Dhurandhar: आदित्य धर और रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर’ ने वो करिश्मा कर दिखाया है, जो काफी लंबे वक्त से किसी भी मेन स्ट्रीम बॉलीवुड फिल्म ने नहीं किया था. जुलाई 2024 में जब इस फिल्म की अनाउंसमेंट हुई थी और रणवीर सिंह, आदित्य धर, आर.माधवन, अक्षय खन्ना, अर्जुन रामपाल, संजय दत्त का ब्लैक एंड वाइट फोटो सामने आया था, तब किसी ने भी ये नहीं सोचा था कि ये फिल्म इतनी बड़ी हो जाएगी. शायद आदित्य धर को खुद भी इस बात का अंदाजा नहीं रहा होगा कि उनका ये ब्रेन चाइल्ड क्या गुल खिलाने वाला है.
आज ‘धुरंधर 2’ का लोगों को बेसब्री से इंतजार है, ऐसे में आइए एक आखिरी बार जानते हैं ‘धुरंधर’ की अब तक की कहानी, किरदार और उस हर बात को जो इस फिल्म को खास बनाते हैं. ‘धुरंधर’ एक कमाल की फिल्म है, इसमें कोई दो राय नहीं है. लेकिन जो इसे दूसरी फिल्मों से अलग बनाती है वो है इसकी टीम की शांती और सादगी. आदित्य धर ने इस फिल्म की हर चीज को इतनी सादगी और मिस्ट्री के साथ पेश किया है कि आप खुद को रोक ही नहीं पाते और हर एक डीटेल पर ध्यान देने लगते हैं.
कहानी हमजा अली मजारी की…
तो ‘धुरंधर’ की कहानी है हमजा अली मजारी की. फिल्म शुरू होती है IC 814 के कांधार हाईजैक वाले सीन के साथ, जहां माधवन का किरदार अजय सानियाल प्लेन के अंदर जाता है और वहां मौजूद एक आतंकी उसका और देश का मजाक उड़ाते हुए कहता है – ‘पड़ोस में ही रहते हैं, कूदे भर का जोर लगा लो और उखाड़ लो जो उखाड़ना है!’ सानियाल कोशिश करता है कि सरकार को इस बात की गंभीरता समझाई जाए, लेकिन जब देश की रीढ़ की हड्डी और लोकतंत्र के मंदिर संसद पर हमला होता है तो सानियाल का खून खौल उठता है और वहीं से शुरू होती है ‘धुरंधर’ की असली कहानी.
प्रोजेक्ट ‘धुरंधर’ के अंडर रणवीर सिंह को पाकिस्तान के कराची के एक छोटे से टाउन ल्यारी में भेजा जाता है. उसका काम है यहां पर चल रही अलग-अलग गैंग्स में से किसी एक का हिस्सा बन, वहां से ल्यारी की गद्दी हासिल करना. हमजा को साथ मिलता है गौरव गेरा के किरदार आलम का. उसे पता चलता है कि यहां रहमान डकैत और उसके सौतेले पिता बाबू डकैत की अलग-अलग गैंग्स हैं. हमजा एक हमले में प्लानिंग कर के रहमान के बड़े बेटे को बचाने की कोशिश में उसके छोटे बेटे को बचा लेता है. यहां से एंट्री होती है अक्षय खन्ना के किरदार रहमान डकैत की, जो हमजा से खुश होकर उसे अपनी गैंग का हिस्सा बना लेता है. रहमान का भाई उजैर बलौच (दानिश पंडोर) और उसकी पत्नी उल्फत (सौम्या टंडन) को भी यहां दिखाया जाता है. उजैर और हमजा की दोस्ती फिल्म की हाईलाइट बन जाती है.
यालीना और हमजा की लव स्टोरी
इसी अस्पताल में हम राकेश बेदी के किरदार मिनिस्टर जमील जमाली से मिलते हैं. हमजा के उकसाने पर रहमान बाबू को बीच सड़क पर मार देता है और उसके लड़कों का मास मर्डर करने के बाद ल्यारी पर एकछत्र उसका राज हो जाता है. जमील की मदद से रहमान सियासत में एंट्री लेता है, जिसकी एक रैली में हमजा की मुलाकात जमाली की बेटी यालीना (सारा अर्जुन) से होती है. दोनों में दोस्ती और फिर प्यार हो जाता है. हालांकि, हमें ये क्लीयर नहीं होता कि यालीना से हमजा को वाकई प्यार है या फिर ये उसके लिए एक एसेट भर है. हमजा धीमे-धीमे रहमान के सबसे भरोसेमंद लोगों में अपनी जगह बना लेता है और तभी एक डील के दौरान उसके सामने आता है अर्जुन रामपाल का किरदार मेजर इकबाल. मेजर इकबाल और रहमान, खनानी ब्रदर्स के साथ मिलकर हथियारों की डील करते हैं. कुछ वक्त बाद हमें और हमजा दोनों को ये पता लगता है कि असल में जिन लोगों को हथियार दिलवाने में हमजा ने मदद की, वही हथियार मुंबई में हुए 26/11 हमलों में इस्तेमाल किए गए. हमजा कसम खाता है कि वो अब किसी को भी नहीं छोड़ेगा.
