देश की राजनीति में सोमवार को उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब Supreme Court of India ने Central Bureau of Investigation को अरुणाचल प्रदेश में सरकारी ठेकों के मामले में प्रारंभिक जांच शुरू करने का निर्देश दिया। यह मामला Pema Khandu के परिवार से जुड़ी कंपनियों को कथित तौर पर दिए गए कॉन्ट्रैक्ट्स से संबंधित है। कोर्ट ने साफ कहा है कि दो हफ्तों के भीतर प्रारंभिक जांच (PE) दर्ज की जाए और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई हो। इस आदेश ने राजनीतिक माहौल को अचानक गर्म कर दिया है, खासकर ऐसे समय में जब भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे अक्सर चुनावी बहस का केंद्र बनते हैं।
कांग्रेस का सीधा हमला, पीएम मोदी के नारे पर उठाए सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद Indian National Congress ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के वरिष्ठ नेता Jairam Ramesh ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi का ‘ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा’ वाला वादा अब “पूरी तरह खोखला” साबित हो रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह तो सिर्फ शुरुआत है और कई अन्य भाजपा शासित राज्यों में भी ऐसे मामले सामने आ सकते हैं। उनके बयान ने सियासी बहस को और तेज कर दिया है।
क्या है पूरा मामला? 10 साल के कॉन्ट्रैक्ट्स की जांच
सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस Vikram Nath कर रहे थे, ने आदेश दिया कि 1 जनवरी 2015 से 31 दिसंबर 2025 के बीच दिए गए सभी सार्वजनिक कार्यों के ठेकों की जांच की जाए। सुनवाई के दौरान यह बताया गया कि लगभग ₹1,270 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट्स चार ऐसी कंपनियों को दिए गए, जिनका संबंध मुख्यमंत्री के परिवार से बताया जा रहा है। कोर्ट ने CBI को 16 हफ्तों के भीतर स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के लिए भी कहा है, जिससे साफ है कि इस मामले पर न्यायपालिका की नजर लगातार बनी रहेगी।
राजनीतिक असर: भ्रष्टाचार बनाम जवाबदेही की बहस
यह मामला केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है। विपक्ष इसे बड़े राजनीतिक नैरेटिव से जोड़ रहा है, जबकि सत्ताधारी पक्ष की ओर से अभी इस पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आम जनता के नजरिए से देखें तो यह मुद्दा सीधे तौर पर सरकारी पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि जांच में क्या सामने आता है और क्या यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर भ्रष्टाचार की बहस को और तेज करता है।
आगे क्या? जांच की दिशा तय करेगी सियासी कहानी
अब सबकी नजर CBI की शुरुआती जांच और उसकी रिपोर्ट पर टिकी है। अगर जांच में गंभीर तथ्य सामने आते हैं, तो यह मामला न सिर्फ अरुणाचल प्रदेश, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बन सकता है। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट के इस कदम ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि संवेदनशील मामलों में न्यायपालिका सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है।


