मिडिल-ईस्ट तनाव के बीच 8 भारतीय नागरिक आर्मेनिया के रास्ते मुंबई पहुंचे हैं. यहां लौटे भारतीय नाविक ने इतने दिनों झेली गई परेशानियों की आपबीती बताई. ईरान से लौटे ऑयलर मसूद आलम ने बताया कि हमने ईरान की जेल में 50 दिन बिताए. अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के की वजह से उन्हें जेल में रहना पड़ा. मसूद आलम ने कहा कि हमारे परिवार के सभी सदस्य बहुत परेशान थे.
मसूद ने बताया कि हम दुबई से ज्वाइन किए थे और यमन में डीजल उतारने के बाद वापस आ रहे थे. हम ईरान में थे और एक दूसरे जहाज की मदद के लिए जा रहे थे. नेवी आई और उन्होंने गोलीबारी शुरू कर दी. ब्रिज पर गोलीबारी की वजह से कोई वहां पर जा नहीं रहा था. हमलोग इंजनमैन थे तो जल्दी से उसे बंद करके जहाज को वहां पर रोका. फिर कुछ ही देर में नेवी ऊपर आ गई और वहां मौजूद सभी लोगों को गन प्वाइंट में लेकर एक मेस में बंद कर दिया गया.
ईरान की जेल में किसी तरह का टॉर्चर नहीं
ईरान की जेल में हमें कोई यातना नहीं दी गई, बस नेटवर्क की समस्या की वजह से हमलोग घरवालों से पूरी तरह से कट गए थे और उनसे बात नहीं हो पा रही थी. ऐसे में हम वहां बहुत दुखी थे. जेल से बाहर निकलने के बाद ईरान से जब हम निकले तो हम बहुत खुश थे. इसके बाद एक होटल में रुके थे. कुछ समय बाद वहां बमबारी होने लगी.
फिर हम 5 लोगों ने 300 डॉलर लगाकर एक टैक्सी बुक की. फिर 2800 किलोमीटर का रास्ता पूरा किया. वो टैक्सी पूरे 24 घंटे तक चलती रही. उन्ह भारतीय दूतावास और भारत सरकार ने हमें बहुत अच्छा सहयोग दिया. अपने देश में वापस आकर बहुत अच्छा लग रहा है.