उधर रहमान के सियासत में बढ़ते कद को देखकर जमाली को अपनी गद्दी बचाने की याद आती है और वो रहमान को खत्म करने के लिए एसपी असलम (संजय दत्त) को बुलवाता है, जो कई सालों से रहमान के पीछे था. असलम और जमाली मिलकर रहमान के इनकाउंटर की प्लानिंग करते हैं, लेकिन ऐन वक्त पर यालीना की मदद से हमजा रहमान को बचा लेता है. इसके बाद यालीना हमजा के साथ रहने लगती है. हमजा जमाली से मिलता है और उसकी और यालीना की शादी के बदले वो जमाली को सियासी गद्दी हासिल करने में मदद करने का ऑफर करता है. हमजा और यालीना की शादी के दौरान हमजा रहमान को खत्म करने का प्लान बनाता है. वो जमाली के जरिए एसपी असलम को भरोसे में लेता है और उजैर को दूसरी तरफ फंसाकर दोनों मिलकर आखिरकार रहमान डकैत को मार देते हैं. हम आखिरी के सींस में देखते हैं कि हमजा का असली नाम असल में जसकीरत सिंह रांगी है, जिसे उम्रकैद की सजा मिली थी. उसकी सजा माफ करवाकर उसे हमजा बनने की ट्रेनिंग दी गई थी और पाकिस्तान में प्लांट किया गया था.
कौन है बड़े साहब?
हमजा अपनी डायरी में लिखी एक लिस्ट से रहमान डकैत का नाम काटता है, जहां हम एसपी असलम, मेजर इकबाल, खनानी ब्रदर्स, डेविड हेडली और बड़े साहब का नाम लिखा देखते हैं. ‘धुरंधर 2’ में हमें जसकीरत की बैकस्टोरी और उसके हमजा बनने की कहानी बताई जाएगी, साथ ही मेजर इकबाल और हमजा के बीच की तगड़ी फाइट देखने को मिलेगा. हमजा रहमान को मरवाने के बाद अब ल्यारी का नया किंग बन सकता है और उसके बाद उसका असली मकसद होगा बड़े साहब तक जाना. बड़े साहब को लेकर इंटरनेट पर जो थ्योरीज चल रही हैं, उनकी मानें तो ये दाउद इब्राहिम का किरदार हो सकता है. कई लोगों का मानना है कि बड़े साहब हाफिज सईद भी हो सकता है. धुरंधर 2 में हमें कुछ और किरदार भी देखने को मिल सकते हैं.
आदित्य की फिल्म में पीक डीटेलिंग के भी काफी मुमेंट्स हैं. आदित्य ने धुरंधर के सेट से लेकर हमजा, रहमान और हर एक किरदार की कास्टिंग और कॉस्टयूम की छोटी से छोटी बात पर ध्यान दिया है. फिल्म की कहानी इतनी सधी हुई है कि ये आपको अंत तक बांधकर रखती है कि आप सांस भी नहीं ले पाते और कब साढ़े तीन घंटे निकल जाते हैं आपको पता भी नहीं लगता. ल्यारी की सेटिंग से लेकर एक्टर्स के फाइट सीक्वंस और गन चलाने की ट्रेनिंग से लेकर उनके ल्यारी की भाषा में बात करने तक, आदित्य ने हर एक बात का ध्यान रखा है. 26/11 और संसद भवन के अटैक्स की रियल फुटेज के इस्तेमाल से फिल्म में जो सीरियसनेस आती है वो आपको खड़े होकर आदित्य के लिए तालियां बजाने पर मजबूर कर देती है.
इतनी अलग क्यों है धुरंधर?
आदित्य की ये फिल्म बाकी स्पाई थ्रिलर्स से इतनी अलग इसलिए लगती है क्योंकि फिल्म की कहानी आप पर कुछ थोपती नहीं. यहां हमजा अपने डोले शोले दिखाकर हिरोइन को इम्प्रेस करता या फिर गाना गाता नहीं दिखता. वो उस तरह से दिखाया जाता है, जिस तरह एक लोकल गैंगस्टर के गुर्गे नजर आते हैं. वो हाथों से बहुत सधी हुए तरीके से फाइट करता है, वो भी तब जब उसने आर्मी की ट्रेनिंग ली है. यहां तारीफ रणवीर सिंह की भी करनी होगी, क्योंकि उनके जैसा हाई ऑक्टेन एनर्जी वाला सितारा इस फिल्म में बिल्कुल शांत नजर आता है. फिल्म की मार्केटिंग भी ओल्ड स्कूल है, जहां न कोई पेड इंटरव्यू दिया गया न किसी पीआर का इस्तेमाल कर एक्टर्स को रियेलिटी शोज पर भेजा गया. बहुत ही शांत तरीके से इस फिल्म पर काम किया गया और हर एक बात पर मिस्ट्री रखी गई. प्रमोशनल फुटेज के नाम पर ट्रेलर और कैरेक्टर रीविलिंग शॉट्स का इस्तेमाल किया गया, जो हर एक बड़े किरदार की पहचान लोगों से करवा दें.
आदित्य ने ‘धुरंधर’ की बंपर सक्सेस के बाद भी अपना ये ओल्ड स्कूल तरीका नहीं छोड़ा. उन्होंने ‘धुरंधर 2’ को लेकर हर तरह से मिस्ट्री बरकार रखी. न कोई इंटरव्यू न बड़े-बड़े दावे. रणवीर सिंह ने भी खुद को एक तरह से अंडरग्राउंड रखा है. अब इस फिल्म के साथ फैंस की सारी उम्मीदों और भरोसा का एग्जाम होगा. देखना दिलचस्प होगा कि जो इतिहास लिखने के आधे रास्ते रणवीर की फिल्म निकली है, उस पहाड़ की चोटी तक जाने का ये सफर फिल्म और आदित्य धर तय कर पाते हैं या नहीं.
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