Bhowanipore, जहां मुख्यमंत्री Mamata Banerjee और भाजपा के Suvendu Adhikari आमने-सामने हैं, वहां चुनाव से पहले बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) के बाद यहां लगभग 25% वोटरों की संख्या घट गई है। पहले इस सीट पर कुल 2,06,295 मतदाता थे, लेकिन अब बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने से चुनावी समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।
क्यों हटाए गए हजारों नाम, क्या है पूरी प्रक्रिया
जानकारी के मुताबिक, कुल 51,004 नाम हटाए गए। इनमें से अधिकतर नाम “अनुपस्थित”, “स्थानांतरित”, “मृत”, “डुप्लीकेट” या “अनमैप्ड” जैसी श्रेणियों में आए। पहले चरण में 44,787 नाम हटाए गए, जबकि दूसरे चरण में 2,342 और नाम सूची से बाहर किए गए। इसके साथ ही केवल 18 नए मतदाता जोड़े गए। करीब 14,154 नामों को जांच (adjudication) के लिए रखा गया था।
धर्म आधारित आंकड़ों ने बढ़ाई चर्चा
हटाए गए मतदाताओं के आंकड़ों में एक दिलचस्प पहलू सामने आया है। कुल डिलीट किए गए नामों में लगभग 23.3% मुस्लिम और 76.7% गैर-मुस्लिम मतदाता शामिल हैं। हालांकि, कुछ विश्लेषण यह भी बताते हैं कि जिन मामलों को जांच के लिए रखा गया, उनमें गैर-मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी 43% थी। वहीं अंतिम सूची में हटाए गए मुस्लिम मतदाताओं का प्रतिशत 7.7% रहा, जबकि गैर-मुस्लिम मतदाताओं का आंकड़ा 92% तक पहुंचा। इन आंकड़ों ने चुनावी बहस को और तेज कर दिया है, क्योंकि इससे वोटिंग पैटर्न और परिणामों पर असर पड़ सकता है।
जांच प्रक्रिया में क्या हुआ, कितने नाम वापस जुड़े
रिपोर्ट्स के अनुसार, जांच के दौरान लगभग 10,238 मतदाताओं के नाम फिर से जोड़े गए, जबकि 3,875 नाम अंतिम रूप से हटाए गए। इसके अलावा, चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार करीब 3,500 नाम जांच प्रक्रिया के दौरान हटाए गए। यह दिखाता है कि सूची को अंतिम रूप देने से पहले कई स्तरों पर जांच की गई।
चुनाव पर क्या पड़ेगा असर, बढ़ी राजनीतिक हलचल
भवानीपुर सीट पहले से ही बेहद अहम मानी जाती है। यहां सीधा मुकाबला दो बड़े नेताओं के बीच है, ऐसे में मतदाता सूची में इतना बड़ा बदलाव चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है। यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह चुनावी रणनीति, वोट बैंक और राजनीतिक संदेश—तीनों को प्रभावित कर सकता है।
अब नजरें मतदान और नतीजों पर
चुनाव से पहले मतदाता सूची में हुए इस बड़े बदलाव ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। अब सभी दल इस पर अपनी-अपनी रणनीति बना रहे हैं। आखिरकार, यह देखना दिलचस्प होगा कि बदले हुए वोटर बेस के साथ जनता किसे चुनती है और किसके पक्ष में सत्ता का संतुलन झुकता है।


