दिल्ली से देहरादून का सफर अब सिर्फ समय ही नहीं, खर्च के लिहाज से भी चर्चा में है। लंबे इंतजार के बाद तैयार हुआ दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे 14 अप्रैल को उद्घाटन के साथ आम लोगों के लिए खुलने जा रहा है। इस प्रोजेक्ट ने जहां सफर को 6-7 घंटे से घटाकर करीब ढाई घंटे में समेट दिया है, वहीं टोल की कीमत और FASTag Annual Pass को लेकर लोगों के मन में कई सवाल भी खड़े हो गए हैं।
तेज रफ्तार सफर, लेकिन टोल कितना भारी पड़ेगा?
करीब 210 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे उत्तर भारत के सबसे आधुनिक हाईवे प्रोजेक्ट्स में गिना जा रहा है। लेकिन सुविधा के साथ खर्च भी जुड़ा है। कार या SUV से एक तरफ का सफर करने पर करीब 670 से 675 रुपये तक टोल देना होगा। अगर 24 घंटे के भीतर वापसी करते हैं, तो कुल टोल करीब 1,010 रुपये तक पहुंच जाता है।
दूसरी ओर, हल्के कमर्शियल वाहनों के लिए यह शुल्क करीब 1,100 रुपये है, जबकि बसों और ट्रकों के लिए यह 2,300 रुपये से ऊपर जा सकता है। हालांकि, अक्षरधाम से लोनी बॉर्डर तक का हिस्सा पूरी तरह टोल फ्री रखा गया है, जिससे दिल्ली के आसपास के यात्रियों को कुछ राहत मिलेगी।
FASTag Annual Pass: क्या सच में होगा फायदा?
सबसे अहम सवाल यही है कि क्या FASTag Annual Pass इस एक्सप्रेसवे पर मान्य होगा। जवाब है—हां। चूंकि यह नेशनल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का हिस्सा है, इसलिए सरकार की FASTag Annual Pass योजना यहां लागू होगी।
इस पास की कीमत 3,075 रुपये है और यह एक साल या 200 ट्रिप (जो पहले पूरा हो) तक वैध रहता है। जो लोग इस रूट पर नियमित यात्रा करते हैं, उनके लिए यह एक किफायती विकल्प बन सकता है। बार-बार टोल देने के बजाय एकमुश्त भुगतान से कुल खर्च में अच्छी-खासी बचत संभव है।
लोकल यात्रियों के लिए अलग व्यवस्था
स्थानीय लोगों को ध्यान में रखते हुए ‘लोकल पास’ की सुविधा भी दी गई है। इसकी कीमत करीब 330 रुपये रखी गई है, जिससे आसपास रहने वाले लोग कम खर्च में रोजाना आवाजाही कर सकेंगे। इसके अलावा मासिक या वार्षिक पास लेने पर कुल टोल खर्च में 30 से 40 प्रतिशत तक की बचत हो सकती है।
इस तरह के पास टोल प्लाजा के हेल्पडेस्क से या NHAI के ऑनलाइन पोर्टल के जरिए बनवाए जा सकते हैं। इसके लिए निवास प्रमाण और वाहन की RC जरूरी होगी।
क्यों महंगा है यह एक्सप्रेसवे?
इस प्रोजेक्ट की लागत ज्यादा होने की एक बड़ी वजह इसका भौगोलिक रूट है। एक्सप्रेसवे शिवालिक की पहाड़ियों और जंगलों से होकर गुजरता है, जहां निर्माण के लिए एडवांस इंजीनियरिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया। यही कारण है कि टोल दरें भी अपेक्षाकृत ऊंची रखी गई हैं।
कुल मिलाकर, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे समय बचाने और यात्रा को आरामदायक बनाने का मजबूत विकल्प बनकर सामने आया है। हालांकि, यात्रियों को अब यह तय करना होगा कि वे समय बचाने के बदले कितना खर्च वहन करने को तैयार हैं—या फिर FASTag पास जैसे विकल्पों से लागत को संतुलित करना चाहते हैं।
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