसकी खपत 60 प्रतिशत बढ़ी है. यह 2015-16 में 19.6 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) से बढ़कर साल 2024-25 में 31.3 एमएमटी हुई. भारत में 33 करोड़ सक्रिय घरेलू एलपीजी उपभोक्ता हैं. 2015-16 में यह संख्या महज 16.6 करोड़ थी, यानी सक्रिय घरेलू उपभोक्ताओं की संख्या दोगुनी हो चुकी है.

देश में साल दर साल एलपीजी की खपत तो बढ़ती है लेकिन घरेलू उत्पादन उस गति से नहीं बढ़ा है. आज भी भारत में कुल खपत का 40 फीसदी ही उत्पादन किया जाता है. भारत कुल खपत के 60 फीसदी तक एलपीजी के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है. इसमें कतर, यूएई और मिडिल ईस्ट के दूसरे देश हैं. यही वजह है कि एलपीजी की क्राइसिस पैदा हुई है. सरकार इस संकट को दूर करने के लिए कई नियमों में बदलाव कर रही है. जैसे-पीएनजी कनेक्शन का इस्तेमाल करने वाले कंज्यूमर्स से एलपीजी कनेक्शन छोड़ने की बात कही गई है.