लंबे इंतजार के बाद अब नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) हकीकत बनने जा रहा है. करीब 25 साल पहले देखा गया यह सपना अब साकार होने के कगार पर है. अपने पहले चरण में 1334 हेक्टेयर में विकसित यह एयरपोर्ट भविष्य में 5100 हेक्टेयर तक विस्तार पाएगा. यह सिर्फ एक हवाई अड्डा ही नहीं, बल्कि एक एयरोसिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो वैश्विक स्तर की सुविधाओं से लैस होगा.
इस एयरपोर्ट की सबसे बड़ी खासियत इसकी हाईटेक तकनीक है. यहां आधुनिक इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) लगाया गया है, जिससे घने कोहरे, भारी बारिश या खराब मौसम में भी विमान सुरक्षित उतर सकेंगे. उत्तर भारत में सर्दियों के दौरान कोहरा एक बड़ी समस्या है, लेकिन यहां 50 मीटर जैसी बेहद कम विजिबिलिटी में भी फ्लाइट ऑपरेशन संभव होगा. इससे उड़ानों में देरी और कैंसिलेशन की समस्या खत्म हो जाएगी.


